भोपाल,
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान दुल्हनों के प्रेगनेंसी टेस्ट कराए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया. कांग्रेस ने इसे गरीबों का अपनमान करार देते हुए जांच की मांग की है. साथ ही विपक्षी पार्टी की ओर से पूछा गया है कि आखिर किस गाइडलाइन के तहत ये टेस्ट कराए गए? उधर, डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि प्रेगनेंसी टेस्ट को लेकर प्रशासन की ओर से कोई निर्देश नहीं दिए गए थे. लेकिन कार्यक्रम के दौरान कुछ दुल्हनों ने स्त्री रोग संबंधी समस्याओं की शिकायत की थी, इसके बाद उनके टेस्ट किए गए थे.
क्या है मामला?
दरअसल, अक्षय तृतीया के मौके पर शनिवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत डिंडोरी जिले के गदासराय में 219 जोड़ों के विवाह होने थे. डिंडोरी कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान एनीमिया की जांच के निर्देश दिए गए थे.
विकास मिश्रा के मुताबिक, मेडिकल जांच के दौरान कुछ दुल्हनों ने मासिक धर्म की समस्या के बारे में शिकायत की. इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टरों ने मासिक धर्म से जुड़ी शिकायतें करने वाली महिलाओं की प्रेगनेंसी जांच का फैसला किया.
उन्होंने बताया, प्रशासन की ओर से प्रेगनेंसी टेस्ट कराने के कोई आदेश नहीं दिए गए थे. मेडिकल टेस्ट के दौरान चार महिलाएं प्रेग्नेंट पाई गईं. इसके बाद उन्हें शादी की इजाजत देने से इंकार कर दिया गया. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य सरकार की ओर से योग्य कपल को 56,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है.
कांग्रेस ने साधा निशाना
उधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि 200 महिलाओं का प्रेगनेंसी टेस्ट कराया गया.
उन्होंने ट्वीट किया, डिंडोरी में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत किए जाने वाले सामूहिक विवाह में 200 से अधिक बेटियों का प्रेगनेंसी टेस्ट कराए जाने का समाचार सामने आया है. मैं मुख्यमंत्री से जानना चाहता हूं कि क्या यह समाचार सत्य है? यदि यह समाचार सत्य है तो मध्यप्रदेश की बेटियों का ऐसा घोर अपमान किसके आदेश पर किया गया? क्या मुख्यमंत्री की निगाह में गरीब और आदिवासी समुदाय की बेटियों की कोई मान मर्यादा नहीं है?
उन्होंने आगे कहा, शिवराज सरकार में मध्य प्रदेश पहले ही महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले में देश में अव्वल है. मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराएं और दोषी व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा दें. यह मामला सिर्फ प्रेगनेंसी टेस्ट का नहीं है, बल्कि समस्त स्त्री जाति के प्रति दुर्भावनापूर्ण दृष्टिकोण का भी है.
