15.6 C
London
Monday, May 4, 2026
Homeराजनीतिदिल्ली: सुलझाने की कोशिश में और गहराया एलजी बनाम सीएम विवाद, जानें...

दिल्ली: सुलझाने की कोशिश में और गहराया एलजी बनाम सीएम विवाद, जानें पूरा मामला

Published on

नई दिल्ली,

2014 के कई साल पहले अटल बिहारी वाजपेई और मदन लाल खुराना ने दिल्ली के लिए फुल स्टेटहुड की मांग की थी. 2014 के लोकसभा चुनाव के मेनिफेस्टो में बीजेपी की तरफ से दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की घोषणा हुई. शीला दीक्षित की कांग्रेस और आप ने भी दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की बात कही लेकिन दिल्ली विशेष राज्य से केंद्र शासित हुई और अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र. जैसे-जैसे दिल्ली बदली वैसे ही एलजी बनाम सीएम विवाद भी गहराता गया.

संविधान में पहले दिल्ली को यूनियन टेरिटरी के रूप में शामिल किया गया. बाद में संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव कर 69वें संविधान संशोधन के तहत नया अनुच्छेद 239 AA जोड़ा गया जिसके तहत दिल्ली को विशेष दर्जा दिया गया और दिल्ली के केंद्र शासित क्षेत्र को दिल्ली का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाने लगा. विधानसभा भी स्थापित हुई, तभी से उप राज्यपाल के साथ ही चुनी हुई सरकार भी शामिल हुई.

क्लॉज 239 AA (4) क्या कहता है?
दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के बीच मतभेद की स्थिति को एलजी राष्ट्रपति को भेजेंगे. संवैधानिक रूप से प्रमुख एलजी और जनता के जरिए चुनी गई दिल्ली सरकार के अधिकार क्या होनी चाहिए यह बड़ा सवाल है? अक्सर ये रार तब हुई जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकार रही.

एलजी को मिली पावर
दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के निर्णय में कहा गया- “वैसे तो 1991 के बाद से ही दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन उपराज्यपाल की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है. ऐसे में किसी भी प्रस्ताव की मंजूरी से पहले उपराज्यपाल का निर्णय जरूरी है. जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया तो जुलाई 2018 का जजमेंट बहुत मायने रखता और हाई कोर्ट के जजमेंट के उलट सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसमें दिल्ली सरकार को विधान बनाने में स्वतंत्रता की छूट दी और साथ में यह भी कहा कि हर मामले में रोक-टोक जरूरी नहीं है. उसके बाद से ही दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लिए बस में फ्री यात्रा, 200 यूनिट बिजली फ्री जैसे निर्णय लिए. The government of National capital territory of Delhi (Amendment) bill, 2021 जिसे GNCT bill 2021 कहते हैं, 15 मार्च 2021 को लोकसभा और 24 मार्च 2021 को राज्य सभा में पास हो गया.

1952 में पहली बार दिल्ली में हुआ था चुनाव
– 1952 में पहली बार दिल्ली में चुनाव हुआ और कांग्रेस के चौधरी ब्रहम प्रकाश दिल्ली के पहले चीफ मिनिस्टर बने.
– 1956 में स्टेट रिऑर्गनाइजेशन एक्ट पास हुआ और दिल्ली राज्य खत्म होकर Union terrority बन गया.
– 1991 में कांग्रेस सरकार ने 69वां कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट पास किया और दिल्ली को स्पेशल स्टेटस मिला जिसके बाद यूनियन टेरिटरी ऑफ दिल्ली बन गया. फिर तय हुआ कि एलजी और विधानसभा साथ-साथ होगी. 1993 में हुए चुनाव में मदन लाल खुराना दिल्ली के चीफ मिनिस्टर बने.

Latest articles

BHEL Results 2026: शुद्ध लाभ में 155% उछाल, शेयर में 10% से ज्यादा तेजी

नई दिल्ली। देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी Bharat Heavy Electricals Limited...

आवागमन होगा सुलभ : राज्य मंत्री गौर

8 करोड़ की सीसी रोड का किया भूमिपूजन भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री...

15 साल बाद सत्ता से ममता की विदाई, बंगाल में बीजेपी की विजय, सीटें 190 पार

कूच बिहार में झड़प-लाठीचार्ज, जमुरिया में आगजनी, ममता के घर के बाहर जय श्रीराम...

नये मध्यप्रदेश का मार्वलस माइलस्टोन साबित होगा इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2360 करोड़ की लागत के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...