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Wednesday, March 4, 2026
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तूल पकड़ता जा रहा है थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला का मुद्दा, लोकसभा में कैसे तीखी हो गई बहस

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नई दिल्ली

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला को लेकर मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। तमिलनाडु सरकार इसका लगातार विरोध कर रही है और लोकसभा में सोमवार को यह मुद्दा छाया रहा। केंद्रीय मंत्री शिक्षा मंत्री के एक बयान के बाद डीएमके सहित विपक्ष ने जमकर विरोध किया और शिक्षा मंत्री को अपने बयान में एक शब्द वापस लेना पड़ा। हालांकि इसके बाद भी विरोध रुका नहीं क्योंकि बहस इसे लेकर होने लगी कि क्या कभी तमिलनाडु सरकार ने एनईपी को लेकर सहमति जताई थी या नहीं। जहां डीएमके इसके खिलाफ डटकर खड़ा है वहीं बीजेपी का आरोप है कि डीएमके इस मसले पर राजनीति कर रहा है और यह बस चुनाव के लिए कर रहा है।

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान डीएमके सांसद टी सुमति ने कहा कि एनईपी को स्वीकार नहीं करने के कारण तमिलनाडु को पीएमश्री योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले 2,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि दूसरे राज्यों को दे दी गई है। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री प्रधान ने डीएमके पर तमिलनाडु में छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।

तमिलनाडु ने स्वीकार किया या नहीं, इस पर विवाद
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एक समय था जब तमिलनाडु सरकार केंद्र सरकार के साथ (एनईपी पर) एमओयू पर हस्ताक्षर करने को तैयार थी। तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री के साथ कुछ सदस्य हमारे पास आए थे और उन्होंने सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि हम तमिलनाडु को वित्तीय आवंटन कर रहे हैं, लेकिन वे प्रतिबद्ध नहीं हैं। वे (द्रमुक) तमिलनाडु के छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। वे जानबूझकर राजनीति कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रधान ने कहा कि मेरी जानकारी है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एनईपी को स्वीकार करना चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें रोक रहे हैं जो भविष्य में मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला की नीति तमिलनाडु को स्वीकार्य नहीं है और न ही कभी तमिलनाडु सरकार ने ये स्वीकार की। लोकसभा में हुई बहस को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा और कहा कि वे खुद को राजा समझकर ‘अहंकार’ में बात करते हैं। उन्होंने प्रधान से अपनी जुबान पर नियंत्रण रखने को भी कहा।

स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार केंद्र की ‘पीएम श्री’ योजना को लागू करने के लिए आगे नहीं आई है और जब ऐसा है तो कोई भी उन्हें इसके लिए राजी नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा लिखा ‘बस यह बताइए कि क्या आप वह फंड जारी कर सकते हैं या नहीं, जो हमसे एकत्र किया गया था और जो तमिलनाडु के स्टूडेंट्स के लिए है।’

बीजेपी का आरोप भावनाएं भड़का रही डीएमके
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कहा कि चुनाव जीतने के लिए डीएमके भावनाओं को भड़का रही है। बीजेपी सांसद ने कहा कि तमिल पुरानी भाषा है लेकिन संस्कृत उससे भी पुरानी भाषा है। देश के किसी भी मंदिर में चले जाएं, तमिल, तेलुगु, कन्नड किसी भी भाषा वाले क्षेत्र में चले जाएं, सभी मंदिरों में आज भी पूजा संस्कृत में ही होती है।

चुनाव पर पड़ेगा असर
तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और डीएमके थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले को बड़ा मुद्दा बना रही है और आरोप लगा रही है कि केंद्र सरकार तमिलनाडु पर हिंदी थोपना चाहती है। तमिलनाडु में हिंदी विरोध वैसे भी वहां की राजनीति में अहम रहा है। वहां हिंदी की अनिवार्यता को सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे से उठाकर राजनैतिक मुद्दा बनाने की शुरुआत हिंदी के पहले विरोध आंदोलन यानी साठ के दशक में हो गई थी।

तब हिंदी विरोध के रूप में वहां के क्षेत्रीय नेताओं को एक ऐसा सशक्त मुद्दा मिला, जिसने तमिलनाडु में द्रविड़ राजनैतिक दलों की नींव रखने का काम किया। 1965 में हुए इस आंदोलन ने द्रविड़ अस्मिता का सवाल उठाया और दो साल बाद ही डीएमके सत्ता में आ गई। तब से ही लगातार वहां द्रविड़ अस्मिता और भाषा एक मुद्दा बनता रहा है।

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