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पटना हाई कोर्ट ने ऐसा कौन सा फैसला दे दिया कि भड़क गया सुप्रीम कोर्ट! पीएमएलए का है यह केस

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक आरोपी की जमानत रद्द कर दी। पटना हाई कोर्ट ने पिछले मई में धन शोधन रोकथाम कानून (PMLA) के आरोपी को जमानत दी थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने बेहद लापरवाही भरा रवैया अपनाते हुए जमानत दी। उसने कहा कि हाई कोर्ट ने पीएमएलए की धारा 45 की कठोरता पर विचार किए बिना, बिल्कुल बाहरी और असंगत बातों के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पटना हाई कोर्ट के 6 मई, 2024 के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अपील पर यह आदेश पारित किया।

सुप्रीम कोर्ट ने वापस हाई कोर्ट भेजा मामला
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में बिहार में अवैध रेत खनन मामले के सह-अभियुक्त कन्हैया प्रसाद को रिहा कर दिया था। मामले को वापस पटना हाई कोर्ट को नए सिरे से विचार करने के लिए भेजते हुए, पीठ ने आदेश दिया कि प्रसाद आज से एक सप्ताह के भीतर पटना की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण करें। शीर्ष अदालत ने प्रसाद की जमानत याचिका को नए सिरे से विचार के लिए हाई कोर्ट को वापस भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वो इस मामले को उस पीठ के अलावा किसी अन्य पीठ के समक्ष रखें जिसने यह विवादित आदेश पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।

बिना ठोस आधार के दे दी जमानत!
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘विवादित आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं है जो यह मानने के उचित आधार दे कि प्रतिवादी अधिनियम के तहत कथित अपराध का दोषी नहीं था और यह कि जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अपराध किए जाने की संभावना नहीं थी।’ पीठ ने कहा, ‘यह अब और विवाद का विषय नहीं है कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध, अपराध की आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि के संबंध में एक स्वतंत्र अपराध है, जो किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित या उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त या अर्जित की गई है।’

पीठ ने आगे कहा, ‘अपराध की आय से जुड़ी ऐसी किसी भी प्रक्रिया या गतिविधि में शामिल होना मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध होगा। इस अपराध का अन्यथा किसी अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है, सिवाय उस अपराध के परिणामस्वरूप प्राप्त या अर्जित अपराध की आय के।’

फैसले में आगे कहा गया, ‘मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल अपराधी की जमानत याचिका पर विचार करते समय अदालतों द्वारा कोई भी लापरवाह या सरसरी दृष्टिकोण और अपराध की गंभीरता पर विचार किए बिना और धारा 45 की कठोरता पर विचार किए बिना उसे संक्षिप्त आदेश पारित करके जमानत देना उचित नहीं ठहराया जा सकता है।’

पीएमएलए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
इस फैसले से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट पीएमएलए जैसे गंभीर मामलों में जमानत देने के मामले में हाई कोर्ट की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह फैसला भविष्य में निचली अदालतों के लिए एक मिसाल का काम करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जमानत देते समय सभी जरूरी पहलुओं पर गौर किया जाए और कानून का सही ढंग से पालन हो। यह आम जनता के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में सख्ती बरतेगी।

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