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रेप केस में DNA रिपोर्ट निर्णायक सबूत नहीं, बॉम्बे HC की टिप्पणी

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मुंबई,

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 साल की एक लड़की से रेपकर उसे गर्भवती करने के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है. सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट में डीएनए रिपोर्ट पेश कर दावा किया कि आरोपी लड़की के गर्भ में पल रहे बच्चे का पिता नहीं है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि डीएनए टेस्ट को इस मामले में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता है, लेकिन यह एक पुष्टिकारक सबूत हो सकती है. इसके बाद पीठ ने आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया.

आरोपी के घर के पास में रहती है पीड़िता
न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने कहा, “भले ही डीएनए टेस्ट के मुताबिक आरोपी बच्चे का पिता न हो लेकिन वह पीड़िता को बदनाम नहीं कर सकता है. पीड़िता ने 164 में दिए अपने बयान दोहराया है कि आवेदक ने उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए हैं.”

पुलिस चार्जशीट के अनुसार, आरोपी ने अपने घर में काम करने वाली लड़की की परिस्थितियों का गलत फायदा उठाया है. पुलिस को जांच में पीड़िता की गवाही पर भरोसा न करने की कोई ठोस वजह नहीं मिली.जानकारी के मुताबिक नेरुल थाने में पीड़िता के परिजनों ने केस दर्ज करवाया था, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था. नाबालिग के माता-पिता एक झुग्गी रहते हैं. वे मजदूरी करते हैं. आरोपी वहीं पास की ही एक बिल्डिंग में रहता था.

बच्चों की देखभाल करने के लिए किया था संपर्क
परिजनों ने केस दर्ज करवाते हुए पुलिस को बताया था कि आरोपी और उसकी पत्नी ने फरवरी 2020 में उनसे संपर्क किया था कि वे अपने 6 और 1 साल के दो बच्चों की देखभाल के लिए लड़की को उनके घर भेज दें.उन्होंने बताया कि चार महीने बाद जुलाई में लड़की के पेट में दर्द हुआ. जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि जब आरोपी की पत्नी शहर से बाहर गई थी तब आरोपी ने मौके का फायदा उठाते हुए 10 दिन तक उसका रेप किया.लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उसे आश्वासन दिया था कि वह उसके साथ शादी करेगा. इसके बाद उसने लड़की को 200 रुपये दिए फिर दिन में दो बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए.

आरोपी की पत्नी ने अबॉर्शन कराने की कोशिश की
जानकारी के मुताबिक जब परिवार ने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई तो उनसे आरोपी की पत्नी ने संपर्क किया. उन्होंने अपनी गलती मानी और लड़की का इलाज कराने की बात कही. इसके बाद आरोपी की पत्नी लड़की को उसके माता-पिता की गैरमौजूदगी में अस्पताल ले गई. उसे दो इंजेक्शन और चार गोलियां दिलवाईं लेकिन गर्भपात नहीं हो सका.

न्यायमूर्ति डांगरे ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि डीएनए की पॉजिटिव रिपोर्ट आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत हो सकती है, लेकिन अगर रिपोर्ट निगेटिव है तो सबूत के तौर पर उसे दूसरे दस्तावेज कोर्ट में पेश करने होंगे.

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