तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े एमओयू पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि ‘डील साइन हो गई है।
ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी। इस समझौते पर 19 जून को स्विटजरलैंड में जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही इस पर दस्तखत कर दिए गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने फ्रांस के वर्साय शहर में ऐतिहासिक वर्साय महल में और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने तेहरान में इस समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता भारतीय समय के अनुसार आज सुबह पांच बजे से प्रभावी माना गया है।
वर्साय पैलेस में हस्ताक्षर समारोह का आयोजन श्री ट्रम्प के सम्मान में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन द्वारा आयोजित रात्रि-भोज के ठीक पहले किया गया था। दोनों पक्षों ने इसे युद्ध को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम बताया है।
वाशिंगटन में व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक वीडियो में श्री ट्रंप फारसी भाषा के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए दिख रहे हैं। हस्ताक्षर करने के बाद उन्होंने कलम विदेश मंत्री मार्को रुबियो को थमा दी और निर्देश दिया कि इसे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को सौंप दिया जाए ताकि वे भी इस पर हस्ताक्षर कर सकें। वहां मौजूद लोगों ने इस समझौते पर ताली बजाकर श्री ट्रंप का स्वागत किया।
इसके कुछ ही समय बाद तेहरान में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भी इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि श्री पेजेशकियन ने इस समझौते पर डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि हस्ताक्षर करने के साथ ही यह समझौता ‘तुरंत’ लागू हो गया है।
‘इस्लामाबाद समझौते’ के नाम से जाने जाने वाले इस समझौते पर दोनों पक्षों की महीनों की प्रत्यक्ष और परोक्ष बातचीत के बाद हस्ताक्षर किए गये हैं। इसके जरिए शांति बहाली के लिए एक व्यापक खाका तैयार किया गया है।दोनों देश अगले 60 दिनों में इस व्यवस्था को ठोस रूप देने की कोशिश करेंगे।
वर्साय का यह समारोह महीनों के तनाव और संघर्ष के बाद कूटनीति और बातचीत की सफलता का बड़ा अवसर रहा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में सशस्त्र गुटों को ईरान के समर्थन से उत्पन्न विवाद ने 28 फरवरी युद्ध का रूप ले लिया। युद्ध के पहले दिन अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडरों की मृत्यु हो गयी। यह युद्ध तेजी से पूरे क्षेत्र में फैल गया तथा होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग बंद हो गया जो कि दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस के व्यापार का रास्ता है। इस लड़ाई से तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भारी असर पहुंचा है। इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ी है।
अमेरिका-ईरान के बीच 14 पॉइंट का ड्राफ्ट समझौता
- ईरान 30 दिनों में होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करेगा।
- अमेरिका समुद्री नाकाबंदी हटाकर 30 दिनों में सामान्य आवाजाही बहाल करेगा।
- ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का फंड बनाएंगे।
- अमेरिका ईरानी तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित सेवाओं को छूट देगा।
- अमेरिका, ईरान पर संयुक्त राष्ट्र, आईएईए और अपने प्रतिबंध हटाने की दिशा में काम करेगा।
- ईरान की फ्रीज संपत्तियां और धनराशि जारी की जाएगी।
- एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
- सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करेंगे। सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।
- 10 अंतिम समझौते तक ईरान परमाणु कार्यक्रम में बदलाव नहीं करेगा, अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
- समझौते के पालन की निगरानी के लिए विशेष तंत्र बनाया जाएगा।
- आर्थिक राहत और समुद्री यातायात बहाल होने के बाद बाकी बाकी मुद्दों पर बातचीत होगी।
- 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने की कोशिश करेंगे।
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलेगी।
समझौते के बाद होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। अल जजीरा के मुताबिक, इन सुपरटैंकरों में करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था। साथ ही मरीनट्रैफिक के मुताबिक, फ्रांस के झंडे वाला एक एलएनजी टैंकर भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकल गया है। कतर से भी एलएनजी लेकर निकला एक टैंकर अब होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा है। ‘मराइख’ नाम का यह टैंकर इसी महीने कतर में लोडिंग के बाद फरवरी से फारस की खाड़ी में फंसा हुआ था। इस जहाज का अगला पड़ाव पाकिस्तान का पोर्ट कासिम बताया जा रहा है।
इजराइली सेना बोली- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे
इजराइली सेना (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे।
