सिंगापुर दौरे को लेकर LG से घमासान, सीएम केजरीवाल ने याद दिलाईं संविधान की अनुसूचियां

नई दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सिंगापुर दौरे को लेकर घमासान मचा हुआ है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उनकी फाइल वापिस लौटा दी है। इसके पीछे उनकी दलील है कि ये कार्यक्रम मेयर स्तर का है, मुख्यमंत्री को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। इसके कुछ ही देर बाद सीएम केजरीवाल ने एलजी को जवाब भेजा। उन्होंने इस जवाब में संविधान की तीन सूचियों को उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर आप संविधान की तीन अनुसूचियों में बंधे रह जाएंगे तो काम नहीं चलेगा। ऐसे में पीएम भी विदेश यात्राएं नहीं कर पाएंगे। हम यहां पर आपको बताते हैं आखिरकार सीएम केजरीवाल ने इशारे ही इशारे में किन तीन सूचियों को उल्लेख किया और इसके मायने क्या हैं।

भारतीय संविधान में उल्लेख
भारतीय संविधान को बहुत ही बारीकि से बनाया गया है। इसमें संघ और राज्य की शक्तियों को बराबर-बराबर वितरण किया गया है। ताकि किसी भी स्थिति में दोनों में टकराव वाली स्थिति न पैदा हो। आज की राजनीतिक दशा को देखें तो बीते दो दशकों से ऐसा देखा जा रहा है कि केंद्र में जिस पार्टी की सरकार है अगर उसी दल की सरकार राज्य में है तो कोई समस्या पैदा नहीं होती मगर इसके उलट अगर किसी दूसरी पार्टी की सरकार है तो केंद्र और राज्य में ठनी रहती है। हालांकि दोनों संविधान की दुहाई देते रहते हैं।

संघ और राज्य की अलग-अलग शक्तियां
संविधान निर्मताओं को इसकी आशंका पहले से ही थी। भारत संघ और राज्यों से बना हुआ देश है। यहां पर जितनी शक्ति संघ की है उतनी ही शक्ति राज्यों के पास भी है। भारतीय संविधान में सात केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसमें से एक है दिल्ली। चूंकि भारत की राजधानी दिल्ली है इसलिए इसको केंद्र शासित बनाया गया है। दिल्ली में अक्सर विवाद होता रहता है। ये विवाद इसलिए होता है क्योंकि दिल्ली की आधी से ज्यादा शक्तियां उपराज्यपाल के हाथों पर निहित होती है। दिल्ली की पुलिस केंद्र सरकार के अंडर में होती हैं। यहां पर अक्सर आपको केंद्र और राज्य के बीच तनाव वाली स्थिति देखने को मिलती है।

केजरीवाल ने दी संविधान की दुहाई
केजरीवाल ने संविधान का दुहाई दी है। उन्होंने तीन सूचियों का जिक्र किया है। वो तीन सूचियां हैं, संघवर्ती सूची, राज्यवर्ती सूची और समवर्ती सूची। इन तीनों सूचियों का निर्माण इसीलिए किया गया ताकि केंद्र और राज्य के बीच किसी भी तरह विवाद की स्थिति पैदा न हो। संविधान लागू होने के समय संघ सूची में 97 विषय थे, अब 98 विषय हैं, राज्य सूची में 66 से 62 तथा समवर्ती सूची में 47 से 52 विषय हो गए हैं। समवर्ती सूची का प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य में नहीं हैं। मूलरूप से 8वीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं। बाद में 8 भाषाएं और जोड़ी गई। भारतीय संविधान को एक संघीय संविधान कहा जाता है, अतः संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्य की शक्तियों को स्पष्ट किया गया है |

संघ सूची
संघ सूची में शामिल किये गए विषयों में राष्ट्रीय महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया है, इनमे जिन विषयों को शामिल किया गया उसमे केवल संसद को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है। इसमें राष्ट्रीय महत्व से सम्बंधित विषय सम्मिलित है जैसे भारत की रक्षा, विदेश कार्य, वायु मार्ग, करेंसी और सिक्का, रेल, बैंक, टेलीफोन, डाक और तार इत्यादि | इसमें 100 विषयों को शामिल किया गया है जैसे : –

विदेशी मामले
रेडियो, टेलिविजन
डाकघर बचत बैंक
शेयर बाजार
बैंकिंग
बीमा
रक्षा
रेलवे
जनगणना
निगम कर

