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मोदी के निशाने पर क्या थीं ममता बनर्जी,  कहा…गंभीरता से लें ऐसे अपराध, रेप में राजस्‍थान और यूपी सबसे आगे

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले के प्राचीर से दिए अपने भाषण में कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर संकेतों में बड़ी बात कही है। पीएम ने कहा कि महिलाओं का हम दमखम देख रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ चिंता की बातें भी आती हैं और आज मैं लाल किले से एक पीड़ा व्यक्त करना चाहता हूं। एक समाज के नाते हमें गंभीरता से सोचना होगा। हमारी माताओं-बहनों और बेटियों के प्रति अत्याचार हो रहे हैं। उसके प्रति देश का आक्रोश है, जनसामान्य का आक्रोश है। इस आक्रोश को मैं महसूस कर रहा हूं। इसे देश को, समाज को, हमारी राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना होगा। मोदी ने भले ही पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, मगर उन्होंने इशारों-इशारों में बड़ी बात कह दी है। वो भी उन ममता के लिए जिन्हें उनके समर्थक सियासी योद्धा मानते हैं। राजनीतिक एक्सपटर्स से समझते हैं पूरी बात।

हर घंटे 51 महिलाओं के साथ अपराध
राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,45, 256 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक हैं। यानी हर एक घंटे में 51 महिलाओं के साथ अपराध हुआ। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में देश में कुल 58,24,946 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 4,45, 256 मामले महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध के हैं, जबकि साल 2021 में 4, 28,278 केस दर्ज किए गए थे।

रेप में राजस्‍थान और यूपी सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रेप के कुल 31,516 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सबसे अधिक मामले 5399 राजस्थान के हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3690 केस, मध्‍यप्रदेश में 3029 , महाराष्ट्र में 2904 और हरियाणा में 1787 दुष्‍कर्म के मामले दर्ज किए गए। वहीं, महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं। हालांकि, दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

भारत में वर्कप्लेस पर महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध
भारत में वर्कप्लेस पर महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच ऐसे अपराध 402 से बढ़कर 422 हो गए। ये हालात तब हैं, तब वर्कप्लेस पर महिलाओं से यौन अपराध अधिनियम, 2013 कब का पारित हो चुका है।

दहेज के लिए हत्‍या करने में यूपी-बिहार आगे
महिलाओं के लिए दिल्ली और राजस्थान सबसे असुरक्षित राज्य हैं, लेकिन दहेज के लिए जान लेने वालों में पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश और दूसरे नंबर पर बिहार है। दहेज के लिए उत्तर प्रदेश में 2138 और बिहार में 1057 महिलाओं की हत्‍या कर दी गई। वहीं मध्‍यप्रदेश में 518, राजस्थान में 451 और दिल्‍ली में 131 महिलाओं की दहेज के लिए हत्‍या कर दी गई।

क्या बंगाल की सियासत अब बदलेगी
दक्षिण एशियाई यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवनाथ पाठक के अनुसार, कोलकाता डॉक्टर केस में इस बार ममता सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। कहा जा रहा है कि यह मामला बंगाल की राजनीति को बदल कर रख देगा। इससे पहले संदेशखाली और आसनसोल हिंसा के मामले में ममता बनर्जी बैकफुट पर आ चुकी हैं।

निर्भया से लोग कर रहे हैं तुलना, तब केजरीवाल आए थे
देवनाथ पाठक बताते हैं कि कोलकाता की इस दरिंदगी को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ कई तरह के प्रदर्शन हुए। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी भाजपा का कद जरूर बढ़ा, मगर सीटों के मामले में वो ज्यादा कमाल नहीं कर पाई। ममता बनर्जी के सियासी कद में कोई फर्क नहीं आया। उनकी तृणमूल पार्टी इन इलाकों में लगातार जीत दर्ज करती रही। हालांकि, ममता बनर्जी की अग्निपरीक्षा इस बार ज्यादा है, क्योंकि वो विपक्ष के साथ-साथ अपने ही सहयोगियों के सवालों से घिर गई हैं। ट्रेनी डॉक्टर की दरिंदगी की तुलना दिल्ली के निर्भया केस से की जा रही है और आम जनता सड़कों पर निर्भया की तर्ज पर (अभाया) के इंसाफ की मांग कर रही है। 2012 में निर्भया गैंगरेप के बाद पूरे देश में प्रदर्शन हुए थे। उसके कुछ समय बाद ही दिल्ली की सत्ता पर अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी आई थी।

