बूस्टर का मॉनसून ऑफर लपक लीजिए, इस बार कोरोना फैला तो जिम्मेदार हम खुद होंगे

नई दिल्ली

हो सकता है अब आप कोरोना संक्रमण की खबरें पढ़ने या जानकारी जुटाने में रुचि न लेते हों। लेकिन जरा पिछले दो साल का वो दौर याद कर लीजिए जब देश में लोग कोरोना के दहशत के चलते घरों में कैद हो गए थे। सरकार के प्रयास और वैज्ञानिकों की अथक मेहनत रंग लाई और जल्द ही भारत में वैक्सीन लगना शुरू हुई। सरकार ने पहली और दूसरी डोज फ्री लगवाई। केस घटने के साथ ही लोगों में डर कम होता गया। धीरे-धीरे चेहरे से मास्क उतरा और लोग बेपरवाह हो गए। डर और महामारी भूल लोग इतने बेफिक्र हो गए कि 400 रुपये से भी कम में लग रही तीसरी यानी बूस्टर डोज में रुचि नहीं रही। अस्पतालों में इक्का-दुक्का लोग ही बूस्टर लगवाने पहुंचते। जबकि हम देख चुके हैं कि संक्रमण फैलने पर कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें लगती थीं, लोगों को अस्पताल में बेड नहीं मिल पाते थे। भारत में 18 साल से अधिक आयु के लोगों के लिए 10 अप्रैल से कोविड-19 की एहतियाती खुराक देने का अभियान शुरू किया था। लेकिन रफ्तार इतनी सुस्त है कि 92 प्रतिशत पात्र लोगों ने अभी बूस्टर डोज नहीं लगवाया है।

कौन होगा जिम्मेदार?
ये आंकड़े अपने आप में यह बताने के लिए काफी हैं कि सरकार ने अभी 75 दिन के लिए फ्री बूस्टर की घोषणा क्यों की। अब तक 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को फ्री में बूस्टर डोज लगाई जा रही थी। हालांकि कई राज्यों ने खुद वयस्कों के लिए फ्री में तीसरी डोज का ऑफर दिया था। एक्सपर्ट का कहना है कि तीसरे डोज के लिए पैसा खर्च करने से बचने के लिए ही लोग बूस्टर नहीं लगवा रहे। अब सरकार ने 75 दिन के विशेष अभियान (मॉनसून ऑफर की तरह) के तहत बूस्टर डोज फ्री में लगाने का ऐलान किया है। अगर अब भी लोग बूस्टर लगवाने में बहाना करते रहे और कोरोना एक बार फिर फैलने लगा तो उसके लिए जिम्मेदार आप, आपके पड़ोसी और हम सभी होंगे जिन्होंने मास्क उतारकर लापरवाही की और बूस्टर डोज भी नहीं लगवाया। जबकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते रहे हैं कि कोविड के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन प्रभावी उपाय है।

बूस्टर के आंकड़े दे रहे टेंशन
देश प्रतिशत आबादी को लगी (12 जुलाई)
इटली 70.3
जर्मनी 69.1
जापान 65.4
ब्रिटेन 65.3
चीन 58.1
अमेरिका 37.4
भारत 3.7

जिम्मेदारी की बातें इसलिए क्योंकि देश में पिछले कई दिनों से 15 हजार से ज्यादा कोरोना केस रोज आ रहे हैं। पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना संक्रमण के 20,139 नए मामले सामने आए। देश में करीब 145 दिन बाद 20 हजार से अधिक दैनिक मामले सामने आए। देश में संक्रमण से 38 और लोगों की मौत हुई है। कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 1,36,076 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.31 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 3,619 की बढ़ोतरी हुई है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.49 प्रतिशत है।

वो दौर याद कर लीजिए
देश में सात अगस्त 2020 को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 25 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार हो गए थे।

गुड न्यूज
सरकार के फ्री बूस्टर डोज की घोषणा के पीछे एक वजह यह भी हो सकती है कि वे सभी लोग भी तीसरी खुराक लगवा लें जो 400 रुपये खर्च करने से बच रहे हैं। सरकार इस बात को समझ रही है कि 400 रुपये बचाना जान को खतरे में डाल सकता है। इसीलिए बुधवार को देश में 18 से 59 साल की उम्र के लोगों को सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर कोविड टीके की ऐहतियाती या तीसरी खुराक मुफ्त लगवाने की घोषणा की गई। 75 दिन के एक विशेष अभियान के तहत ऐसा किया जाएगा जिसकी शुरुआत 15 जुलाई से हो रही है।

लापरवाही का ‘सबूत’!
हैरानी के साथ ही यह लापरवाही की बात है कि 18 से 59 साल की 77 करोड़ पात्र आबादी में से एक प्रतिशत से भी कम लोगों को ऐहतियाती खुराक दी गई है। हालांकि 60 साल से अधिक उम्र के लगभग 16 करोड़ लोग और स्वास्थ्य कर्मियों एवं अग्रिम मोर्चे के कर्मियों में से करीब 26 प्रतिशत लोग बूस्टर खुराक ले चुके हैं। एक अधिकारी ने बताया, ‘भारत की अधिकांश आबादी ने 9 महीने पहले अपनी दूसरी खुराक लगवा ली थी। ICMR और अन्य अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि टीके की दो शुरुआती खुराक लेने के बाद करीब 6 महीने में एंटीबॉडी का स्तर कम होने लगता है और बूस्टर खुराक लेने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसीलिए सरकार 75 दिन के लिए एक विशेष अभियान चलाने की योजना बना रही है जिसमें 18 साल से 59 साल आयुवर्ग के लोगों को 15 जुलाई से सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर ऐहतियाती खुराक मुफ्त दी जाएगी।’

फ्री बूस्टर की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 18 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को कोविड-19 के टीके की निशुल्क एहतियाती खुराक देने से भारत में टीकाकरण अभियान का दायरा बढ़ेगा और स्वस्थ देश का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में टीकाकरण एक प्रभावी उपाय है। मंत्रिमंडल के आज के फैसले से भारत में टीकाकरण का विस्तार होगा और स्वस्थ राष्ट्र बनाने में मदद मिलेगी।’

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