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झारखंड में वेट एंड वॉच मोड में सोरेन-BJP… दावे दोनों ओर से, लेकिन दांव कोई नहीं खेल रहा

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ई दिल्ली ,

झारखंड के सियासत में ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधायकी पर अनिश्चितता बरकार है. सूबे में गहराए इस सियासी संकट के बीच न तो हेमंत सोरेन कुर्सी छोड़ रहे हैं और न ही राज्यपाल एक्शन ले रहे हैं. बीजेपी और महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने स्तर पर सियासी दांव तो खेले जा रहे, लेकिन फ्रंटफुट पर कोई नहीं हैं. बीजेपी डाल-डाल तो हेमंत सोरेन पात-पात चल रहे हैं. ऐसे में दोनों ही एक-दूसरे के सियासी कदम पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं.

बता दें कि चुनाव आयोग ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट केस में हेमंत सोरेन की विधायकी रद्द करने की सिफारिश पिछले हफ्ते ही राजभवन को भेज दी थी, लेकिन आठ दिन से ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद भी सूबे के राज्यपाल रमेश बैस ने कोई एक्शन नहीं लिया. ऐसे में महागठबंधन के नेताओं का आरोप है कि मामले को जानबूझकर रोक रखा है ताकि बीजेपी को विधायकों के खरीद-फरोख्त का टाइम मिल जाए. हालांकि, बीजेपी इन आरोप से इनकार करते हुए कहा था कि सोरेन इस स्थिति के लिए खुद जिम्मेदार हैं.

विधायकों को ‘सुरक्षित’ रखने का दांव
झारखंड में उपजे सियासी संकट के बीच सीएम हेमंत सोरेन ने अपने विधायकों को ‘सुरक्षित’ करने के मकसद से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर भेज रखा है. महागठबंधन के सभी विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर में रिजॉर्ट में ठहरे हैं. रिजॉर्ट के बाहर चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है जबकि झारखंड में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी मिलकर सरकार चला रही हैं.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी विधायकों से रिजॉर्ट में मुलाकात की थी, उन्हें कांग्रेस का क्राइसिस मैनेजमेंट का मास्टर माना जाता है. सोरेन सरकार को इस बात की आशंका और डर है कि ऑपरेशन लोटस के तहत बीजेपी महागठबंधन के विधायकों में सेंध लगा सकती है. इसलिए पिछले पांच दिनों से विधायक रायपुर में ठहरे हैं. वहीं, बीजेपी ने इसे मुद्दा बना दिया कि जनता के पैसे से विधायक रायपुर में ऐश कर रहे हैं.

साइलेंट मोड में क्यों बीजेपी?
झारखंड में बने सियासी अनिश्चितता के माहौल के बीच बीजेपी भले ही सियासी दांव चल रही है, लेकिन वह किसी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है. बीजेपी चाहती है कि हेमंत सोरेन के खिलाफ इतना माहौल बनाया जाए ताकि वो खुद ही कुर्सी छोड़ दें. इससे झारखंड सरकार गिराने के आरोप उस पर लगे. बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास कह चुके हैं कि बीजेपी वेट एंड वॉच की स्थिति में है. चुनाव आयोग के सिफारिश पर राज्यपाल आगे क्या कार्रवाई होती है उसी के अनुरूप बीजेपी रणनीति बनाएगी. झारखंड सरकार को अस्थिर करने की कोई मंशा भाजपा की नहीं है. बीजेपी के झारखंड प्रभारी दिलीप सैकिया राज्य में डेरा जमाए हुए हैं.

सोरेन को लाभ नहीं लेने देना चाहती
बीजेपी किसी भी तरह हेमंत सोरेन को अपदस्थ करने या फिर सरकार गिराकर अपनी सरकार बनाने की भूमिका बताने से बच रही है. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह हा कि किसी भी तरह की सक्रियता हेमंत सोरेन को जनता के सामने बलिदानी साबित करने का मौका नहीं देना चाहती. माना जा रहा है कि पार्टी इससे होने वाले सियासी नुकसान का आकलन कर चुकी है. इसलिए कोई भी नेता इस मामले पर कुछ बोलने से मना कर रहे हैं. बीजेपी सिर्फ यही कह रही है हेमंत सोरेन इस स्थिति के लिए खुद जिम्मेदार हैं. पार्टी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनकी शिकायत की थी और इसपर जो भी कार्रवाई होगी वह स्वीकार किया जाएगा.

सोरेन की प्रेशर पॉलिटिक्स सफल
बीजेपी के आरोपों से घिरे हेमंत सोरेन ने प्रेशर पॉलिटिक्स का दांव चला तो वो सफल रहा. हेमंत सोरेन ने पहले झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात के लिए दो बार समय मांगा था, लेकिन राजभव ने वक्त नहीं दिया था. ऐसे में महागठबंधन की ओर से गुरुवार को माहौल बनाया गया कि हेमंत सोरेन इस्तीफा दे सकते हैं. इस रणनीति के तहत सीएम हेमंत सोरेन और महागठबंधन के विधायकों ने राज्यपाल रमेश बैस से एक बार मुलाकात के लिए समय मांगा. दो बार समय टाल चुके राज्यपाल ने हेमंत सोरेन के इस्तीफे की बात सुनकर तुरंत हामी भर दी और मिलने का समय दे दिया. सोरेन ने महागठबंधन के विधायकों के साथ राज्यपाल से मिले, लेकिन इस्तीफा देने के बजाय चुनाव आयोग के सिफारिश पर फैसला लेने के लिए दबाव बना दिया.

सोरेन क्यों नहीं छोड़ रहे कुर्सी
सियासी सरगर्मी के बीच हेमंत सोरेन खुद से इस्तीफा देने के बजाय राज्यपाल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. महागठबंधन के नेताओं ने गुरुवार को राज्यपाल से जल्द से जल्द स्थिति साफ करने के लिए कहा गया है. राज्यपाल से मुलाकात के बाद झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने साफ तैर पर कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं. राज्यपाल ने दो दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है. कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा ने भी कहा कि राज्यपाल ने स्वीकार किया है कि चुनाव आयोग से पत्र मिला है. कुछ बिंदुओं पर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है, जल्द ही राजभवन इस पर फैसला लेगा.

सोरेन ने चला बड़ा सियासी दांव
हेमंत सोरेन ने इस्तीफा देने के बजाय राज्यपाल के पाले में गेंद डाल दी. सियासी चक्रव्यूह को तोड़ने और राज्यपाल रमेश बैश के आश्वासन के बाद पांच सिंतबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, जहां पर केजरीवाल की तरह सियासी दांव चल सकते हैं. वहीं, कैबिनेट के जरिए भी कई ऐसे फैसले लिए है, जो उन्हें सियासी लाभ दिला सकते हैं. पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की कैबिनेट से स्वीकृति दे दी है. सहायक पुलिस कर्मियों के सेवा अवधि विस्तार की स्वीकृति दी गई है. इसके अलावा सीएम गंभीर बीमारी योजना के तहत चिकित्सा सहायता अनुदान की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है.

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