8.2 C
London
Saturday, April 11, 2026
Homeराष्ट्रीयहिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

हिंदुओं को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ठोस सबूत

Published on

नई दिल्ली

नौ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने वाला याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में ऐसे ठोस उदाहरण रखे जाएं जिनमें कम आबादी होने के बावजूद हिंदुओं को अल्पसंख्यकों को अधिकार ना दिए गए हों। याचिका में कहा गया था कि बिना राज्य स्तर पर हिंदुओं की संख्या का निर्धारण किए केवल पांच समुदायों को ही अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया जाता है।

धर्मगुरु देवकीनंदन ठाकुर की याचिका पर जस्टिस यूयू ललित, एस रवींद्र भट और सुधांशु धूलिया की बेंच ने कहा, ‘ऐसे ठोस उदाहरण हमारे सामने रखे जाएं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हों लेकिन उनको अधिकार न मिले हों।’ याचिकाकर्ता ने नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी ऐक्ट 1992 और एनसीएम एजुकेशनल ऐक्ट 2004 को चुनौती दी है और कहा है कि अल्पसंख्यों के अधिकार केवल ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन तक सीमित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। कोर्ट ने कहा, अगर किसी को अधिकार देने से मना किया गया हो तभी हम इसपर गौर कर सकते हैं। क्या किसी संस्थान में ऐडमिशन लेने से इनकार किया गया है? आप सीधा कानून को चुनौती दे रहे हैं। जब कोर्ट के सामने कोई ठोस उदाहरण पेश किया जाएगा तो उसके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

देवकीनंदन ठाकुर की तरफ से पेश हुए वकील अरविंद दातार ने कोर्ट जवाब देने के लिए समय मांगा है। उन्होंने कहा, सारी समस्या हिंदुओं के अल्पसंख्यक का दर्जा देने में नजर आती है। मुझे पता है कि कोर्ट को ऐसे उदाहरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1993 की एक अधिसूचना कहती है कि मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक हैं। वहीं कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों को राज्य द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। इसका मतलब ऐसा माना जा रहा है कि हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हो सकते।

बेंच ने दातार से कहा, हम भाषायी और धर्म के स्तर पर अल्पसंख्यक की बात कर रहे हैं। कोई भी शख्स अल्पसंख्यक हो सकता है। जैसे कि मराठा लोग महाराष्ट्र के बाहर अल्पसंख्यक होंगे। इसी तरह वे सारे ही प्रदेशों में भाषायी आधार पर अल्पसंख्यक हैं। दातार ने कहा, इसी तरह का मामला एक दूसरी बेंच के पास भी पेंडिंग है। इस मामले में नोटिस जारी किया गया था और केंद्र ने अपना जवाब भी दे दिया है। टीएमए पाई केस में सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला कहता है कि राज्यों द्वारा अल्पसंख्यकों का निर्धारण होगा लेकिन कानून के तहत किसी आदेश के अभाव में इसे लागू नहीं किया जा सकता।

Latest articles

BHEL ने दक्षिण कोरिया की E2S कंपनी के साथ किया तकनीकी सहयोग समझौता

भोपाल/नई दिल्ली। Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) ने synchronous machines के लिए excitation system...

Mulethi ke Fayde: औषधीय गुणों से भरपूर है मुलेठी, फायदे जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Mulethi ke Fayde: मुलेठी (Glycyrrhiza glabra) को आयुर्वेद में एक बहुत ही शक्तिशाली औषधीय...

जम्बूरी मैदान में 20 अप्रैल को होगा 51 कन्याओं का सामूहिक विवाह, गृहस्थी के लिए मिलेगी 50 हजार की सामग्री

भोपाल। राजधानी के गोविंदपुरा क्षेत्र के अंतर्गत जम्बूरी मैदान, आनंद नगर में आगामी 20...

सीएम विष्णु देव साय ने किया “बिरहोर जननायक” पुस्तक का विमोचन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय...

More like this

एचपीसीएल में ‘निदेशक विपणन’ के लिए आवेदन आमंत्रित, महारत्न कंपनी में उच्च स्तरीय नेतृत्व का अवसर

मुंबई/भोपाल। ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड...

केरलम में शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन और ड्राइवर को पीटा, एक आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। केरलम के मलप्पुरम जिले के वांडूर इलाके में शुक्रवार शाम कांग्रेस सांसद...

युवा विधायक सम्मेलन में जुटे दिग्गज, ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर हुआ मंथन

भोपाल मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय 'युवा विधायक सम्मेलन' के दूसरे दिन संसदीय गरिमा...