Tongue Cancer: अक्सर हम जीभ पर होने वाले छालों या निशानों को साधारण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीभ पर होने वाला हर घाव मामूली नहीं होता? अगर कोई छाला या धब्बा लंबे समय तक ठीक न हो, तो यह जीभ के कैंसर (Tongue Cancer) की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। जीभ का कैंसर एक ऐसी स्थिति है जिसमें जीभ की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, जो धीरे-धीरे पूरे मुंह में फैल सकती हैं। अगर वक्त रहते इसे पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है। आइए जानते हैं स्टेज-1 के लक्षणों और इसके इलाज के बारे में सब कुछ।
स्टेज-1 कैंसर: जब बीमारी होती है शुरुआती दौर में
स्टेज-1 जीभ का कैंसर वह स्थिति है जिसमें ट्यूमर का आकार बहुत छोटा (लगभग 2 सेंटीमीटर से कम) होता है और यह जीभ की गहराई तक नहीं फैला होता। इस स्टेज में कैंसर कोशिकाएं केवल जीभ के एक सीमित हिस्से तक ही रहती हैं और शरीर के अन्य अंगों या लिम्फ नोड्स तक नहीं पहुंचतीं। स्वर विज्ञान और आयुर्वेद की तरह ही चिकित्सा विज्ञान भी मानता है कि अगर इस चरण में बीमारी पकड़ में आ जाए, तो मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना 90% से भी ज्यादा होती है।
अगर 3 हफ्ते से ज्यादा रहे निशान, तो हो जाएं सावधान
जीभ के कैंसर का सबसे शुरुआती और सामान्य लक्षण है जीभ पर सफेद (Leukoplakia) या लाल (Erythroplakia) पैच का दिखाई देना। ये धब्बे जीभ के ऊपर, नीचे या किनारों पर कहीं भी हो सकते हैं। अगर आपकी जीभ पर ऐसा कोई निशान है जिसमें दर्द नहीं हो रहा, लेकिन वह 3 हफ्ते (21 दिन) से ज्यादा समय बीतने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। यह कैंसर की पहली दस्तक हो सकती है, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
खाना निगलते समय महसूस होता है ‘अटका हुआ’ पन
जीभ का कैंसर न केवल बोलने, बल्कि खाने-पीने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में गले का लगातार खराब रहना, आवाज में भारीपन आना और खाना निगलते समय दर्द होना शामिल है। मरीज को अक्सर ऐसा महसूस होता है जैसे उसके गले में कुछ फंसा हुआ है। अगर आपको लंबे समय से डिस्फेगिया (Dysphagia) यानी निगलने में कठिनाई हो रही है, तो यह संकेत है कि ट्यूमर जीभ के पिछले हिस्से (Base of the tongue) को प्रभावित कर रहा है।
जबड़े में सूजन और बोलने में होने लगे दिक्कत
जैसे-जैसे कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं, वे जीभ की नसों को प्रभावित करने लगती हैं। इसके कारण जीभ या मुंह का कोई हिस्सा अक्सर सुन्न (Numbness) महसूस हो सकता है। इसके अलावा, जीभ को हिलाने-डुलाने में परेशानी होने लगती है, जिससे व्यक्ति की आवाज बदल जाती है या वह तुतलाकर बोलने लगता है। जबड़े में सूजन आना या दांतों का अचानक ढीला होना भी ओरल कैंसर के गंभीर लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
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सही समय पर सर्जरी और थैरेपी है इसका ‘रामबाण’ इलाज
अच्छी खबर यह है कि जीभ का कैंसर पूरी तरह क्यूरेबल (Curable) है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर जीभ के किस हिस्से में है। अगर ट्यूमर जीभ के अगले हिस्से में है, तो सर्जरी के जरिए उसे आसानी से निकाला जा सकता है। इसके बाद रेडिएशन थैरेपी और कीमोथैरेपी का उपयोग किया जाता है ताकि बची हुई कैंसर कोशिकाएं खत्म हो सकें। एडवांस स्टेज में इम्यूनोथैरेपी और टार्गेटेड थैरेपी भी दी जाती है। याद रखें, ‘परहेज और सावधानी’ ही इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
