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Tuesday, April 7, 2026
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पत्नी से जबरन सेक्स पर सजा के कानून से इतनी खलबली क्यों है? ट्विटर पर जानिए क्या-क्या तर्क

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नई दिल्ली

कोई सामाजिक या पारिवारिक मसला जब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचता है तो देशभर के लोग उसके बारे में जानना चाहते हैं क्योंकि यह उन पर असर डालता है। ऐसा ही एक मामला है जिसे वैवाहिक दुष्कर्म केस, Marital Rape या सरल भाषा में कहें तो पत्नी से जबरन सेक्स का मामला कहा जा रहा है। आज ही सुप्रीम कोर्ट ने मेरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 15 फरवरी तक जवाब देने को कहा है। याचिकाओं पर सुनवाई 21 मार्च से शुरू होने वाली है। उधर, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर डिबेट छिड़ी हुई है। पति से जबरन सेक्स पर सजा के कानून से खलबली मची हुई है। कई लोगों ने #MaritalRape पर चिंता जताई है। लोगों ने सवाल उठाए हैं कि क्या भारत बदल जाएगा? क्या विवाह संस्कृति को नष्ट कर दिया जाएगा?

पहले मेरिटल रेप मामला समझिए
पूरा मामला मेरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने का है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने पहले कहा था कि इस मामले का व्यापक असर होगा। ऐसे में सभी हितधारकों से विचार मांगे गए हैं। IPC की धारा 375 के तहत मेरिटल रेप को अपवाद माना जाता है। इसे ही देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी गई है। मौजूदा कानून कहता है कि विवाहित महिला से पति अगर जबरन संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा, हां पत्नी नाबालिग न हो।

तो क्या लोग महिला से शादी करेंगे?
इन याचिकाओं के विरोध में एक शख्स हरमीत सिंह ने सड़क पर उतरकर प्रोटेस्ट किया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए अपने परिवारों को बचाना होगा। उन्होंने सभी लोगों से वैवाहिक बलात्कार कानून का विरोध करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह कानून पास हो गया तो क्या लोग महिला से शादी करेंगे? उन्होंने चिंता जताते हुए कहा है कि क्या हम #samesexmarriage यानी समलैंगिक विवाह की तरफ बढ़ रहे हैं। हरमीत सिंह ने कहा है कि इससे पतियों की स्थिति खराब हो जाएगी और ब्लैकमेल किए जाने पर वे सुसाइड करने के लिए मजबूर होंगे।

तर्क दोनों तरफ से दिए जा रहे हैं। श्वेता नाम की यूजर लिखती हैं कि ट्विटर पर भारतीय पुरुष नाराजगी जता रहे हैं कि मेरिटल रेप कानून से विवाह रूपी संस्था तबाह हो जाएगी और पुरुषों को महिलाओं की दया पर निर्भर रहना होगा। उन्होंने लिखा कि परिवारों को बचाने की दुहाई दे रहे ये वही लोग हैं जिन्हें सहमति पर भरोसा नहीं है।

कपिल शर्मा नाम के एक व्यक्ति सवाल उठाते हैं कि हमारी अदालतों में पहले से इतने केस पेंडिंग हैं, ऐसे में क्या हमें इस तरह के कानून की जरूरत है? उन्होंने कहा कि कितने झूठे केस पहले से हो रहे हैं और ऐसे में क्या एक और हथियार सौंपना ठीक होगा?

डॉ. एडमंड फर्नांडीज कहते हैं कि आप #MaritalRape को रेगुलेट नहीं कर सकते हैं। वास्तव में इसे व्यवहार में बदलाव, काउंसलिंग और नागरिकों में डिसेंसी के जरिए रेगुलेट करने की आवश्यकता है। बेडरूम रेगुलेशन प्यार, सहमति, सम्मान, प्राइवेसी, दायित्व के मूल तत्व को ही नष्ट कर देगा।

अब तक क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिकाओं में से एक याचिका इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट के विभाजित आदेश के संबंध में दायर की गई है। एक याचिका मेरिटल रेप पर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के संबंध में दायर की गई है। HC ने पिछले साल विभाजित फैसला दिया था। पीठ में शामिल दोनों जजों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुमति दी थी, क्योंकि इसमें कानून से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं। एक याचिका कर्नाटक हाई कोर्ट में एक व्यक्ति ने दायर की थी, जिस पर अपनी पत्नी से कथित दुष्कर्म का मुकदमा चलाया गया था। तब हाई कोर्ट ने पिछले साल कहा था कि अपनी पत्नी के साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोप से पति को छूट देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) के खिलाफ है। इसके अलावा भी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं।

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