16.6 C
London
Tuesday, June 16, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयभारत के साथ दोस्‍ती को यूं नहीं तड़प रहा तालिबान, मोदी सरकार...

भारत के साथ दोस्‍ती को यूं नहीं तड़प रहा तालिबान, मोदी सरकार से सता रहा बड़ा डर, समझें पूरा मामला

Published on

काबुल

अफगानिस्‍तान में तालिबान राज आने के बाद पाकिस्‍तान के साथ उसके रिश्‍ते तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। वहीं नई अफगान सरकार ने इसके विपरीत भारत के साथ रिश्‍तों को बेहद मजबूत करना शुरू कर दिया है। इस बीच ब्रिटेन के एक चर्चित थिंक टैंक इंटरनैशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ स्‍ट्रेटजिक स्‍टडी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत और तालिबान दोनों ही एक- दूसरे के साथ रिश्‍ते और आपसी भरोसे को मजबूत करने के लिए उत्‍सुक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान को भारत के साथ दोस्‍ती में दोतरफा फायदा नजर आ रहा है। आइए समझते हैं

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान को यह अहसास हो गया है कि भारत के साथ दोस्‍ती करने से विदेशी निवेश आएगा और क्षेत्रीय व्‍यापार बढ़ेगा। वहीं उसे दूसरा बड़ा फायदा यह होने जा रहा है कि भारत पहले की तरह से अब नार्दन अलायंस जैसे किसी तालिबानी विरोधी हथियारबंद समूह को समर्थन नहीं देगा। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और दुनिया के साथ जुड़ने के पीछे तालिबान की 3 बड़ी मंशा है। पहला- तालिबान को उम्‍मीद है कि राजनीतिक और आर्थिक संबंध से विदेशी निवेश आएगा और क्षेत्रीय व्‍यापार बढ़ेगा। इससे तालिबान सरकार का राजस्‍व बढ़ेगा।

भारत और रूस ने नार्दन अलायंस को दिया था समर्थन
दूसरा कारण- तालिबान चाहता है कि उसके शासन की राह में आने वाले हर कांटे को उखाड़कर फेंक दिया जाए। खासतौर पर तालिबानी नहीं चाहते हैं कि कोई भी क्षेत्रीय ताकत अफगानिस्‍तान में उनके विरोधियों को सैन्‍य मदद दे जैसाकि 1990 के दशक में भारत, ईरान और रूस ने नार्दन अलायंस को दिया था। तीसरा- तालिबान को लगता है कि दुनिया के साथ अच्‍छे रिश्‍ते करने से उसे दानदाता देशों से मानवीय सहायता मिलेगी। भारत ने तालिबानी सरकार आने के बाद भी मानवीय सहायता को देना जारी रखा है। भारत ने तालिबान को गेहूं और दवाएं आदि दिया है।

तालिबान की सरकार बार-बार अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से मांग कर रही है कि उसे राजनयिक मान्‍यता दी जाए। उसने दलील दी है कि अफगानिस्‍तान की नई सरकार इस मानदंड को पूरा करती है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के पड़ोसी देशों ने उसे स्‍वीकार कर लिया है और राजनयिकों की तैनाती कर दी है। हालांकि इससे तालिबान सरकार को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बहुत मदद नहीं मिली है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत इस क्षेत्र का एक बड़ा खिलाड़ी है और उसने शुरू में तालिबान से दूरी बनाई थी लेकिन अ‍ब विभिन्‍न स्‍तरों पर दोनों के बीच सहयोग चल रहा है।’

भारत और तालिबान के बीच पहली बार बढ़ रही दोस्‍ती
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून महीने में भारतीय विदेश मंत्रालय के आला अधिकारी काबुल गए थे। तालिबान के कब्‍जे के बाद ऐसा पहली बार हुआ था। यही नहीं 1994 में तालिबानी आंदोलन शुरू होने के बाद इतने उच्‍च स्‍तर पर भारत की ओर से पहली बार बैठक हुई है। इस चर्चा के बाद भारत ने अपने दूतावास को काबुल में फिर से खोल दिया। वहीं पाकिस्‍तानी सेना का खून बहा रहे तहरीक-ए-तालिबानी आतंकी तालिबान शासित अफगानिस्‍तान से लगातार हमले कर रहे हैं। यही नहीं तालिबानी सैनिकों ने पिछले दिनों पाकिस्‍तानी सीमा के अंदर भीषण हमले करके कई आम नागरिकों की हत्‍या कर दी थी।

Latest articles

जनसेवा ही प्रशासनिक सेवा का सर्वोच्च उद्देश्य, संवेदनशीलता और निष्पक्षता से करें कार्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास...

राजस्थान में कंगना रनौत की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ टैक्स फ्री घोषित

जयपुर। राजस्थान सरकार ने बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत अभिनीत हालिया रिलीज फिल्म...

अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को पंथ विरोधी करार दिया, आप ने फैसले पर उठाए सवाल

चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया...

व्यापमं घोटाले के 847 आरोपियों के खिलाफ एक ही गवाह, सुरक्षा भी नहीं

भोपाल। मप्र के सबसे चर्चित और देश के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से...

More like this

भारत-स्लोवाकिया के बीच कई अहम समझौते, पीएम मोदी बोले- टेक्नोलॉजी हमारे संबंधों का आधार

ब्रातिस्लावा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके स्लोवाकियाई समकक्ष रॉबर्ट फिचो के बीच...

ओमान के तट पर भारतीय क्रू वाले जहाज पर लगातार दूसरे दिन हमला, होर्मुज में अमेरिकी हमले में 3 भारतीय मारे गए

तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। ओमान के तट के पास लगातार दूसरे दिन भारतीय क्रू वाले जहाज...