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मेज थपथपाई, सुनते रहे… अविश्वास प्रस्ताव पर पहले क्यों नहीं बोले राहुल गांधी, रणनीति समझिए

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नई दिल्ली

मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज लोकसभा में चर्चा शुरू हुई तो सत्तापक्ष के लोग राहुल गांधी को सुनने की मांग करने लगे। यह नजारा दिलचस्प था। दरअसल पहले खबर आई थी कि राहुल गांधी बहस की शुरुआत करेंगे लेकिन गौरव गोगोई बोलने के लिए खड़े हो गए। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने तंज कसा कि क्या हुआ, हम तो राहुल गांधी को सुनना चाहते थे। उनका लेटर भी स्पीकर महोदय आपके दफ्तर में आया था। इसी पर कांग्रेस के सदस्य भड़क गए। गौरव गोगोई ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, क्या हो रहा है, क्या दरख्वास्त दी गई है। आपके दफ्तर के अंदर क्या बातचीत हुई है, क्या हम बताएं कि पीएम मोदी जी ने आपके दफ्तर में क्या-क्या बातें की हैं। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त लहजे में कहा कि यह गंभीर आरोप है, आप बताइए। कुछ देर तक शोरगुल होता रहा। स्पीकर ने कहा कि माननीय सदस्य मेरा चेंबर भी सदन है। कभी भी ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जिसमें कोई सत्य या तथ्य नहीं है।

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस का लेटर पब्लिक डोमेन में है। गोगोई ने कहा कि अगर मंत्री महोदय ऐसा नियम शुरू करना चाहते हैं कि आपके दफ्तर में जो बात होती है, वह बाहर रखना चाहते हैं तो हम भी बाहर रख सकते हैं। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव रखते हुए गोगई ने कहा कि आपने I.N.D.I.A अलायंस के अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार किया। सर, यह अविश्वास प्रस्ताव हमारी मजबूरी है। क्योंकि ये बात कभी भी संख्या की नहीं थी, यह बात मणिपुर के इंसाफ के लिए है। इसी से साफ हो गया कि ऐन वक्त पर कांग्रेस ने रणनीति में बदलाव क्यों किया। राहुल गांधी गौरव गोगोई को बड़े ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने कई बार मेज थपथपाई।

राहुल की जगह गोगोई क्यों?
इसके पीछे एक बड़ी वजह है। इस बार संसद सत्र में पूरे समय विपक्षी गठबंधन मणिपुर पर चर्चा की मांग करता रहा। अविश्वास प्रस्ताव के बहाने कांग्रेस को बोलने का मौका मिला है तो वह देश में यह संदेश देना चाहती है कि वह नॉर्थ ईस्ट को कितनी तवज्जो देती है। राहुल गांधी बोलते तो शायद मणिपुर के मुद्दे पर उतना असर नहीं पड़ता। गौरव असम से सांसद है उनके जरिए यह मैसेज देने की कोशिश की है। यही बात गौरव की स्पीच से भी झलकी।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि हम यह अविश्वास प्रस्ताव मणिपुर के लिए लाए हैं। मणिपुर इंसाफ मांग रहा है। मणिपुर की बेटियां और किसान, छात्र इंसाफ मांगते हैं। मार्टिन लूथर किंग ने कहा है कि अगर कहीं भी नाइंसाफी हो तो वह हर जगह के लिए इंसाफ का खतरा बन सकता है। मणिपुर अगर जल रहा है, तो भारत जल रहा है। मणिपुर विभाजित हुआ है, तो भारत विभाजित हुआ है। हम सिर्फ मणिपुर की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरे भारत की बात कर रहे हैं। हमारी मांग बस इतनी थी कि पीएम इस पर बोलें। लेकिन पीएम ने मौन व्रत लिया कि सदन में कुछ नहीं बोलेंगे। इसीलिए अविश्वास प्रस्ताव की नौबत आई है। इसके जरिए हम पीएम मोदी का मौन व्रत तोड़ना चाहते हैं। उनसे तीन सवाल हैं। पहला-वह आज तक मणिपुर क्यों नहीं गए? सवाल दूसरा- पीएम को मणिपुर पर बोलने के लिए 80 दिन क्यों लगे? वह भी सिर्फ 30 सेकंड? सवाल तीसरा- पीएम ने आज तक मणिपुर के सीएम को बर्खास्त क्यों नहीं किया?

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