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जमीन अधिग्रहण के बदले राज्य का मुआवजा कोई चैरिटी नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ये बात

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों की जमीन अधिग्रहण के बाद सरकार अगर नागरिकों को मुआवजा दे रही है तो वह कोई चैरिटी नहीं कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के अपने एक फैसले में कहा है कि राज्य नागरिकों की जमीन अधिग्रहण कर उसका इस्तेमाल करते हुए अपने नागरिक को मुआवजे से सालो वंचित नहीं कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राइट टु प्रॉपर्टी अब वैसे मौलिक अधिकार नहीं रहा है लेकिन यह अभी भी संविधान के अनुच्छेद- 300ए में बना हुआ है यानी संपत्ति का अधिकार संवैधानिक अधिकार है।

संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं कर सकते
शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे में किसी नागरिक को 20 साल तक उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। और उसके बाद नागरिक को मुआवजा देकर ऐसा दर्शाया जाता है कि नागरिकों पर कृपा की गई है और उसके लिए नगाड़े बजाए जाते हैं तो यह स्वीकार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के बदले नागरिक को मिलने वाला मुआवजवा कोई चैरिटी नहीं है।

…तो तब रिलीज हुआ 407 करोड़
गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मई 2023 में आदेश पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर कंटेप्ट चलाए जाने की मांग की और कहा कि जीडीए सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद भी मुआवजा देने में विफल हुई है। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल किए जाने के तुरंत बाद ही जीडीए ने मुआवजा राशि 407 करोड़ रिलीज कर दिया।

मुआवजा देकर कोई चैरिटी नहीं कर रही राज्य
जीडीए अधिकारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि जीडीए ने इस मामले में कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। ऐसे में उन्हें इस मामले में आरोपमुक्त किया जाए। साथ ही कहा कि जीडीए ने याचिकाकर्ताओं के प्रति कृपा दृष्ठि रखी है और उन्हें बेनिफिट दिया गया है। याचिकाकर्ताओं को ठीकठाक राशि दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य या उसकी मशीनरी की यह दलील कि नागरिक को बेनिफिट दिया जा रहा है, स्वीकार्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य ने 20 साल जमीन अपने पास रखी। नागरिक के संपत्ति का अधिकार अभी भी संवैधानिक अधिकार है और ऐसे में मुआवजा देकर वह चैरिटी नहीं कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद याची की कंटेप्ट अर्जी खारिज कर दी।

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