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’44 साल में ऐसी भीड़ नहीं देखी थी, हमने खुद 15 शव निकाले…’, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुली की आंखों-देखी

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नई दिल्ली,

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. मरने वालों में 9 महिलाएं, 4 पुरुष और 5 बच्चे हैं. इनमें सबसे ज्यादा बिहार के 9, दिल्ली के 8 और एक हरियाणा का रहने वाला है. यह घटना रात करीब 10 बजे के आसपास प्लेटफार्म 13 और 14 पर हुई. घटना के वक्त हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ में जाने के लिए स्टेशन पर एकत्रित हो रहे थे और ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे.

स्टेशन पर कुली का काम करने वाले रिंकू मीणा ने बताया, ‘भगदड़ के समय मैं पुल के ऊपर खड़ा था। ट्रेन पहले प्लेटफार्म नंबर 14 पर आनी थी। अनाउंसमेंट में उसका प्लेटफार्म बदल दिया गया। उसी वजह से सीढ़ियों पर बैठे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सीढ़ियों पर बैठे लोग भीड़ के नीचे दब गए और उनकी जान चली गई।’

रेलवे स्टेशन पर कुली सुगन लाल मीणा ने बताया कि मैंने अपने साथियों के साथ 15 लाशें निकालीं और एम्बुलेंस में रखीं. मैं 1981 से यहां कुली का काम कर रहा हूं. इतनी भीड़ कभी नहीं देखी है. प्लेटफॉर्म चेंज हुआ, जिससे भगदड़ मच गई. लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. लाशें देखने के बाद खाना नहीं खा पाया.

कुली ने क्या बताया?
“मैं 1981 से कुली का काम कर रहा हूं, लेकिन इससे पहले मैंने कभी इतनी भीड़ नहीं देखी. प्रयागराज स्पेशल ट्रेन को प्लेटफॉर्म नंबर 12 से रवाना होना था, लेकिन उसे अचानक प्लेटफॉर्म नंबर 16 पर शिफ्ट कर दिया गया. जब प्लेटफॉर्म 12 पर इंतजार कर रही भीड़ और बाहर खड़ी भीड़ प्लेटफॉर्म 16 तक पहुंचने की कोशिश करने लगी, तो अफरा-तफरी मच गई. लोग एक-दूसरे से टकराने लगे और कई लोग एस्केलेटर व सीढ़ियों पर गिर पड़े.”

उन्होंने आगे बताया, “कई कुली वहां पहुंचे और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की. हमने कम से कम 15 शवों को बाहर निकाला और एंबुलेंस में रखा. पूरे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ जूते और कपड़े बिखरे पड़े थे. हमने पुलिस और दमकल विभाग को बुलाया, जिसके बाद 3-4 एंबुलेंस वहां पहुंचीं और घायलों को अस्पताल ले जाया गया.”

प्लेटफॉर्म चेंज से मची भगदड़
मीणा के मुताबिक, रेलवे प्रशासन ने अचानक ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदल दिया. इससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. लोग एक ही समय में दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर भागने लगे, जिससे भीड़ बेकाबू हो गई. “लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. कई तो नीचे गिर गए और दबकर मर गए,” उन्होंने बताया. इस दर्दनाक हादसे के बाद स्टेशन का मंजर ही पूरी तरह बदल गया. सुगन लाल मीणा ने कहा, “इतने शव देखने के बाद मुझसे खाना तक नहीं खाया गया. मन विचलित हो गया.”

भगदड़ मामले में एक और प्रत्यक्षदर्शी रवि ने बताया कि भगदड़ रात करीब 9:30 बजे मची. प्लेटफॉर्म नंबर 13 पर मौजूद लोगों ने प्लेटफॉर्म 14 और 15 पर ट्रेनें देखीं तो वे इन प्लेटफॉर्मों की ओर बढ़ गए. ट्रेनों के प्लेटफॉर्म नहीं बदले गए, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उसे नियंत्रित नहीं किया जा सका.

क्या बोले प्रत्यक्षदर्शी?
एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस दिल दहला देने वाली घटना को बयान करते हुए कहा है कि भीड़ पूरी तरह से बेकाबू थी. फुटओवर ब्रिज और प्लेटफॉर्म पर हजारों लोग जमा थे. इतनी ज्यादा भीड़ की उम्मीद नहीं थी. त्योहारों के दौरान भी मैंने कभी रेलवे स्टेशन पर इतनी भीड़ नहीं देखी थी. प्रशासन और एनडीआरएफ के लोग वहां मौजूद थे, लेकिन जब भीड़ हद से ज्यादा बढ़ गई तो उसे नियंत्रित कर पाना असंभव हो गया. हजारों यात्री प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के लिए ट्रेन पकड़ने आए थे. प्लेटफॉर्म 14 और 15 पर भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी मच गई. कई लोग फुट ओवरब्रिज से गिर गए, जबकि कुछ ट्रेन के आगे आ गए. रेलवे प्रशासन और सुरक्षा बल हालात संभालने में नाकाम रहे. परिजनों का आरोप है कि रेस्क्यू ऑपरेशन देर से शुरू हुआ, जिससे कई जानें चली गईं.

अजीत नाम के शख्स ने कहा कि दस पांच हजार की भीड़ थी. ट्रेन का अनाउंसमेंट गलत हो गया था. प्लेटफॉर्म बदला गया. इसी के बाद भीड़ इधर उधर जाने लगी, जिसमें 18 की मौतें हुईं. कई लोग घायल हुए और कई बेहोश हो गए. हादसे के बाद कुली भाइयों और यहां मौजूद लोगों ने ही मदद की. अपनी गोद में लोगों को उठाकर ले गए. यहां प्रशासन नाममात्र को था.

 

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