नई दिल्ली,
उत्तर प्रदेश में अतीक अहमद था…बिहार में आनंद मोहन है…ये दो नाम इन दिनों चर्चा में हैं. 15 अप्रैल को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वहीं, गोपालगंज के डीएम जी. कृष्णैया की हत्या में जेल काट रहे आनंद मोहन सरकारी मेहरबानी से जेल से बाहर आ गए हैं. इन दोनों नामों की चर्चा के साथ ही राजनीति में अपराधीकरण का मुद्दा भी फिर चर्चा में आ गया है. सुप्रीम कोर्ट कई बार राजनीति के अपराधीकरण पर सख्त टिप्पणी कर चुका है. बावजूद इसके इस दिशा में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है.
…हर 100 में से 44 विधायक दागी
देशभर में इस समय 30 राज्यों की विधानसभाओं में 4 हजार 33 विधायक हैं. इनमें से 44 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. 28 फीसदी विधायकों पर तो गंभीर मामले हैं. ये जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में है. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 1 हजार 783 विधायक ऐसे हैं जिनपर आपराधिक मामले हैं. इनमें से भी 1 हजार 125 पर गंभीर आपराधिक मामले हैं. गंभीर आपराधिक मामले यानी ऐसे अपराध जिनमें पांच साल या उससे ज्यादा की सजा हो या मर्डर, किडनैपिंग, रेप और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मामले हों.
सबसे ज्यादा दागी विधायक तेलंगाना विधानसभा में हैं. यहां के 119 में से 110 यानी 92% विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. दूसरे नंबर पर केरल है, जहां के 140 में से 96 (69%) विधायक दागी हैं. उसके बाद बिहार के 243 में से 163 (67%), दिल्ली के 70 में से 43 (61%) और महाराष्ट्र के 288 में से 176 (61%) विधायकों पर आपराधिक मामले हैं.
हर 10 में से 4 सांसदों पर क्रिमिनल केस
जिस सदन में कानून बनते हैं और देश की दिशा तय होती है, अपराधी छवि के लोग वहां भी बैठे हैं. एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि दोनों सदनों में 40 फीसदी सांसद ऐसे हैं जिनपर आपराधिक मामले दर्ज हैं.लोकसभा के 543 में से 233 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 159 पर गंभीर मामले हैं. इसी तरह राज्यसभा के 233 में से 71 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं और इनमें से ही 37 पर सीरियस क्रिमिनल केस है.
आंकड़े ये भी बताते हैं कि राजनीति में अपराधीकरण रोकने का दावा करने के बावजूद लोकसभा में दागियों की संख्या बढ़ती जा रही है. 2009 के चुनाव में जहां लोकसभा में 162 दागी सांसद चुनकर आए थे, तो वहीं 2014 में इनकी संख्या बढ़कर 185 हो गई. जबकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में 233 दागियों की जीत हुई.
क्यों कम नहीं होता राजनीति में अपराधीकरण?
राजनीति में अपराधीकरण पर लगाम लगाने के मकसद से फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया था. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी आपराधिक बैकग्राउंड वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाती है तो उसके सभी आपराधिक मामलों की जानकारी पार्टी को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी.
इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों को ये भी बताना होगा कि किन कारणों से आपराधिक बैकग्राउंड वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया है. इसके अलावा यही जानकारी सोशल मीडिया अकाउंट और स्थानीय अखबार में भी देनी होगी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक पार्टियां इसकी जानकारी तो देती हैं, लेकिन कारण ये बताती हैं कि इनसे अच्छा उम्मीदवार कोई नहीं है और इन पर जो भी आपराधिक मामले दर्ज हैं वो राजनीति से प्रेरित हैं. यानी कोर्ट का फैसला लागू होने के बावजूद जमीन पर उसका कोई असर नहीं दिखता.
