नई दिल्ली
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर जोर-शोर से तैयारी चल रही है। आने वाले कुछ दिनों में राज्य की बीजेपी सरकार यूसीसी को लागू करने का ऐलान कर देगी। इस बीच भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने इसे प्रगतिशील कानून बताया है। उन्होंने कहा है कि देश की राष्ट्रीय एकता की दिशा में यूसीसी बेहद महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इसे लागू किए जाने से पहले आम सहमति बनाई जानी चाहिए।
गोगोई सूरत लिटफेस्ट 2025 में “न्यायपालिका के लिए चुनौतियां” विषय पर अपनी बात रख रहे थे। पूर्व सीजेआई ने कहा, “समान नागरिक संहिता एक प्रगतिशील कानून है, जो कानून में पहले से चली आ रहीं अलग-अलग परंपराओं की जगह लेगा।”
‘संविधान में है यूसीसी का जिक्र’
पूर्व सीजेआई सूरत में RSS के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के कार्यक्रम में पहुंचे थे। यूसीसी का समर्थन करते हुए गोगोई ने कहा कि यह कई पुरानी रीतियों को बदलेगा जो अब कानून बन गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूसीसी संवैधानिक है इसका जिक्र अनुच्छेद 44 में है। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने पर सभी नागरिकों के लिए, चाहे उनका धर्म कोई भी हो, एक ही कानून होगा। यह शादी, तलाक, गोद लेना, विरासत और गुजारा भत्ता जैसे मामलों पर लागू होगा।
‘धर्म से यूसीसी का कोई लेना-देना नहीं’
गोगोई ने कहा कि यूसीसी का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 25 और 26) का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने गोवा में यूसीसी के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण दिया और आम सहमति बनाने और गलत सूचनाओं को रोकने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।
आम सहमति बनाने की अपील की
गोगोई ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो केस समेत कई मामलों में सरकार को यूसीसी पर विचार करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यूसीसी देश को एक करेगा और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की वजह से लंबित पड़े मामलों को सुलझाएगा। हालांकि, उन्होंने सरकार और सांसदों से जल्दबाजी न करने और आम सहमति बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को यूसीस के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘जब आप आम सहमति बना लेंगे, तो लोग समझ जाएंगे। लोगों का एक वर्ग कभी नहीं समझेगा, वे न समझने का दिखावा करेंगे।’
‘एक देश एक चुनाव’ का भी किया समर्थन
इसके अलावा ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर गोगोई ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनकी और कुछ अन्य पूर्व सीजेआई की राय मांगी थी। उन्होंने इस विचार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से शासन प्रभावित होता है और प्रशासन और वित्त पर बोझ पड़ता है। इसलिए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ व्यवस्था जरूरी है।
एक ओर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार यूसीसी को लागू करने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम संगठन इसके विरोध में अदालत जाने की बात कह रहे हैं। मुस्लिम सेवा संगठन, तंजीम-ए-रहनुमा-ए-मिल्लत तथा जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने साफ किया है कि समान नागरिक संहिता के लागू होते ही वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने बातचीत में बताया था कि उत्तराखंड में जैसे ही समान नागरिक संहिता लागू होगी, अगले ही दिन हम उत्तराखंड हाई कोर्ट पहुंच जाएंगे। कुरैशी ने आरोप लगाया था कि उत्तराखंड सरकार के द्वारा लाई जा रही समान नागरिक संहिता के जरिए एक धर्म की संस्कृति को दूसरे धर्म पर थोपने की कोशिश की जा रही है।
