4.7 C
London
Saturday, March 21, 2026
Homeराष्ट्रीयहिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

हिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

Published on

नई दिल्ली

नौ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में ऐसे ठोस उदाहरण रखे जाएं जिनमें कम आबादी होने के बावजूद हिंदुओं को अल्पसंख्यकों को अधिकार ना दिए गए हों। याचिका में कहा गया था कि बिना राज्य स्तर पर हिंदुओं की संख्या का निर्धारण किए केवल पांच समुदायों को ही अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया जाता है।

धर्मगुरु देवकीनंदन ठाकुर की याचिका पर जस्टिस यूयू ललित, एस रवींद्र भट और सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा, ‘ऐसे ठोस उदाहरण हमारे सामने रखे जाएं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हों लेकिन उनको अधिकार न मिले हों।’ याचिकाकर्ता ने नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी ऐक्ट 1992 और एनसीएम एजुकेशनल ऐक्ट 2004 को चुनौती दी है और कहा है कि अल्पसंख्यों के अधिकार केवल ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन तक सीमित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। कोर्ट ने कहा, अगर किसी को अधिकार देने से मना किया गया हो तभी हम इसपर गौर कर सकते हैं। क्या किसी संस्थान में ऐडमिशन लेने से इनकार किया गया है? आप सीधा कानून को चुनौती दे रहे हैं। जब कोर्ट के सामने कोई ठोस उदाहरण पेश किया जाएगा तो उसके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

देवकीनंदन ठाकुर की तरफ से पेश हुए वकील अरविंद दातार ने कोर्ट जवाब देने के लिए समय मांगा है। उन्होंने कहा, सारी समस्या हिंदुओं के अल्पसंख्यक का दर्जा देने में नजर आती है। मुझे पता है कि कोर्ट को ऐसे उदाहरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1993 की एक अधिसूचना कहती है कि मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक हैं। वहीं कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों को राज्य द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। इसका मतलब ऐसा माना जा रहा है कि हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हो सकते।

बेंच ने दातार से कहा, हम भाषायी और धर्म के स्तर पर अल्पसंख्यक की बात कर रहे हैं। कोई भी शख्स अल्पसंख्यक हो सकता है। जैसे कि मराठा लोग महाराष्ट्र के बाहर अल्पसंख्यक होंगे। इसी तरह वे सारे ही प्रदेशों में भाषायी आधार पर अल्पसंख्यक हैं। दातार ने कहा, इसी तरह का मामला एक दूसरी बेंच के पास भी पेंडिंग है। इस मामले में नोटिस जारी किया गया था और केंद्र ने अपना जवाब भी दे दिया है। टीएमए पाई केस में सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला कहता है कि राज्यों द्वारा अल्पसंख्यकों का निर्धारण होगा लेकिन कानून के तहत किसी आदेश के अभाव में इसे लागू नहीं किया जा सकता।

Latest articles

जयपुर मेट्रो विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक, प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने के निर्देश

जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को जयपुर मेट्रो के विस्तार को लेकर एक...

नवरात्र के पहले दिन रिकॉर्ड 622 रजिस्ट्रियां, सात करोड़ की आय

भोपाल भोपाल में चैत्र नवरात्र के पहले दिन संपत्ति रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड बना है। एक...

भोपाल में नहीं दिखा ईद का चांद, आज धूमधाम से मनाई जाएगी ईद

भोपाल भोपाल में गुरुवार को ईद का चांद नजर नहीं आया, जिसके चलते अब शुक्रवार...

कटारा हिल्स में रजाई-गद्दे की दुकान खाक, दमकल की देरी से भड़का लोगों का गुस्सा

भोपाल भोपाल। राजधानी के कटारा हिल्स स्थित स्प्रिंग वैली क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर कार्यमुक्त, अब एनएमडीसी में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली | सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में एक...

भेल की बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव के लिए टिटागढ़ रेल के साथ बनेगा नया जॉइंट वेंचर

नई दिल्ली | देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी, भारत हैवी...