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दिल्ली विधानसभा सत्र पर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री में क्यों ठनी, जानें पूरी बात

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नई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र को लेकर उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर सरकार पर नियमों के खिलाफ सत्र बुलाने और उसमें कोई ठोस विधायी कामकाज नहीं होने पर नाराजगी जताई है। एलजी ने लिखा है कि इस समय जब दिल्ली की सातवीं विधानसभा का 11वां सत्र बुलाया जाना चाहिए था, उस समय सातवीं विधानसभा का चौथा सत्र बुलाया जा रहा है, जो अपने आप में काफी विसंगति भरा है। देश की संसद समेत राज्यों की विधानसभाओं में आमतौर पर साल में तीन बार सत्र बुलाए जाते हैं, जिन्हें बजट सत्र, मॉनसून सत्र और शीतकालीन सत्र कहा जाता है। ऐसे में यह मेरी समझ से परे है कि फरवरी, 2020 में अस्तित्व में आई दिल्ली की सातवीं विधानसभा अभी तक अपने चौथे सत्र में ही कैसे चल रही है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि चौथे सत्र के तीसरे भाग को फिर से बुलाने के लिए कैबिनेट के निर्णय से संबंधित कोई जानकारी अभी तक उन्हें नहीं मिली है, जबकि इस बारे में कैबिनेट फैसले लेती रही है।

एलजी ने कहा कि कैबिनेट के निर्णय के बिना सत्र बुलाना वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। इस तरह से विधानसभा की बैठक नहीं होनी चाहिए। एलजी ने सदन में होने वाले कामकाज की सूचना उन्हें न दिए जाने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि मुझे कोई संदेह नहीं है कि ऐसे में सदन के सदस्य सार्थक विचार विमर्श के अवसर से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपके संज्ञान में लाने के बावजूद पिछले सत्र को स्थगित करके हर साल विधानसभा के कम से कम तीन सत्र बुलाने की संसदीय प्रथाओं का पालन नहीं किया जा रहा है और वैधानिक प्रक्रियाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। एलजी ने सीएम से अनुरोध किया है कि वह इस मामले पर गौर करें, ताकि विधानसभा के सत्र वैधानिक प्रावधानों के अनुसार आयोजित किए जा सकें।

क्यों है विधानसभा के इस सत्र पर आपत्ति
अब दिल्ली विधानसभा के सत्र पर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार आमने-सामने हैं। उपराज्यपाल की आपत्ति है कि बजट सत्र का सत्रावसान करके नए सिरे से सत्र बुलाया जाना चाहिए था। दरअसल, जब विधानसभा का कोई सत्र पूरा हो जाता है तो उसका सत्रावसान कर दिया जाता है, जिसका अर्थ होता है कि जब भी विधानसभा का सत्र बुलाया जाएगा, उसमें सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी यानी कैबिनेट की मंजूरी के बाद उपराज्यपाल को नए सत्र का प्रस्ताव भेजा जाएगा। यही नहीं, नया सत्र बुलाने के लिए न्यूनतम 14 दिन पहले अधिसूचना जारी करनी होगी, ताकि विधायकों सत्र के दौरान पूछे जाने वाले अपने सवाल भी भेज सकें और अपनी विधानसभा में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर सकें। लेकिन दिल्ली के मामले में बजट सत्र समाप्त होने के बाद सत्रावसान किए बिना ही एक के बाद एक सत्र बुलाए जा रहे हैं। चूंकि ये नया सत्र नहीं माना गया इसलिए सत्र बुलाने की सूचना और सत्र शुरू होने के बीच न्यूनतम अवधि भी नहीं रखी गई।

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