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देश को मिल रहा है नया संसद भवन, लेकिन पुरानी बिल्डिंग का वो ‘सीक्रेट’ जानते हैं आप?

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नई दिल्ली

इस सप्ताह के आखिर में रविवार, 28 मई को देश को नया संसद भवन मिल जाएगा। ब्रिटिश राज में बना संसद भवन 97 वर्षों तक भारत के राजनीतिक इतिहास का गवाह बना और अब वह बूढ़ा हो चुका है। इमारत कमजोर हो गई है और सुविधाएं कम पड़ गई हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन नींव रखी और अब वह बनकर तैयार है। लेकिन उसका उद्घाटन कौन करे? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना सुझाव देकर नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने ट्वीटकर कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए, न कि प्रधानमंत्री को। राहुल का यह ट्वीट तब सामने आया जब नए संसद भवन के उद्घाटन की तारीख की घोषणा की गई।

कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई, 2023 को नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। अपने तीखे तंज के लिए मशहूर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तो यहां तक कह दिया कि पीएम के मित्रों ने नए संसद भवन की फंडिंग तो नहीं की जो मोदी इसके उद्घाटन को उतावले हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन का असली हकदार राष्ट्रपति को बताया। बहरहाल, हम नए और पुराने संसद भवन के बारे में वो बातें बताने जा रहे हैं जो हमें जाननी चाहिए। हम पुराने संसद भवन का एक ‘सीक्रेट’ भी बताएंगे जो आप शायद ही जान रहे होंगे।

तब वायसराय ने किया था संसद भवन का उद्घाटन
मौजूदा या कहें पुराने संसद भवन का उद्घाटन 18 जनवरी, 1927 को हुआ था। सवाल है- तब उद्घाटनकर्ता कौन थे? पता ही है कि तब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का कब्जा था। इसलिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तो थे नहीं। वायसराय के जरिए ब्रिटेन की सरकार हम पर हुकूमत किया करती थी। 1926 से 1931 तक लॉर्ड इरविन भारत के वायसराय थे। इस कारण भारत में संसद भवन के उद्घाटन का सौभाग्य उन्हें ही हाथ लगा। 18 जनवरी, 1927 को लॉर्ड इरविन ने मौजूदा संसद भवन का उद्घाटन किया था। तब उसे ‘हाउस ऑफ पार्ल्यामेंट’ कहा गया। इस हाउस ऑफ पार्ल्यामेंट में ब्रिटिश सरकार की विधान परिषद काम करती थी।

1956 में जोड़ी गईं दो मंजिलें
ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने संसद भवन की डिजाइन तैयार की थी। माना जाता है कि मध्य प्रदेश के मुरैना स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के अद्वितीय गोलाकार आकार ने परिषद भवन के डिजाइन को प्रेरित किया था, हालांकि इसके कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं हैं। उस वक्त संसद भवन बनकर तैयार होने में 83 लाख रुपये खर्च हुए। संसद भवन 566 मीटर व्यास में बना था, लेकिन बाद में ज्यादा जगह की जरूरत पड़ी तो वर्ष 1956 में संसद भवन में दो और मंजिलें जोड़ी गईं। क्या आपको यह ‘सीक्रेट’ पता था? खैर, फिर वर्ष 2006 में संसद संग्रहालय बनाया गया जिसमें भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत के 2,500 वर्षों को प्रदर्शित किया गया है।

1,200 करोड़ की लागत से बना नया संसद भवन
अब बात नए संसद भवन की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर, 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी। शिलान्यास समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, कैबिनेट मंत्रियों और विभिन्न देशों के राजदूतों ने भाग लिया। नई संसद का क्षेत्रफल 64,500 स्क्वैयर मीटर है। नया संसद भवन टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने बनाया। इसकी डिजाइनिंग गुजरात स्थित एक आर्किटेक्चर फर्म एचसीपी डिजाइंस ने तैयार किया है। एचसीपी डिजाइन के पास गुजरात के गांधीनगर में सेंट्रल विस्टा और राज्य सचिवालय, अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट डिवेलपमेंट, मुंबई पोर्ट कॉम्प्लेक्स, वाराणसी में मंदिर कॉम्प्लेक्स के रीडिवेलपमेंट, आईआईएम अहमदाबाद के नए कैंपस के डिवेलपमेंट जैसे कामों का पहले से अनुभव है। कहा जा रहा है कि इस पर 1,200 करोड़ रुपये की लागत आई है।

भविष्य की जरूरतों का ध्यान
पुराने संसद भवन में लोकसभा के लिए 543 सीटें जबकि राज्यसभा के लिए 250 सीटें हैं जबकि नए भवन में लोकसभा और राज्यसभा की क्रमशः 888 और 300 सीटें हैं। संसद के संयुक्त सत्र के लिए पुराने भवन के केंद्रीय कक्ष का इस्तेमाल हुआ करता है, लेकिन नए भवन में संयुक्त सत्र के दौरान राज्यसभा के सांसद भी लोकसभा में ही आ जाएंगे। तब लोकसभा में 1,280 सांसदों के बैठने की व्यवस्था हो जाएगी। नया संसद भवन चार मंजिला है जबकि पुराने संसद भवन में तीन मंजिल है।

कार्यपालिका प्रमुख बनाम विधायिका अध्यक्ष
बहरहाल, उद्घाटन कौन करे, इसके सिवा विवाद तारीख को लेकर भी है। 28 मई, 2023 को स्वांत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर या वीर सावरकर की 150वीं जयंती है। सावरकर केंद्र में सत्तारूढ़ दल बीजेपी वैचारिक प्रेरणा स्रोत हैं। दो दिन पहले 26 मई, 2023 को मोदी सरकार के नौ साल पूरे हो जाएंगे। नरेंद्र मोदी ने 26 मई, 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति विधायिका के अध्यक्ष होते हैं। बल्कि संसद का निर्माण ही लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर होता है। विरोधी इसी का हवाला देकर पीएम की जगह राष्ट्रपति से नए संसद भवन के उद्घाटन की मांग कर रहे हैं।

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