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इंडिया गेट पर पहलवानों का ‘शक्ति प्रदर्शन’, 1 महीने से चल रहे खिलाड़ियों के ‘धर्मयुद्ध’ में रेसलिंग की हुई हार?

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नई दिल्ली

तारीख 23 मई 2023, जगह- इंडिया गेट, समय – शाम के कुछ छह बजे। आमतौर पर इस समय इंडिया गेट पर लोगों की भीड़ होती है। कहीं कोई फ्रूट चाट बेच रहा होता है तो कहीं कोई गुलाब। इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक हर रोज एक मेला लगता है जिसमें दिल्ली का दिल बसता है लेकिन मंगलवार को तस्वीर कुछ और ही थी। दिल्ली का दिल छावनी में तब्दील हो गया था। इंडिया गेट के दोनों ओर पुलिस वाले रस्सी पकड़े खड़े थे। सुनसान इंडिया गेट पर जिस तरफ नजर जा रही थी वहां केवल बैरिकेड्स और पुलिस वाले दिखाई दे रहे थे।

छावनी में बदला दिल्ली का दिल
बीते एक महीने से धरने पर बैठे पहलवानों ने इंडिया गेट जाने का फैसला किया था। दिल्ली पुलिस को अंदाजा था कि समर्थकों की भीड़ उमड़ेगी इसलिए खाकी वर्दी वालों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स को भी इंडिया गेट पर तैनात किया गया। कुछ देर बाद इंकलाब जिंदाबाद के नारे सुनाई देने लगे। हाथों में तिरंगे लिए लोगों की भीड़ आंध्रा भवन से धूल भरी आंधी और गर्मी का सामना करते हुए इंडिया गेट पहुंची। इसका नेतृत्व कर रहे थे विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया। किसान दल, स्टूडेंट यूनियन, महिला मोर्चा, भीम आर्मी के अलावा भी हजारों की संख्या में लोगबृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के धरने को समर्थन देने पहुंचे।

कैंडल पकड़कर पहलवानों ने दोहराई अपनी मांगे
बजरंग ने बैरिकेड्स पर खड़े होकर सभी आने वालों को शुक्रिया अदा किया। अपनी मांगे रखी और आजादी के नारे लगाए। विनेश ने इस दौरान कहा, ‘‘पिछले एक महीने से हम विरोध (सरकार द्वारा बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए) कर रहे हैं लेकिन यह शर्म की बात है कि अब तक कुछ भी नहीं हुआ है। आज, हमने इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकाला और हमें पता चला है कि देश के कई हिस्सों में ऐसी मार्च निकाले गए हैं।’’

पहलवानों ने हाथ में कैंडल जलाकर इस लड़ाई में सबका साथ मांगा। लेकिन क्या महज लोगों का समर्थन हासिल करके पहलवान यह जंग जीत पाएंगे। 23 अप्रैल को पहलवान दूसरी बार धरने पर बैठे थी। इस बार उनका पूरा जोर यौन शोषण का शिकार हुई महिला खिलाड़ियों को न्याय दिलाने पर था। वह इस लड़ाई को धर्मयुद्ध बता रहे हैं जिसके लिए वह किसी भी तरह की कुर्बानी देने को तैयार है। वह खेल से ज्यादा इस धरने को अहमियत दे रहे हैं।

अब तक क्या-क्या हुआ?
16 अप्रैल को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने नई कमेटी के लिए चुनाव का ऐलान किया और यह चुनाव 7 मई तक होने थे। ओवरसाइट कमेटी की जांच रिपोर्ट को पब्लिक नहीं किया गया। 23 अप्रैल को पहलवान फिर धरने पर बैठे। उन्होंने ओवरसाइट कमेटी को धोखेबाज बताया और दिल्ली पुलिस पर बृजभूषण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने का आरोप लगाया। 25 अप्रैल को पहलवान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और दिल्ली पुलिस के खिलाफ याचिका दायर की। 28 अप्रैल को बृजभूषण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पहलवानों की मांग के मुताबिक नाबालिग का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुआ। फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन यह कब खत्म होगी।

कितना सफल हुआ है पहलवानों का धरना
बीते एक महीने से पहलवानों ने जंतर-मंतर को अपने धर्मयुद्ध का कुरुक्षेत्र बनाया हुआ है। किसी भी लड़ाई को जीतने के लिए तीन सबसे अहम चीजे होती हैं चरणबद्ध ( कोई भी काम चरण में किया जाए), क्रमबद्ध (सिलेसिलेवार) और योजनाबद्ध (योजना के अनुसार चलने वाला)। उन्होंने धरने की शुरुआत एफआईआर की मांग से की, एफआईआर होने के बाद कहा कि बृजभूषण पर पहले से ही कई मामले दर्ज है ऐसे में एक और एफआईआर का असर नहीं होगा। वह एक के बाद एक अपनी मांगे चरणबद्ध तरीके से सामने रखते गए।

किस ओर जाएगा पहलवानों का धरना
पहलवानों ने बीते एक महीने में कई कार्यक्रम करके क्रमबद्ध रहने की कोशिश की। वह कभी कैंडल मार्च करते नजर आए, कभी गुरुद्वारे पहुंचे तो कभी प्राचीन हनुमान मंदिर। उन्होंने लोगों को खुद से जोड़ने की कोशिश जारी रखी। प्रियंका गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक दिग्गज नेता धरना स्थल पर पहुंचे और पहलवानों का समर्थन किया। पहलवान भीषण गर्मी, जोरदार बारिश और दिल्ली पुलिस के साथ होती रही झड़पें के बीच धरने को हल्का नहीं पड़ने नहीं दिया। बात करें योजना बद्ध होने की तो यहां पहलवान थोड़ा कमजोर नजर आ रहे हैं। वह बृजभूषण की गिरफ्तारी पर अड़े हैं। धरने का खर्च उठाना अब उन्हें भारी पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही उन्हें निचले कोर्ट में जाने को कह चुका है। ऐसे में आने वाले समय में पहलवान और किस ऑप्शन की ओर जाएंगे किस तरह इस लड़ाई को जारी रखेंगे यह देखना अहम होगा।

रेसलिंग की हो रही है हार
फिलहाल जो हालात हैं उसे देखकर यह तो साफ है कि आंदोलन जल्द खत्म नहीं होना वाला है। जांच के बाद कोई भी दोषी साबित हो इसमें हार भारतीय रेसलिंग की हो रही है। देश के टॉप पहलवान जो आने वाले एशियन गेम्स और ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाने की सबसे बड़ी उम्मीद हैं, वह अखाड़े छोड़ फुटपाथ पर दिन बिता रहे हैं, मैट छोड़ सड़क पर अभ्यास कर रहे हैं। जो पहलवान धरने का हिस्सा नहीं भी हैं वे भी फेडरेशन के सुचारू रूप से न चलने के कारण परेशान हैं।

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