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मुस्लिमों को गांव में न घुसाने का था फरमान, दबाव बना तो बैकफुट पर सरपंच

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नूंह ,

हरियाणा के नूंह में हुई आगजनी के बाद आपसी भाईचारे में पड़ती हुई दरार ने बड़ी चिंता पैदा कर दी थी. लेकिन अब लगातार हरियाणा में अलग-अलग समुदायों से भाईचारे के समर्थन के बाद दो गांव के सरपंचों ने घोषणा की है कि वो अपने संदेश वापस ले रहे हैं. पता हो कि इस घटना के बाद हरियाणा के महेंद्रगढ़, झज्जर और रेवाड़ी के 50 से अधिक गांवों ने नूंह में सांप्रदायिक झड़पों के बाद मुस्लिम व्यापारियों का बहिष्कार करने के लिए पत्र जारी किया था.

महेंद्रगढ़ के सैदपुर के एक सरपंच ने कानूनी सलाह के बाद मंगलवार को अपना पत्र वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर किसी समुदाय को अलग करना अवैध और असंवैधानिक” था. झज्जर के दो गांवों के प्रमुख- कबलाना की सरपंच उषा देवी और मुंडाखेड़ा गांव की कविता ने बुधवार को वीडियो जारी कर कहा कि हर धर्म का सम्मान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. हमारा इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था. चोरी के मामले बहुतायत में सामने आने के बाद केवल निवारक उपाय के रूप में मुस्लिमों के बहिष्कार के पत्र जारी किए गए थे.

झज्जर के डिप्टी कमिश्नर शक्ति सिंह ने बताया कि ऐसा कदम असंवैधानिक है. यह ‘फ्रिंज इलीमेंट्स’ का काम प्रतीत होता है, जो कि नूंह और आसपास के इलाकों में झड़पों के बाद नफरत फैला रहे थे. आपको बता दें कि 3 और 4 अगस्त को तीन जिलों के 50 से अधिक सरपंचों ने अपने गांवों में मुस्लिम व्यापारियों और समुदाय के अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पत्र तैयार किए. हस्ताक्षर किए और मुहर लगाई थी.

सरपंचों द्वारा हस्ताक्षरित पत्रों में यह भी कहा गया है कि गांवों में रहने वाले मुसलमानों को पुलिस को अपने पहचान दस्तावेज जमा करने होंगे. अधिकांश गांवों में कुछ परिवारों को छोड़कर अल्पसंख्यक समुदाय का कोई भी निवासी नहीं है.

AajTak ने जिन सरपंचों से बात की, उनके अनुसार सैदपुर के सरपंच विकास पत्र लेकर आए थे. उन्होंने ही महेंद्रगढ़ जिले के अन्य ग्राम प्रधानों से भी इसका पालन करने को कहा. ताजपुर के सरपंच राजकुमार ने कहा था कि उन्होंने विकास की तरफ से जारी पत्र का एक ‘टेम्पलेट’ कॉपी किया और उस पर हस्ताक्षर किए. उधर, सरपंच विकास ने भी कहा, उन्होंने कानूनी सलाह पर पत्र वापस ले लिया था. लेकिन किसी ने उस पत्र को सोशल मीडिया पर जारी कर दिया.

बुधवार को नारनौल के भाजपा विधायक ओम प्रकाश यादव ने बताया कि उन्हें मुसलमान व्यापारियों के बहिष्कार संबंधी पत्रों की जानकारी नहीं है. लेकिन अगर ऐसा कोई कृत्य किया गया है तो यह गलत है और यह भारत के विचार के खिलाफ है. प्रशासन अपना काम कर रहा है. नारनौल के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने विवादित पत्र लिखने के लिए गांवों को कारण बताओ नोटिस भेजने के आदेश दिए हैं. ब्लॉक कार्यालय जल्द ही इस संबंध में सरपंचों को नोटिस जारी कर सकता है.

प्रशासन ने कहा- ऐसा करने वालों पर होगी सख्त
रेवाड़ी जिले में भी ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने विशेष समुदाय के लोगों को गांव में फेरी लगाने व्यवसाय करने पर रोक लगाने को लेकर क्षेत्र के थाना प्रभारी के नाम पत्र लिखा गया था. जिसके बाद आप प्रशासन अलर्ट हो गया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है.

इस पूरे मामले में जिला उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा ने कहा कि रेवाड़ी की कुछ ग्राम पंचायतों ने अपने क्षेत्र में पड़ने वाले थानों के प्रभारी को एक लेटर लिखा है जिसमें विशेष समुदाय से संबंध रखने वाले व्यक्तियों को गांव में घुसने से रोकने की बात कही है और कहा है कि अगर कोई अनहोनी होती है तो वह व्यक्ति विशेष स्वयं जिम्मेदार होगा. इसमें अभी तक जो जानकारी सामने आई है. गांव की तरफ से कोई भी एकता की बात नहीं की गई. केवल सरपंचों ने अपने लेवल पर पत्र दिया है. अगर यह बात सही साबित हो जाती है तो सरपंचों के खिलाफ पंचायती राज एक्ट के तहत जो भी कार्रवाई बनती है. पुलिस द्वारा भी इसमें कार्यवाही अमल में लाई जाएगी .

वहीं डीएसपी संजीव कुमार ने कहा कि जिले में सभी धर्म और समुदाय के लोगों को कहीं भी आने-जाने और व्यवसाय करने की पूरी तरह आजादी है. अगर धर्म,जाति या किसी विशेष समुदाय के लोगों को कहीं भी आने-जाने पर कोई पाबंद करता है. तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी. आम जनता से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया का प्रयोग आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए प्रयोग करें. सोशल मीडिया पर अगर कोई गलत पोस्ट डालते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि नूंह में हुई हिंसा के बाद जिले से लगते जिले फरीदाबाद, गुरुग्राम, रेवाड़ी और पलवल में भी छोटी मोटी घटनाएं देखने को मिली थीं. लेकिन अब हर जगह शांति का माहौल है. प्रशासन की तरफ से लगाई गई धारा 144 भी हटा दी गई है. लेकिन इसी बीच रेवाड़ी जिले की ग्राम पंचायत ने विशेष समुदाय और शरारती तत्वों के गांव में आने से पहले इजाजत लेने और फेरीवालों पर पाबंद लगाने की बात कही है, जिसके लिए उन्होंने पहले हुई चोरी की घटनाओं का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि विशेष समुदाय के आने से गांव में अशांति हो सकती है. इसके चलते यह फैसला लिया गया है.

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