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जनरल बाजवा ने पाकिस्‍तान को बेचा….पंजाब में जीतकर भी मिली हार से भड़के इमरान समर्थक

Published on

इस्‍लामाबाद

पाकिस्‍तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बेटे हमजा शरीफ के फिर से पंजाब प्रांत का मुख्‍यमंत्री बनने पर इमरान खान समर्थक बुरी तरह से भड़क उठे हैं। इमरान खान समर्थक अब सोशल मीडिया में पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के खिलाफ जोरदार अभियान चला रहे हैं। इसमें कहा जा रहा है कि जनरल बाजवा ने देश को बेच दिया। #BajwaSoldTheNation यह हैशटैग ट्विटर पर टॉप ट्रेंड कर रहा है। देश में कई जगहों पर जनरल बाजवा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुए हैं। दरअसल, जनरल बाजवा के इशारे पर आसिफ अली जरदारी और नवाज शरीफ ने पीएमएल क्‍यू के नेता चौधरी शुजात हुसैन के साथ मिलकर खेल कर दिया और इमरान खान की पार्टी ज्‍यादा वोट पाकर भी हार गई।

पंजाब विधानसभा में जीत के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बेटे हमजा शहबाज को पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सीट बरकरार रखने के लिए चुनाव जीतने के बाद शनिवार को उन्हें पद की शपथ फिर से दिलाई गई। लाहौर में गवर्नर हाउस में आयोजित एक समारोह में पंजाब के राज्यपाल बालीघुर रहमान ने काले रंग की शेरवानी पहनकर शपथ दिलाई। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) के संयुक्त उम्मीदवार परवेज इलाही को मिले 176 वोटों के मुकाबले हमजा को 179 वोट मिले, डिप्टी स्पीकर दोस्त मजारी ने शुक्रवार देर रात घोषणा की।

डिप्टी स्पीकर ने पीएमएल क्‍यू के 10 वोटों को बाहर कर दिया
इलाही को 186 वोट मिले थे, जिसमें पीटीआई से 176 और पीएमएल से 10 वोट शामिल थे, लेकिन डिप्टी स्पीकर ने पीएमएल क्‍यू के 10 वोटों को बाहर कर दिया, जब इसके प्रमुख चौधरी शुजात हुसैन ने अपनी पार्टी के सदस्यों को इलाही को वोट न देने के लिए एक पत्र लिखा। यह दूसरी बार है, जब हमजा ने पंजाब के मुख्यमंत्री के मुकाबले में इलाही को हराया है। चुनाव पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था, जब पीटीआई ने शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि हमजा ने सदन में बहुमत खो दिया है।

इससे पहले 16 अप्रैल को वह 197 मतों के साथ पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए थे, जिसमें पीटीआई के 25 असंतुष्ट भी शामिल थे। पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने 20 मई को पार्टी नेतृत्व के आदेश के खिलाफ चुनाव में एफपीआर हमजा को वोट देने के लिए पीटीआई की प्रांतीय विधानसभा के 25 असंतुष्ट सदस्यों को हटा दिया। बाद में ईसीपी ने पीटीआई को पांच आरक्षित सीटें आवंटित कीं और 17 जुलाई को शेष 20 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की। पीटीआई ने 15 सीटें जीतीं, जबकि पीएमएल-एन को चार सीटें मिलीं और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी चुनाव जीता।

देश के संविधान के खिलाफ है डिप्‍टी स्‍पीकर का फैसला: पीटीआई
पीएमएल सदस्य बशारत राजा ने डिप्टी स्पीकर के वोटों को बाहर करने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह देश के संविधान के खिलाफ है, क्योंकि विधानसभा में केवल एक नेता ही अपने सदस्यों को ऐसे आदेश दे सकता है, जबकि हुसैन सदन में पार्टी के नेता नहीं हैं। पीटीआई और पीएमएल दोनों ने घोषणा की कि वे डिप्टी स्पीकर द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देने के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे।

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