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क्या महबूबा वंदे मातरम बोलती हैं? नीतीश ने संघमुक्त भारत नारा दिया था…हिंदुत्व पर उद्धव ने बीजेपी को यूं घेरा

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मुंबई

शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने बीजेपी को आंड़े हाथों लिया है। दरअसल शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक और सांसद संजय राउत को दिए इंटरव्यू में उद्धव ने बीजेपी (BJP) को लेकर करारा हमला बोला है। बीजेपी पर आरोप लगाते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह पार्टी परिस्थितियों के हिसाब से पाला बदलने में माहिर है और हम लोग अपने आदर्शों पर चलने वाले लोग हैं। हम लोगों को हिंदुत्ववादी साबित होने के लिये किसी मिसाल की जरूरत नहीं है। संजय राउत को दिये साक्षात्कार के दौरान उद्धव ठाकरे ने बीजेपी का वो हर पुराना दौर याद दिलाया, जिससे कि वे बीजेपी पर हमलावर हो सकें। खास बातचीत में उद्धव ने बीजेपी के नीतीश कुमार और महबूबा मुफ्ती के रिश्तों को लेकर भी करारा हमला बोला है।

‘क्या महबूबा वंदे मातरम बोलती हैं ?’
संजय राउत को शिवसेना के मुखपत्र सामना में दिए इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीजेपी वंदे मातरम का जिक्र कर उसे भुनाने और गुणगान करने में लगी रहती है। लेकिन मैं बीजेपी से यह पूछना चाहता हूं कि क्या महबूबा मुफ्ती वंंदे मातरम बोलती हैं क्या…। अगर नहीं तो बीजेपी ने कश्मीर में पीडीपी के साथ मिलकर क्यों सरकार बनाई थी। उद्धव ने कहा कि बीजेपी सिर्फ मौकापरस्त राजनीति करती है। पीडीपी के साथ गठबंधन कर बीजेपी ने मौकापरस्ती का उदाहरण पेश किया था।

‘नीतीश ने संघमुक्त भारत नारा दिया था’
उद्धव ठाकरे ने कहा कि एक वक्त था कि हम लोग और बीजेपी एक हुआ करते थे। नीतीश कुमार और बीजेपी के रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए उद्धव ने कहा कि नीतीश कुमार नारा दिया करते थे कि हमें संघमुक्त भारत का निर्माण करना चाहिए। बीजेपी को वह वक्त नहीं याद आता क्या…आज किस मुंह से बीजेपी नीतीश के साथ ही बिहार में सरकार बनाकर बैठी है।दरअसल साल 2016 की बात है जब, नीतीश कुमार ने ‘संघ मुक्त’ भारत की बात कही थी और ‘लोकतंत्र की रक्षा’ के लिए गैर भाजपा दलों के एकजुट होने की अपील की। पटना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा था कि ‘संघ मुक्त’ भारत बनाने के लिए सभी गैर भाजपा दलों को एक साथ आगे आना होगा।

मुख्यमंत्री बनना आपकी गलती थी?
इस सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि दो बातें हैं, मान लो यदि मैंने उस समय उन्हें (एकनाथ शिंदे) मुख्यमंत्री बनाया होता तो उन्होंने आज और कुछ अलग ही किया होता। क्योंकि उनकी भूख मिटती ही नहीं है। मुख्यमंत्री पद भी चाहिए और अब शिवसेना प्रमुख भी बनना है? शिवसेना प्रमुख के साथ तुलना करने लगे हैं? यह राक्षसी महत्वाकांक्षा है। इसे दानवी प्रवृत्ति कहते हैं। मतलब ऐसा है कि जो दिया वो मेरा तो मेरा, और जो तुम्हारा है वह भी मेरा, यहां तक तो था। अब इसका वो भी मेरा और उसका वो भी मेरा। यहां तक उनकी हवस पहुंच गई है। ऐसी लोभी प्रवृत्ति की कोई सीमा नहीं होती।

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