ताइपे
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया में ताइवान को लेकर युद्ध का सबसे ज्यादा खतरा है। इस बीच ताइवान में अमेरिका ने अपने सैनिकों की तैनाती कर दी है। ताइवान के यूनाइटेड डेली न्यूज (UDN) के मुताबिक अमेरिकी विशेष बल के सैनिक स्थायी रूप से ताइवान में तैनात रहेंगे। अमेरिकन फर्स्ट स्पेशल फोर्स को द्वीप पर एक स्थायी ट्रेनिंग मिशन के लिए तैनात किया गया है। अमेरिका ने पहले भी ताइवान को प्रशिक्षण मिशन भेजे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब स्थायी तैनाती की सूचना मिली है।
फर्स्ट स्पेशल फोर्स ताइवान की सेना के विशेष अभियान बल की एक बटालियन के दो ठिकानों पर तैनात है। कुछ अमेरिकी सैनिक किनमेन में हैं जो ताइवान के नियंत्रण वाले द्वीपों का समूह है। यह द्वीप चीन के जियामेन बंदरगाह शहर से 10 किमी की दूरी पर है। वहीं दूसरा ग्रुप ताइवान के तट पर पेस्काडोरेस द्वीप पर मौजूद है। कुछ एक्सपर्ट्स अमेरिका के इस कदम को ‘एक चीन नीति’ के खिलाफ भी देख रहे हैं। हालांकि अमेरिका के सैनिकों की मौजूदगी वॉशिंगटन को बड़ा फायदा पहुंचाएगी।
अमेरिका ने बढ़ाई चीन की टेंशन
अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी से ताइवान स्ट्रेट और चीनी तट पर होने वाली गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी अमेरिका को मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त उत्तरी ताइवान में तैनात अमेरिकी सैनिक ताइवान की सेना को ड्रोन की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह ताइवान की स्पेशल फोर्स की मदद करेगा। अमेरिका के कितने सैनिक तैनात हैं, इसकी सही संख्या और ट्रेनिंग से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है। 2021 में ताइवान की राष्ट्रपति ने इस बात की पुष्टि की थी कि अमेरिकी विशेष बल ताइवान के सैनिकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
चीन से ताइवान को खतरा
ट्रेनिंग मिशन के बारे में पूछे जाने पर, अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन मेनर्स ने कोई बयान नहीं दिया। हालाँकि, उन्होंने ताइवान की सुरक्षा के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता पर जोर दिया और कहा कि ताइवान को उनका समर्थन और रक्षा संबंध चीन के खतरे को देखते हुए है। ट्रंप और बाइडेन दोनोंही राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में ताइवान को हथियारों की बिक्री बढ़ाई गई है। इसके अलावा ट्रेनिंग देने वाले सैनिकों को भी तैनात कियाहै।