राज्य में कानून व्यवस्था कायम करने का काम राज्यों का
संविधान के अनुसार, किसी भी राज्य में कानून व्यवस्था का काम संबंधित राज्य सरकार का है। केंद्रीय गृह मंत्रालय देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए उत्तरदायी है। यह आपराधिक न्‍याय प्रणाली के लिए कानून का पालन करवाता है। देश में पुलिस बल को सार्वजनिक व्यवस्था का रख-रखाव करने और अपराधों की रोकथाम और उनका पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश का अपना अलग पुलिस बल है। राज्यों की पुलिस के पास ही कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।

पुलिस को क्यों प्रोटेक्ट कर रहीं ममता बनर्जी
बंगाल के लोगों को इस संवेदनशील घटना पर ममता सरकार का रवैया हैरान कर रहा है। पश्चिम बंगाल की पुलिस पर आरोप है कि उसने इतने वीभत्स कांड में भी टाल-मटोल वाला रवैया अपनाया जिसकी वजह से सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपना पड़ा। उस वक्त कोलकाता पुलिस ने इस मामले में सुसाइड की आशंका जताई थी। सीबीआई जांच की पहली ही रात को अचानक हजारों की भीड़ ने हमला कर दिया। इस पर यह सवाल उठा कि रात को अचानक इतनी भीड़ कहां से आई, क्या यह साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश थी? जब यह मामला गरमाया तो ममता ने कहा कि ये हमला राम और वाम ने बाहरी लोगों से कराया है।

तृणमूल नेताओं की चुप्पी भी बड़े सवाल पैदा कर रही है
सोशल मीडिया पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि सीबीआई का विरोध करने वाली ममता बनर्जी को मजबूरन क्यों एजेंसी को यह जांच सौंपनी पड़ी? इस मामले में तृणमूल नेता महुआ मोइत्रा का एकमात्र ट्वीट है, जो अक्सर ऐसे मामलों में मुखर रही हैं। लोकसभा में TMC के 29 सांसद हैं जिसमें महुआ मोइत्रा, काकोली घोष और डोला सेन समेत 11 सांसद महिलाएं हैं। इसके बावजूद इन सभी महिला सांसदों ने चुप्पी साधे रखी।

अब क्या फायदा दीदी, आपके सहयोगी भी नहीं दे रहे साथ
अब ममता कह रही हैं कि 17 अगस्त को सभी ब्लॉकों में विरोध मार्च निकाला जाएगा। 18 अगस्त को सभी ब्लॉकों में प्रदर्शन होगा और 19 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हालांकि, बीजेपी अब ममता बनर्जी का इस्तीफा मांग रही है। टीएमसी नेता शांतनु सेन के आरजी कर अस्पताल पहुंचने पर ‘गो बैक’ के नारे लगे। घटना पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महिला डॉक्टर के साथ जो हुआ, उसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। देश की आधी आबादी यानी महिलाएं कहां सुरक्षित हैं? इस देश में महिलाओं के साथ क्या हो रहा है? स्थानीय प्रशासन ने अपराध को छिपाने की कोशिश क्यों की? कल जो हिंसा हमने देखी, वह अस्वीकार्य है और यह किसी भी बात का जवाब नहीं है।

ममता के जवाब में जदयू का पलटवार
ममता बनर्जी ने कहा था कि कल पुलिस पर भी आक्रमण हुआ। पुलिस के लोगों पर बहुत आक्रमण हुआ लेकिन मैं उन्हें साधुवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने धीरज नहीं खोया। उन्होंने शांति के लिए किसी को चोट नहीं पहुंचाई। जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा, ममता बनर्जी के बयान की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। वे मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के योग्य नहीं बची, उनकी नारी संवेदनाएं मर चुकी हैं।

बंगाल से वाम मोर्चे का सफाया करने वाली दीदीं गुस्से में क्यों नहीं
सोशल मीडिया पर आरजी कर हॉस्पिटल में हुए कोलकाता डॉक्टर केस को लेकर #BengalHoror #यह_आज़ादी_झूठी_है #KolkataDeathCase #MamataMustResign और #KolkataPolice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। डॉक्टर के इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ने वाली आम जनता ममता बनर्जी सरकार से इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं, कोलकाता पुलिस के रुख को लेकर भी प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि दीदी अब आपको गुस्सा क्यों नहीं आ रहा है। कहां गया वो आक्रोश? लोग तो यह भी कह रहे हैं कि क्या यह वही दीदी हैं, जिसने अकेले दम पर पश्चिम बंगाल पर 34 साल से काबिज वाम मोर्चे की सरकार का सफाया कर दिया था।

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