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आपकी मंदबुद्धि के मकड़जाल पर जवाब मैं क्या दूं? शिक्षा मंत्री और PCC चीफ के बीच जानिए क्यों x पर छिड़ी बहस

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जयपुर

राजस्थान में विधानसभा उपचुनावों के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के बीच सियासी जंग जारी है। अब दोनों नेताओं में सोशल मीडिया वॉर भी शुरू हो गया है। दिलावर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जुबानी जंग छेड़ते हुए डोटासरा से सवाल पूछे और उन्हें जमकर घेरने की कोशिश की। इधर, डोटासरा ने भी मदन दिलावर पर बड़ा हमला करते हुए पलट वार किया। डोटासरा ने दिलावर को मंद बुद्धि तक करार दे दिया। उन्होंने कहा कि मंदबुद्धि के मकड़जाल पर मैं क्यों जवाब दूं? दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग से सियासत के पारे में जमकर हलचल है।

सोशल मीडिया पर दिलावर ने डोटासरा को सवालों से घेरा
शिक्षा मंत्री दिलावर ने डोटासरा को उनके कार्यकाल को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर घेरते हुए सवाल पूछे। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पूछा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में एक भी पदोन्नति क्यों नहीं की? जबकि दिलावर ने पोस्ट में अपने कार्यकाल उपलब्धि भी गिनाई।

दिलावर ने अपने कार्यकाल की बताई उपलब्धि
1. हमने 6300 व्याख्याता की वाइस प्रिंसिपल के पद पर पदोन्नति की।
2. 11155 पदों के डीपीसी के प्रस्ताव आरपीएससी को भेजे हुए हैं. जो माननीय न्यायालय के विचाराधीन वाद के कारण स्थगित है. जल्द ही निस्तारण का प्रयास।
3. तृतीय श्रेणी के 23000 शिक्षक अधिशेष जिनका रिक्त पदों पर समायोजन शीघ्र।
4. 5131 पदों पर भर्ती के लिए भर्ती एजेंसी को भेजी प्रार्थना।
5. 13821 पदों पर नवीन सीधी भर्ती की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव विचाराधीन।
6. रीट केवल अध्यापक भर्ती पात्रता परीक्षा, शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन अलग से होगा। जिसमें लेवल वन के लिए 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।
7. सफाई कर्मियों की भर्ती के मामले में वाल्मीकि समाज के लोग ही भर्ती हो यह सुनिश्चित कर रही सरकार।

डोटासरा का पलटवार, मंदबुद्धि के मकड़जाल का क्यों जवाब दूं?
इधर, शिक्षा मंत्री के सोशल मीडिया पर पूछे गए सवाल पर डोटासरा ने भी उन पर जमकर पलटवार किया। उन्होंने यहां तक दिलावर को मंदबुद्धि करार दे दिया। उन्होंने कहा कि मंदबुद्धि के मकड़ जाल पर में क्यों जवाब दूं। उन्होंने भी सोशल मीडिया पर दिलावर को घेरते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ‘ माननीय मंत्री जी.. पहले काउंसलिंग और पदोन्नति में अंतर समझिए फिर सवाल कीजिए‘।

डोटासरा ने दिलावर को दिया यह जवाब
1. व्याख्याता से उप-प्राचार्य के 10,096 पदों पर पदोन्नति कांग्रेस शासन में हुई थी।
2. उप-प्राचार्य का यथास्थान पदस्थापन भी कांग्रेस शासन में हुआ, लेकिन न्यायालय स्थगन के कारण काउंसलिंग नहीं हो पाई।
3. न्यायालय से स्थगन में छूट के बाद इन्होंने सिर्फ काउंसलिंग की, जिसे मंत्री जी डीपीसी बता रहे हैं।
अन्य सभी बिंदुओं पर आप स्वयं जल्द ‘निस्तारण‘, ‘विचाराधीन‘ और ‘प्रार्थना‘ में अटके, हो तो आपकी मंदबुद्धि के मकड़जाल पर जवाब मैं क्या दूं?

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