राज्य सूची
राज्य सूची में क्षेत्रीय महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया है। इनमे उन विषयों को शामिल किया गया जो क्षेत्रीय महत्व रखते है। इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल को प्रदान किया गया है। वर्तमान समय में राज्य सूची में 61 विषयों को सम्मिलित किया गया है जैसे कि न्यायालय ,राज्य पुलिस ,जिला अस्पताल, सफाई, पशु, सिंचाई, कृषि, सड़क, वन, रेलवे पुलिस, वन, बांट एवं नाप इत्यादि जैसे :-

पुलिस
लोक व्यवस्था
लोक स्वास्थ्य
स्वच्छता
भूमि सुधार
प्रति व्यक्ति कर
कृषि
गैस
निखात निधि
रेलवे पुलिस
पंचायती राज
कारागार

समवर्ती सूची
समवर्ती सूची में सम्मिलित किये गए विषयों पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों कानून का निर्माण कर सकती है। केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कानून को राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाता है। समवर्ती सूची के अंतर्गत कुल 52 विषयों को सम्मिलित किया गया है जैसे शिक्षा, दीवानी एवं फौजदारी मुकदमे, श्रम कल्याण, कारखाने, समाचार पत्र, वन, आर्थिक एवं सामाजिक नियोजन, प्रदूषण नियंत्रण, परिवार नियोजन इत्यादि जैसे :-

आर्थिक योजना/नियोजन
योजना आयोग
आपराधिक मामले
जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन
शिक्षा
वन
विद्युत
दण्ड प्रक्रिया
विवाह
विवाह-विच्छेद
सामाजिक नियोजन
गोद लेना

दिल्ली और केंद्र में अक्सर होती है समस्या
अब आपको थोड़ा यहां पर ये भी समझना होगा कि आखिरकार सीएम केजरीवाल ने यहां पर इसका जिक्र क्यों किया। वो इसलिए किया गया क्योंकि दिल्ली के एलजी ने सिंगापुर दौरे का अनुरोध ठुकराने का जो कारण दिया है वो ये है कि वो कार्यक्रम मुख्यत: मेयरों का है। यानी की उस कार्यक्रम में मेयर को हिस्सा लेना चाहिए। लेकिन आप तो सीएम है। इसलिए वो आपके दायरे में नहीं आता। केजरीवाल ने इसके जवाब में संविधान की ये सूचियों का जिक्र किया।

क्या कहा था सीएम केजरीवाल ने
मानव जीवन को संविधान की तीन सूचियों में वर्णित विषयों में विभाजित नहीं किया जा सकता… दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सिंगापुर दौरे की फाइल रिजेक्ट होने के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। आज ही दिल्ली के एलजी वीके सक्सेसा ने कई बातों को पॉइंट करते हुए फाइल वापस भेज दी थी। जिसके बाद सीएम केजरीवाल ने का है कि यह बड़े गर्व की बात है कि दिल्ली के शासन मॉडल खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के क्षेत्र में किए गए कार्यों की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है और इसे मान्यता भी मिल रही है।

सिंगापुर में वर्ल्ड सिटीज समिट
एलजी को लिखे अपने पत्र में केजरीवाल ने कहा कि वर्ल्ड सिटीज समिट सिर्फ मेयर का सम्मेलन नहीं है। यह महापौरों, शहर के नेताओं, ज्ञान विशेषज्ञों आदि का सम्मेलन है और सिंगापुर सरकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने के लिए चुना है। केजरीवाल ने कहा है कि सिंगापुर सरकार ने मुझे पूरी दुनिया के शहरी नेताओं के सामने दिल्ली मॉडल पेश करने के लिए आमंत्रित किया है। यह हर देशभक्त भारतीय के लिए बहुत गर्व की बात है। हम सभी को इसे मनाना चाहिए और इस यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए।

पीएम मोदी भी नहीं जा पाएंगे- केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हमारे देश में प्रत्येक संवैधानिक प्राधिकरण का दौरा इस आधार पर तय किया जाता है कि उस प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में कौन से विषय आते हैं, तो यह एक अजीब स्थिति और एक व्यावहारिक गतिरोध पैदा करेगा। सीएम केजरीवाल ने आगे कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो प्रधानमंत्री कहीं नहीं जा सकेंगे क्योंकि वो अपने अधिकांश दौरों पर उन विषयों पर भी चर्चा करते हैं जो राज्य सूची में आते हैं और उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। तब कोई भी मुख्यमंत्री कभी भी कहीं भी यात्रा नहीं कर पाएगा।

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