4.6 C
London
Friday, March 20, 2026
Homeराष्ट्रीयश‍िवसेना मामले में सोमवार को अगली सुनवाई, श‍िंदे ने कहा- हम अभी...

श‍िवसेना मामले में सोमवार को अगली सुनवाई, श‍िंदे ने कहा- हम अभी भी श‍िवसैनिक

Published on

मुंबई

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की ओर से दायर याचिका पर शिंदे गुट से जवाब मांगा था। आज सुप्रीम कोर्ट की बेंच सबसे पहले इस मामले पर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान एकनाथ श‍िंदे ने कहा क‍ि हमारे ऊपर अयोग्‍यता का आरोप गलत, हम अभी भी श‍िवसैनिक हैं। सुप्रीम कोर्ट में श‍िंदे की दलील यह याचिका महाराष्‍ट्र में मौजूदा राजनीति संकट को लेकर उद्धव ठाकरे गुट ने दायर की है। इन याचिकाओं में उठाए गए कुछ संवैधानिक सवालों को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुआई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट से बुधवार को नए सिरे से जवाब दाखिल करने को कहा था।

बुधवार को कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि शिंदे गुट में जाने वाले विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से तभी बच सकते हैं, अगर वे अलग हुए गुट का किसी अन्य पार्टी में विलय कर देते हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि उनके बचाव का कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

दोनों पक्षों के वकील सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई
शिंदे गुट की तरफ से वकील हरीश साल्वे ने बहस की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि कानून के सवाल दाखिल कर दिए गए हैं।

साल्वे- ने कहा कि अगर स्पीकर को फैसला लेने में एक महीने, दो महीने यह तीन महीने लगते हैं, ऐसे में क्या अयोग्य विधायक काम करना बंद कर देते हैं?

साल्वे- जब तक अयोग्यता पर फैसला नहीं होता तब तक कुछ भी गलत नहीं है। हमने पार्टी नहीं छोड़ी है। हमने कोई अलग दल नहीं बनाया है।

साल्वे – अगर कोई भ्रष्ट आचरण से सदन में चुना जाता है और जबतक वो अयोग्य घोषित नहीं होता। तब तक उसके द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी होती है।

साल्वे- ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता पर स्पीकर फैसला लेने में 2 – 3 महीने की देरी करते हैं। इस स्थिति में क्या होना चाहिए? क्या उन्हें सदन की कार्यवाही में भाग लेना चाहिए? इस दौरान जो कानून पास होता है, उसका क्या होगा?

साल्वे- मान लीजिए अगर कोई पार्टी कोई व्हिप जारी करती है और उस पार्टी का एक सदस्य कहता है कि वो उसका समर्थन नहीं करता और बाद में पार्टी को एहसास होता है कि अगर बात का समर्थन करने के लिए व्हिप जारी किया था। तब पार्टी उस सदस्य के खिलाफ करवाई नही करती जो व्हिप के खिलाफ गया था। नियम ऐसे भी काम करता है।

सीजेआई- सिर्फ दल-बदल विरोधी कानून आकर्षित नहीं होता?

साल्वे- जब तक उनके चुनाव रद्द नहीं हो जाते, तब तक सभी कार्रवाई कानूनी है। दलबदल विरोधी कानून असहमति विरोधी कानून है।

सीजेआई- क्या आप हमें इस पर कोई उदाहरण दे सकते हैं?

सीजेआई- राजनीतिक दल को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह लोकतंत्र के लिए खतरा होगा।

साल्वे- कोर्ट में याचिका दाखिल करने और अयोग्यता के खिलाफ कार्रवाई दो महीने बाद होती है और उस दौरान कोई सदन में वोट दे देता है तो ऐसा नहीं है कि दो महीने बाद वो अयोग्य होता है तो उसका वोट मान्य नहीं होगा। ऐसे में केवल उसे अयोग्य माना जाएगा न कि उसके द्वारा किये गए वोट को।

सीजेआई- जब आप कोर्ट आये थे तब हमनें कहा था की स्पीकर इस मामले का (अयोग्यता) का निपटारा करेंगे न की सुप्रीम कोर्ट और न ही हाई कोर्ट।

सीजेआई- संविधान पीठ के समक्ष जो सवाल आये हैं हमारे पास उन्हें हम देख रहे हैं।

सीजेआई- ने सिब्बल से पूछा कि राजनीतिक पार्टी की मान्यता, यह मामला है। इस में हम दखल कैसे दें? यह चुनाव आयोग में मामला है।

सिब्बल- ने कहा कि मान लीजिये कि इलेक्शन कमीशन इस मामले में एक फैसला देता है और अब अयोग्यता पर फैसला आता है तो फिर क्या होगा?

