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अजित BJP के साथ क्यों गए? NCP सांसद अमोल कोल्हे ने बताई बगावत के पीछे की इनसाइड स्टोरी

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मुंबई

अजित पवार, बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए हैं। कुछ दिन पहले उनके समर्थक विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन क्या यह सब एक ही दिन में हो गया? यह सवाल अभी भी महाराष्ट्र की जनता के मन में है। हालांकि, इस शपथ ग्रहण से पहले ही ऐसी खबरें आ रही थीं कि अजित पवार नाराज हैं। आखिर अजित पवार ने ऐसा फैसला क्यों लिया? उनके विद्रोह के पीछे की अंदरूनी कहानी क्या है? अजित पवार को साथ लेने में बीजेपी की क्या भूमिका है? इन सब मुद्दों पर एनसीपी सांसद अमोल कोल्हे ने टिप्पणी की है। अमोल कोल्हे ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस बारे में एक विस्तृत वीडियो साझा किया है। अमोल कोल्हे के मुताबिक महाराष्ट्र की राजनीति में आए इस बड़े सियासी भूचाल के पीछे की सबसे बड़ी वजह 2024 का लोकसभा चुनाव है। इस चुनाव में बीजेपी को हार का खतरा महसूस हो रहा है। लिहाजा इसके लिए इतिहास पर नजर डालना जरूरी है।

भारत के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो इस देश में जनता ने किसी भी पार्टी को लगातार दो बार से ज्यादा चुनकर संसद में नहीं भेजा है। इस इतिहास को देखकर बीजेपी को खतरे की घंटी का एहसास हो रहा है। अमोल कोल्हे ने कहा, इसलिए उन्होंने अन्य पार्टियों को अपने साथ लेने का फैसला किया है।

मोदी सरकार के प्रति लोगों में सत्ता विरोधी लहर
अमोल कोल्हे ने यह भी कहा कि पिछले दस सालों में मोदी सरकार के प्रति लोगों में सत्ता विरोधी लहर पैदा हुई है। अमोल कोल्हे ने द न्यू बीजेपी किताब का हवाला देते हुए कहा, इस किताब में बीजेपी का मौजूदा राजनीतिक ग्राफ दिखता है। साल 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 303 सीटें जीती थी। जिसमे हिंदी भाषी प्रदेश की सीटें ज्यादा थीं। फिलहाल देश के 14 राज्यों में बीजेपी सरकार सत्ता में नहीं है। इसी वजह से उन्होंने खतरे की घंटी को देखते हुए अन्य पार्टियों को भी अपने साथ लेना शुरू किया है। इस पूरे राजनीतिक ग्राफ को देखने के बाद महाराष्ट्र राज्य अहम हो जाता है। यहां लोकसभा की 48 सीटें हैं। इसमें बीजेपी दावा कर रही है कि वह महाराष्ट्र में 45 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इसलिए उसने महाविकास अघाड़ी तोड़ दी। अमोल कोल्हे ने कहा है कि यह भूचाल पहले शिवसेना और फिर एनसीपी में मचा है। शिंदे सरकार के एक साल पूरे होने पर कुछ सर्वे सामने आए। इसमें महाविकास अघाड़ी का पलड़ा भारी रहा। इसके बाद महाराष्ट्र की सियासत में यह भूकंप पैदा हुआ। कुछ भी करो लेकिन बीजेपी सरकार को देश में वापस लाओ। साम-दाम-दंड-भेद ट्रिपल इंजन सरकार की अंदर की कहानी यही है

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