17 C
London
Tuesday, June 2, 2026
Homeराष्ट्रीयहिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

हिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

Published on

नई दिल्ली

नौ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में ऐसे ठोस उदाहरण रखे जाएं जिनमें कम आबादी होने के बावजूद हिंदुओं को अल्पसंख्यकों को अधिकार ना दिए गए हों। याचिका में कहा गया था कि बिना राज्य स्तर पर हिंदुओं की संख्या का निर्धारण किए केवल पांच समुदायों को ही अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया जाता है।

धर्मगुरु देवकीनंदन ठाकुर की याचिका पर जस्टिस यूयू ललित, एस रवींद्र भट और सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा, ‘ऐसे ठोस उदाहरण हमारे सामने रखे जाएं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हों लेकिन उनको अधिकार न मिले हों।’ याचिकाकर्ता ने नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी ऐक्ट 1992 और एनसीएम एजुकेशनल ऐक्ट 2004 को चुनौती दी है और कहा है कि अल्पसंख्यों के अधिकार केवल ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन तक सीमित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। कोर्ट ने कहा, अगर किसी को अधिकार देने से मना किया गया हो तभी हम इसपर गौर कर सकते हैं। क्या किसी संस्थान में ऐडमिशन लेने से इनकार किया गया है? आप सीधा कानून को चुनौती दे रहे हैं। जब कोर्ट के सामने कोई ठोस उदाहरण पेश किया जाएगा तो उसके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

देवकीनंदन ठाकुर की तरफ से पेश हुए वकील अरविंद दातार ने कोर्ट जवाब देने के लिए समय मांगा है। उन्होंने कहा, सारी समस्या हिंदुओं के अल्पसंख्यक का दर्जा देने में नजर आती है। मुझे पता है कि कोर्ट को ऐसे उदाहरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1993 की एक अधिसूचना कहती है कि मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक हैं। वहीं कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों को राज्य द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। इसका मतलब ऐसा माना जा रहा है कि हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हो सकते।

बेंच ने दातार से कहा, हम भाषायी और धर्म के स्तर पर अल्पसंख्यक की बात कर रहे हैं। कोई भी शख्स अल्पसंख्यक हो सकता है। जैसे कि मराठा लोग महाराष्ट्र के बाहर अल्पसंख्यक होंगे। इसी तरह वे सारे ही प्रदेशों में भाषायी आधार पर अल्पसंख्यक हैं। दातार ने कहा, इसी तरह का मामला एक दूसरी बेंच के पास भी पेंडिंग है। इस मामले में नोटिस जारी किया गया था और केंद्र ने अपना जवाब भी दे दिया है। टीएमए पाई केस में सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला कहता है कि राज्यों द्वारा अल्पसंख्यकों का निर्धारण होगा लेकिन कानून के तहत किसी आदेश के अभाव में इसे लागू नहीं किया जा सकता।

Latest articles

छत्तीसगढ़ में पीएम आवास और पीएम सूर्य घर योजना का अभिनव संगम: सीएम विष्णु देव साय ने कोंडागांव में कराया गृह प्रवेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत कोंडागांव...

राजस्थान आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: एक महीने के विशेष अभियान में ₹3.93 करोड़ की विदेशी शराब जब्त, 5.62 लाख लीटर वॉश नष्ट; 922...

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रदेश में अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली नई गति

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी विजन और सकारात्मक सोच के चलते राजस्थान में...

More like this

कॉमर्शियल LPG सिलेंडर 53.50 रुपए तक महंगा, 5 किलो के फ्री ट्रेड वाले LPG सिलेंडर के दाम ₹11 बढ़े

नई दिल्ली। कॉमर्शियल सिलेंडर 1 जून से 53.50 रुपए तक महंगा हो गया है।...

देश को दहलाने की साजिश नाकाम, दिल्ली पुलिस ने 9 आरोपियों को किया गिरफ्तार, ISI से कनेक्शन निकला

नई दिल्ली। देश के अलग-अलग शहरों को दहलाने की साजिश का खुलासा हुआ है।...

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर हमला… कपड़े फाड़े, पत्थर और अंडे फेंके; हेलमेट पहनकर जान बचाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ है।...