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सुप्रीम फैसलाः ED पर सुबह पूरे तेवर में थी कांग्रेस, और डेढ़ घंटे के अंदर बदल गया पूरा सीन

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के अधिकारों को चुनौती देने वाली याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ईडी की तरफ से समन करने और गिरफ्तार करने के अधिकार को सही ठहराया। शीर्ष अदालत ने यह माना कि पीएमएलए में साल 2018 में किया गया संशोधन सही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कांग्रेस के खिलाफ गया है। दरअसल, सोनिया गांधी से ईडी की पूछताछ को लेकर कांग्रेस ने आज सुबह 10 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। कांग्रेस ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट ई़़डी को लेकर बड़ा फैसला करेगा। कांग्रेस नेता और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि देश के अंदर जो ED का आतंक है इसका फैसला जल्द होना चाहिए। हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जल्द फैसला करे। कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद 11.30 बजे सुप्रीम कोर्ट का ईडी को लेकर फैसला आया। ऐसे में लगभग 1.30 घंटे के भीतर ही शीर्ष अदालत के फैसले से जुड़ी कांग्रेस की उम्मीदें खत्म हो गईं।

कांग्रेस की खत्म हो गई आस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जरिये जो आस कांग्रेस ने लगाई थी वह खत्म हो गई है। दरअसल कांग्रेस को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट ई़डी के गिरफ्तारी करने के अधिकार और समन जारी करने को लेकर याचिका के पक्ष में फैसला सुना सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी का सेक्शन 50 के तहत बयान लेने और आरोपी को बुलाने की शक्ति का अधिकार भी सही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है। सेक्शन 5, सेक्शन 18, सेक्शन 19, सेक्शन 24 और सेक्शन 44 में जोड़ी गई उपधारा भी सही है। सुप्रीम कोर्ट ने इन 5 धाराओं को सही ठहराया है।

देश के अंदर ED का आतंक है। सुप्रीम कोर्ट को इस पर फैसला जल्द करना चाहिए। इनका सक्सेस रेट .5 पर्सेंट भी नहीं है। ये न तो CRPC का प्रोसेस अपनाते हैं। इनका तफ्तीश करने, अरेस्ट करने और बयान लेने का अलग ही तरीका है। इसको सीबीआई से भी ज्यादा पावर मिली हुई है।

ईडी की भूमिका पर उठाया गया था सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि जांच एजेंसियां प्रभावी रूप से पुलिस शक्तियों का प्रयोग करती हैं। इसलिए उन्हें जांच करते समय सीआरपीसी का पालन करने के लिए बाध्य होना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि ईडी एक पुलिस एजेंसी नहीं है। ऐसे में जांच के दौरान आरोपी द्वारा ईडी को दिए गए बयानों का इस्तेमाल आरोपी के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही में किया जा सकता है। यह आरोपी के कानूनी अधिकारों के खिलाफ है।

तो सरकार को घेरने का मिल जाता मौका
ईडी के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट यदि सवाल उठाता या गिरफ्तारी या समन देने के अधिकार पर सवाल उठाता तो संसद का मौजूदा सत्र अधिक हंगामेदार हो जाता। सोनिया को लेकर कांग्रेस की तरफ से सदन के अंदर और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। ऐसे में पक्ष में फैसला आने पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देकर सरकार को सदन के अंदर और बाहर भी घेर सकती थी।

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