नई दिल्ली,
हांगकांग के सांसदों ने मंगलवार को एक नया नेशनल सिक्योरिटी लॉ पारित किया है जो सरकार को विरोध में उठने वाली आवाजों को कुचलने की और अधिक शक्ति प्रदान करता है. इसे 2019 में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों के कारण बड़े पैमाने पर हुई राजनीतिक कार्रवाई के हालिया कदम के रूप में देखा जा रहा है.
8 मार्च का लाया गया था बिल
सदन में मंगलवार को एक विशेष सत्र के दौरान सेफगार्डिंग नेशनल सिक्योरिटी लॉ पारित हुआ. यह चार साल पहले बीजिंग की ओर से लाए गए एक कानून के समान है जिसने विपक्षी आवाजों का काफी हद तक खामोश कर दिया है.
हांगकांग की विधान परिषद , जो चुनावी बदलाव के बाद बीजिंग के प्रति वफादारों से भरी हुई है, ने इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया. यह बिल 8 मार्च को लाया गया था. हांगकांग के नेता जॉन ली की ओर से कानून को ‘तेजी से’ आगे बढ़ाने की अपील के बाद एक समिति ने एक हफ्ते तक रोज बैठकें कीं.
देशद्रोह के लिए आजीवन कारावास की सजा
नए कानून में कई प्रकार की गतिविधियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है जिसे अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं. इसमें सबसे गंभीर ‘देशद्रोह’ है जिसके लिए आजीवन कारावास की सजा हो सकती है. राष्ट्र विरोधी साहित्य रखने जैसे अपराधों के लिए भी कई वर्षों की जेल हो सकती है. कुछ प्रावधान दुनिया में कहीं भी किए गए कृत्यों के लिए आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति देते हैं.
आलोचकों ने उठाए सवाल
विधान परिषद के अध्यक्ष एंड्रयू लेउंग ने कहा कि उनका मानना है कि सभी सांसद इस ‘ऐतिहासिक मिशन’ में भाग लेने के लिए सम्मानित महसूस कर रहे होंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं चीफ एग्जीक्यूटिव की बात से पूरी तरह सहमत हूं, जितनी जल्दी कानून अस्तित्व में आएगा, उतनी जल्दी देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.’ आलोचकों को चिंता है कि नया कानून नागरिक स्वतंत्रता को और कमजोर कर देगा, जिसे बीजिंग ने 50 वर्षों तक संरक्षित करने का वादा किया था जब 1997 में पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश चीनी शासन में वापस आया था.
