बेंगलुरु
बीजेपी से नाराज बताए जा रहे पार्टी के सीनियर लीडर येदियुरप्पा और पीएम मोदी की मुलाकात से कर्नाटक की सियासत एक बार फिर गरमाई है। दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन था। लेकिन इससे इतर पीएम मोदी और कर्नाटक बीजेपी के कद्दावर नेता बीएस येदियुरप्पा के बीच मुलाकात ने कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। हाल ही में राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर पहुंचे थे। लेकिन इस दौरान बीएस येदियुरप्पा नहीं देखे गए थे। जिसके बाद पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक येदियुरप्पा को आमंत्रित नहीं किया गया था। तो वहीं कुछ का कहना था कि वे पार्टी से नाराज भी चल रहे हैं।
पीएम और येदियुरप्पा के बीच प्राइवेट मीटिंग
पीएम मोदी और येदियुरप्पा की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह 15 मिनट की अलग से की गई मीटिंग थी। दरअसल राज्य में मई महीने में चुनाव होने हैं जिसको लेकर माना जा रहा है कि इस दौरान राज्य की राजनीति जरूर कुछ खास चर्चा की गई होगी। दोनों के बीच इस मुलाकात ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है। वहीं इस मुलाकात के बाद खासकर खुद बीजेपी में अंदरखाने चर्चा तेज हो चली है।
3 महीने से कम बचा है चुनाव में समय
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में तीन महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में चुनाव को लेकर आलाकमान ने खासा दिलचस्पी ली है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि येदियुरप्पा ने पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीतियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। इस बैठक ने पार्टी में नई रणनीति स्थापित की है। येदियुरप्पा को बीजेपी केंद्रीय संसदीय समिति का सदस्य बनाने के बाद पार्टी ने उन्हें फिर से नजर अंदाज किया था।
लिंगायत में येदियुरप्पा का खासा प्रभाव
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के राज्य दौरे के दौरान येदियुरप्पा को नहीं देखा गया था। प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद येदियुरप्पा के चुनाव प्रचार में शामिल होने की संभावना है। बीजेपी पहले कर्नाटक राज्य में येदियुरप्पा के नेतृत्व में की सत्ता हासिल की थी। येदियुरप्पा को लिंगायत समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है। जिसमें उनका खासा प्रभुत्व भी है। इस बात का प्रमाण येदियुरप्पा कई मौकों पर दे चुके हैं।
