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यूपी MLC उपचुनाव: सपा का वॉकओवर… और BJP में एक अनार सौ बीमार

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नई दिल्ली ,

उत्तर प्रदेश की दो विधान परिषद सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए नामांकन शुरू हुए दो दिन हो गए हैं, लेकिन बीजेपी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. समाजवादी पार्टी के पास नंबर गेम न होने के चलते बीजेपी को वॉक ओवर दे दिया है. इस तरह दोनों ही एमएलसी सीटों पर बीजेपी की निर्विरोध जीत तय है. इसके बाद भी पार्टी ने अभी तक कैंडिडेट के नामों का ऐलान नहीं किया है.

बता दें कि सूबे की जिन दो विधान परिषद सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उसमें एक सीट सपा और एक सीट बीजेपी के कब्जे में रही है. सपा के अहमद हसन, जिनका कार्यकाल 30 जनवरी 2027 तक था, लेकिन 20 फरवरी 2022 को निधन हो जाने के चलते रिक्त हुई है. वहीं, बीजेपी नेता ठाकुर जयवीर सिंह जिनका कार्यकाल 5 मई 2024 तक था, लेकिन विधायक बनने के बाद उन्होंने 24 मार्च 2022 को त्यागपत्र दे दिया था. ऐसे में इन सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए नामांकन सोमवार से शुरू हो गया है जबकि मतदान 11 अगस्त को है.

बीजेपी का जीतना तय है
विधान परिषद उपचुनाव में माना जा रहा है कि अखिलेश यादव अपना प्रत्याशी नहीं उतारेंगे, क्योंकि सपा के पास एक भी एमएलसी सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है. उपचुनाव में एक एमएलसी सीट जीतने के लिए पहली प्रथामिकता के आधार पर 200 वोट चाहिए होंगे. सूबे की विधानसभा में सपा के पास 111 विधायक हैं जबकि बीजेपी गठबंधन के पास 278 विधायक हैं. इस तरह किसी भी हाल में सपा की जीतने की स्थिति नहीं बन रही जबकि बीजेपी दोनों ही सीटें आसानी से जीत सकती है.

एमएलसी चुनाव में विपक्षी दलों के वॉकओवर के बाद बीजेपी का दोनों ही सीटों पर निर्विरोध जीतना तय है. इसके बावजूद बीजेपी अभी तक कैंडिडेट फाइनल नहीं कर सकी. इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि एमएलसी सीटें दो हैं और दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी है. चर्चा है कि सपा से नाता तोड़ने वाले सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे अरविंद राजभर को विधान परिषद भेजने की कवायद में जुटे हैं, लेकिन यह तभी संभव हो पाएगा जब बीजेपी चाहेगी. ऐसे में देखना है कि बीजेपी राजभर के बेटे को राज्यसभा भेजेगी या फिर अपने किसी नेता को.

बीजेपी में भी कई दावेदार
यूपी विधान परिषद में आठ सीटें खाली हैं. इनमें से 6 सीटों पर सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल कोटे से होना है. इससे पहले दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, जिसके लिए बीजेपी के कई दावेदारों के नाम चर्चा में है. इनमें से अधिकांश नाम प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के हैं. बीजेपी के प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य, प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष सिंह, प्रदेश मंत्री डा. चंद्रमोहन सिंह, प्रदेश मंत्री देवेश कोरी, पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, कानपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, गोरखपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह का नाम है.

क्षेत्रीय समीकरण साधेगी
माना जा रहा है कि बीजेपी एक सीट पूर्वांचल और दूसरी पश्चिम यूपी के खाते में रखते हुए ही विधान परिषद के उम्मीदवारों का चयन करेंगी. इस तरह बीजेपी विधान परिषद के जरिए क्षेत्रीय समीकरण साधने की कवायद में ताकि 2024 के लोकसभा में जीत का परचम फहरा सके. इसके अलावा सुभासपा के ओपी राजभर भी अपने बेटे अरविंद राजभर को विधान परिषद भेजने के प्रयास में हैं, जिसके चलते ही उन्होंने सपा से भी अपना गठबंधन तोड़ लिया है.

राजभर को रिटर्न गिफ्ट देगी?
राजभर भले ही अपने बेटे को विधान परिषद भेजने के जोड़तोड़ में जुटे हों, लेकिन बीजेपी क्या उनके सियासी मंसूबे को पूरा करेगी. राजभर पहले भी बीजेपी के साथ रह चुके हैं, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के बाद योगी सरकार और बीजेपी पर अतिपिछड़ा विरोधी करार देते हुए अलग हो गए थे और 2022 के चुनाव में सपा के हाथ मिला लिया था. राजभर-अखिलेश की जोड़ी ने पूर्वांचल के कई जिलों में बीजेपी को तगड़ा सियासी झटका दिया था. बीजेपी 2024 के चुनाव में क्लीन स्वीप का सपना लेकर चल रही है, जो राजभर के बिना संभव नहीं है. ऐसे में सपा को सियासी झटका देने के लिए बीजेपी राजभर को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर एमएलसी का इनाम दे सकती है?

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