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जोशीमठ का पगनो गांव क्या विलुप्त हो जाएगा? लगातार लैंडस्लाइड ने बढ़ाया खतरा, पहली बारिश से टेंशन में ग्रामवासी

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जोशीमठ

उत्तराखंड के जोशीमठ का एक लगातार परेशानियों से घिरा हुआ है। यहां की जमीन लगातार नीचे खिसक रही है। ऐसे में गांव के अस्तित्व पर भी संकट उत्पन्न होने लगा है। जोशीमठ के पगनो गांव में 135 परिवार खतरे की जद में आ गए हैं। यहां पिछले एक वर्ष से भूस्खलन हो रहा है। गांव के ऊपर हो रहा यह भूस्खलन निरंतर बढ़ता जा रहा है। बीते साल बरसात के मौसम में यह भूस्खलन शुरू हुआ था। इसके एक साल चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। जुलाई 2023 में बरसात शुरू होने के साथ ही यहां भूस्खलन भी शुरू हो गया था और लगभग 40 से अधिक परिवारों के भवन इस भूस्खलन की जद में आए थे।

पगनो गांव के लोग इसके बाद से ही सुरक्षित हिस्से में विस्थापन की मांग कर रहे हैं। साल भर बीत जाने के बाद भी विस्थापन नहीं हो सका है। दरअसल, बीते वर्ष की बरसात थम जाने के बाद प्रशासनिक हीला हवाली के चलते ग्रामीणों का विस्थापन अब तक लटक रहा है और अब फिर से शुरू हुई बरसात ने इस भूस्खलन के जख्म हरे कर दिए हैं। 2 जुलाई को हुई मानसून की पहली बारिश ने पगनो गांव की नींव एक बार फिर हिलाकर ग्रामीणों को सहमा दिया है।

बारिश से घरों में घुसा पानी
2 जुलाई को हुई मॉनसूनी बारिश से ग्रामीणों के पैदल रास्ते बहने के साथ ही घरों में पानी घुस गया। इसके बाद अब ग्रामीणों ने फिर विस्थापन की मांग तेज कर दी है। ग्राम प्रधान रीमा देवी के अनुसार, निरंतर बढ़ते जा रहे भूस्खलन के कारण अब गांव का अधिकांश हिस्सा भूस्खलन की जद में आ गया है। उनका कहना है कि गांव में लगभग 135 परिवार निवास करते हैं, जो सभी इस भूस्खलन से प्रभावित है। अब ग्रामीण गांव में ही अपनी सुरक्षित जमीनों पर विस्थापन चाहते हैं। रीमा देवी का कहना है कि गांव का दूसरा हिस्सा सुरक्षित है और वहां लगभग सभी लोगों की अपनी जमीन हैं। वहां लोगों को विस्थापित किया जा सकता है।

ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों की आजीविका का जिक्र करते हुए कहा कि गांव की आजीविका खेती किसानी और पशुओं पर आधारित है। अगर उन्हें उनके विस्थापन के साथ-साथ पशुपालन के लिए भी उचित टीन शेड इत्यादि की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी तब ही वह विस्थापन के लिए राजी होंगे।

वर्ष भर में 40.5 लाख का नुकसान
साल भर पहले शुरू हुए भूस्खलन के बाद काश्तकार ग्रामीणों को 40.5 लाख का नुकसान हो गया है। पिछले वर्ष शुरू हुए भूस्खलन के बाद से ग्रामीणों की खेती- किसानी चौपट हो गई है। पिछले वर्ष ग्रामीणों ने अपने खेतों में राजमा,आलू, मक्का इत्यादि की फसल बोई थी, पर भूस्खलन की वजह से सब बह गया था। अब जब फसल बोने का समय आया तो फिर गांव में भूस्खलन होने से काश्तकार ग्रामीणों को तगड़ा झटका लगा है।

ग्राम प्रधान रीमा देवी के अनुसार, गांव में लगभग 135 परिवारों की आय का मुख्य साधन खेती है। हरेक परिवार खेती-किसानी कर प्रति वर्ष लगभग 30 हजार रुपये कमा लेता है। पिछले साल से ही खेती-किसानी चौपट हो गई ।है इसलिए किसानों को लगभग 40.5 लाख का नुकसान हो चुका है।

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