नई दिल्ली
सीबीआई ने ओडिशा ट्रेन हादसे की जांच शुरू कर दी है। शुरूआती जांच में सिग्नल फेल होने को हादसे की वजह माना गया लेकिन अब बालासोर के ही एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर असहमति जताई है। सिग्नल और कम्यूनिकेशंस (बालासोर) के एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर ‘संयुक्त जांच रिपोर्ट’ तैयार करने वालों में से एक हैं। हालांकि उन्होंने असहमति वाला नोट दिया है। रिपोर्ट में सिग्नल फेल की बात कही गई है लेकिन अधिकारी ने दावा किया है कोरोमंडल एक्सप्रेस को मेन लाइन पर जाने के लिए सिग्रनल ग्रीन था, लूप लाइन के लिए नहीं। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के समय विभागों के बीच में असहमति सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि अंतिम निष्कर्ष के लिए इंतजार करना होगा जब तक कि कमिश्नर (रेल सेफ्टी) की जांच पूरी नहीं हो जाती।
बाहानगा स्टेशन पर हुआ क्या था
शुरुआती जांच करने वाले पैनल में पांच लोग शामिल हैं। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (सिग्नल और कम्यूनिकेशंस) ए. के. महंता का डिपार्टमेंट जांच के घेरे में है। उन्होंने पैनल के चार अन्य सदस्यों की राय से असहमति जताई है, जिसमें कहा गया है कि हादसा इसलिए हुआ क्योंकि कोरोमंडल एक्सप्रेस के ड्राइवर को लूप लाइन पर ट्रेन ले जाने के लिए सिग्नल मिला था, जहां ट्रेन की मालगाड़ी से भिड़ंत हो गई। संयुक्त जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बाहानगा बाजार स्टेशन के अप लूप लाइन (रिवर्स कंडीशन में) पॉइंट नंबर 17ए सेट पाया गया।’ रिवर्स कंडीशन का मतलब होता है कि आने वाली ट्रेन को लूप लाइन में जाने की इजाजत है जबकि नॉर्मल कंडीशन सिग्ननल का मतलब ट्रेन मेन लाइन पर जाएगी। इस केस में, पॉइंट नंबर 17ए पर कोरोमंडल एक्सप्रेस लूप लाइन पर चली गई।
मैं इस जांच रिपोर्ट से सहमत नहीं…
महंता ने कहा, ‘मैं इससे (जांच रिपोर्ट) सहमत नहीं हूं, जिसमें पॉइंट नंबर 17ए को अप लूप लाइन के लिए सेट पाया गया। डेटालॉगर रिपोर्ट से मिले आंकड़ों के आधार पर पॉइंट 17 नॉर्मल साइड के लिए सेट था। डिरेलमेंट के बाद यह रिवर्स हो सकता है।’ महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले वह पैनल के बाकी सदस्यों की राय से सहमत थे कि गड़बड़ सिग्नल के कारण हादसा हुआ।
रेलवे अधिकारियों का साफ तौर पर कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ जानबूझकर की गई छेड़छाड़ के कारण यह हादसा हुआ। खुर्डा (ओडिशा) के डीआरएम रिंकेश रॉय ने कहा, ‘सभी प्री-कंडीशंस पूरी होने के बाद ही आपको ग्रीन सिग्नल मिलता है। अगर थोड़ी भी समस्या होगी तो तकनीकी रूप से ग्रीन सिग्नल हो ही नहीं सकता। यह लाल हो जाएगा।’ ओडिशा हादसे में मरने वालों की संख्या 288 हो गई है।
