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प्रवीण हत्याकांड: क्या खतरे में है कर्नाटक के CM बोम्मई की कुर्सी?

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बेंगलुरू

कर्नाटक में बीते कई दिनों से सियासी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को लेकर तमाम आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनसे राज्य नहीं संभल रहा है। युवा मोर्चा के एक कार्यकर्ता की हत्या के बाद से बोम्मई का विरोध बढ़ गया है। पार्टी में उथल-पुथल जारी है। इसी बीच बीजेपी के मुख्य चुनाव रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को बेंगलुरु का दौरा कर रहे हैं। वह बीजेपी नेताओं के साथ मीटिंग करके अशांत खेमे को शांत करेंगे। इस बीच एक खेमे में चर्चा है कि बोम्मई की कुर्सी जा सकती है।अमित शाह बुधवार को एक होटल में संकल्प से सिद्दी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम के तीसरे संस्करण में उद्योगपतियों के एक वर्ग को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई हिस्सा लेंगे।

बाहरी बनाम मूल बीजेपी का मुद्दा
शाह के दौरे को लेकर देर शाम तक अनिश्चितता बनी रही क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि यह वर्चुअल मीटिंग होगी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्मल कुमार सुराणा ने कहा, ‘हम शाह के यात्रा कार्यक्रम के ब्योरे का इंतजार कर रहे हैं।’ बीजेपी में इन दिनों अशांति मची है। मुद्दा बाहरी बनाम मूल बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष का है। शाह की वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात मिलने और संकट से निपटने के तरीके के बारे में उनका मार्गदर्शन करने की भी उम्मीद है।

आहत भावनाओं को शांत करेंगे अमित शाह?
भाजपा के राज्य महासचिव एन रविकुमार ने कहा कि प्रवीण नेत्तारू की हत्या के बाद, कैडर और वरिष्ठ पदाधिकारियों के एक वर्ग ने अपना इस्तीफा देकर सरकार और पार्टी के खिलाफ अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा, ‘हालांकि कुछ हद तक कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में नाराजगी है, उन्हें शांत किया जा रहा है और जिन लोगों ने इस्तीफा दिया है, उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। शाह की यात्रा से उनकी आहत भावनाओं को शांत करने की उम्मीद है।’

‘कांग्रेस और जेडीएस से आए, ले रहे मजे’
शाह को जिस मुख्य मुद्दे को संबोधित करना है वह पार्टी में अशांति को लेकर है। कई लोगों को लगता है कि उनकी अपनी सरकार उनकी रक्षा करने में विफल रही है। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव सांसद रेणुकाचार्य, ने पहले शिकायत की थी कि कुछ मंत्री, खासकर जो कांग्रेस और जेडीएस से आए हैं, वे विधायकों के फोन भी नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि नवीनतम घटनाक्रम मन में निराशा की अभिव्यक्ति है।

रेणुकाचार्य ने कहा कि कैडर इस बात से नाराज हैं कि जो लोग 2019 में कांग्रेस और जेडीएस से अलग हो गए, वे मंत्री पद से पुरस्कृत होने के बाद अपने काम के प्रति उदासीन रहे हैं और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पार्टी के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘जो लोग सुविधा के लिए पार्टी में शामिल हुए हैं, वे सभी विशेषाधिकारों का आनंद ले रहे हैं जबकि मूल कैडर को कच्चा सौदा दिया जा रहा है। पार्टी के वफादार कब तक इस तरह के अन्याय को सह सकते हैं? अब, बात सिर से ऊपर आ गई है।’

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