सिंघवी-ने कहा की पहले अयोग्यता पर फैसला आना चाहिए।

सिब्बल-ने कहा कि 30/40 विधायक किसी भी राजनीतिक पार्टी पर कह सकते है कि वो ही असली पार्टी हैं।

चुनाव आयोग की तरफ से बहस शुरू

चुनाव आयोग- अगर ऐसे मामलों में कोई पक्ष आयोग आता है तो उस समय आयोग का ये फर्ज है कि वो तय करें कि असली पार्टी कौन है?

चुनाव आयोग- हम एक अलग संवैधानिक संस्था है। हमनें दस्तावेज मांगे है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से अलग है।

साल्वे- मान लीजिए कि सभी लोग अयोग्य हो जाते है और चुनाव आता है तो क्या हम यह नहीं कह सकते कि हम असली पार्टी हैं।

सीजेआई- ने चुनाव आयोग को कहा कि इस मामले में कोई फैसला न लें। हलफनामा सभी पक्ष दायर कर सकते हैं। हम इसको लेकर आदेश जारी नहीं कर रहे हैं। इस मामले में कोई करवाई न करें।

सीजेआई- ने कहा 8 अगस्त को चुनाव आयोग में जवाब दाखिल करना है। अगर पार्टी जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगती है। तो चुनाव आयोग उसे समय देने पर विचार करे।

सोमवार को मामले की अगली सुनवाई…
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार का गठन सही है या नहीं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक बेंच को भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट इसपर सोमवार तक कोई आदेश देगा।

शिंदे गुट ने दी यह दलील
इस पर शिंदे गुट का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि दलबदल कानून उन नेताओं के लिए हथियार नहीं है जो पार्टी के सदस्यों को एकजुट रखने में सफल नहीं हुए हैं। उन्‍होंने दलील दी कि यह मामला विधायकों की ओर से स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़े जाने का नहीं है।

‘दलबदल नहीं बगावत’
साल्वे ने आगे कहा कि यह दलबदल नहीं बल्कि यह पार्टी की आंतरिक बगावत का मामला है और किसी ने भी स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेगी और फैसला देने के मुद्दे को तय करेगी। कोर्ट ने साल्वे से कानूनी सवालों का पुन: जवाब तैयार करने को कहा। बेंच गुरुवार को सबसे पहले इस मामले पर सुनवाई करेगी।

पार्टी के बंटवारे, विलय, बगावत और अयोग्यता पर हो रही सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति (CJI) एन वी रमण, जस्‍ट‍िस कृष्ण मुरारी और जस्‍ट‍िस हिमा कोहली की बेंच शिवसेना और बागी विधायकों की ओर से दायर याचिकाओं में पार्टी के बंटवारे, विलय, बगावत और अयोग्यता को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर सुनवाई कर रही थी।

Latest articles

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भक्ति और उत्साह के साथ नव संवत्सर 2083 का आगाज: भेल में स्थापित हुई प्रदेश की सबसे ऊंची 31 फीट की गुड़ी

भोपाल राजधानी में गुरुवार को भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि का पर्व...

गैस संकट से भोपाल के उद्योग बेहाल: उत्पादन 40% तक घटा, सैकड़ों यूनिट बंद होने की कगार पर

भोपाल मप्र के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लिक्विफाइड नेचुरल गैस और कमर्शियल एलपीजी की भारी...

जल पाइपलाइन कार्य में देरी पर बवाल, पार्षद प्रतिनिधि ने सुपरवाइजर के चेहरे पर पोती कालिख

भोपाल भोपाल के बैरसिया में अमृत 2.0 जलप्रदाय योजना के तहत पाइप लाइन बिछाने के...

More like this

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी: राजस्थान में सुदृढ़ होगी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को राजधानी में 207 नवीन बसों को हरी झण्डी...

भेल के निदेशक कृष्ण कुमार ठाकुर कार्यमुक्त, अब एनएमडीसी में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली | सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में एक...

भेल की बोर्ड बैठक में बड़ा फैसला: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के रखरखाव के लिए टिटागढ़ रेल के साथ बनेगा नया जॉइंट वेंचर

नई दिल्ली | देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग और विनिर्माण कंपनी, भारत हैवी...