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Thursday, March 12, 2026
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रामपुर: BJP विधायक ने 25 बार किया फोन, अधिकारी ने ना उठाया और ना ही किया कॉलबैक

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रामपुर ,

यूपी के रामपुर में अनाथ व लावारिस बच्चों के लिए सरकारी खजाने से भले ही शिशु सदन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं और चाइल्ड हेल्प लाइन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन बावजूद इसके मासूम बच्चों के प्रति अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही खुलकर सामने आ गई है. आरोप है कि अधिकारी हफ्तों शिशु सदन आते नहीं, दस-दस दिन की हाजिरी एक ही दिन में उपस्थिति रजिस्टर में लगा देते हैं. इतना ही नहीं शिशु सदन के मासूम बच्चों की देखरेख के लिए तैनात सरकारी कर्मचारी अधिकारियों के घर पर सेवा करने में जुटे रहते हैं. चाइल्ड हेल्प लाइन पर कोई फोन तक अटेंड नही करता.

इन सब बातों का खुलासा हुआ रामपुर में जब नगर की बाहरी सुनसान सड़क पर आश्रम पद्धति विद्यालय के निकट एक वर्ष का मासूम बच्चा लावारिस हालत में मिला. बच्चा बुखार में तप रहा था और कुछ भी बोल नहीं पा रहा था. कोतवाली सिविल लाइन पुलिस को खबर दी गयी तो किसी ने नगर विधायक आकाश सक्सेना को इसकी सूचना दी.

विधायक जी ने तुरंत एक्शन लेते हुए बच्चे का जिला अस्पताल में इलाज कराया. बच्चे को जब स्वास्थ लाभ हो गया तो शिशु सदन में सौंपने की सोची. चाइल्ड हेल्प लाइन पर और जिला प्रोबेशन अधिकारी को नगर विधायक ने और सिविल लाइंस पुलिस ने दर्जनों फोन किये लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, तब जाकर खुद नगर विधायक शिशु सदन पहुंच गए तो वहां का नज़ारा और भी दयनीय था.

अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे. उपस्थिति रजिस्टर देखने से खुलासा हुआ कि अधिकारी महोदय हफ्तों वहां आते नहीं, एक साथ 10-10 दिन की हाजिरी लगा देते हैं. इतना ही नही शिशु सदन पर अनाथ बच्चों की देखभाल पर लगे सरकारी कर्मचारी भी अधिकारी महोदय के आवास पर ड्यूटी बजाते हैं.

इस विषय पर बीजेपी से शहर विधायक आकाश सक्सेना ने कहा कि हमें पता लगा कि लगभग 11:00 बजे सिविल लाइंस पर आश्रम पद्धति स्कूल के पास मुरादाबाद रोड पर एक बच्चा (उम्र एक साल) सड़क पर मिला है. सूचना मिलते ही हम लोग सिविल लाइन थाने गए और वहां जाकर देखा कि बच्चा कुछ बोल नहीं पा रहा है और उसको बुखार है. फिर वहां से उसको हॉस्पिटल लेकर गए और फिर जब अस्पताल में देखा कि बच्चा ठीक है तो शिशु सदन गए, ये देखने के लिए की किस तरीके की वहां व्यवस्था है.

बीजेपी विधायक का आरोप
बकौल आकाश सक्सेना- शिशु सदन की जो इंचार्ज हैं पूरे तरीके से जिम्मेदारी उनकी होती है कि अगर कोई भी बच्चा इस तरह से मिले तो उसे ट्रीट करें. चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी कोई व्यक्ति नहीं था. उसके बाद हमने डीपीओ को फोन करवाया तो वह फोन भी नहीं उठा. लगातार 20 से 25 कॉल हमने और थाना सिविल लाइन ने उनको की लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं मिला.

फिर जब मैंने शिशु सदन पर आकर देखा तो अटेंडेंस रजिस्टर में खामियां मिलीं. कई स्टाफ के लोग डीपीओ के घर पर लगे हुए हैं. उपस्थिति रजिस्टर में एक ही पेन से एक ही दिन में 10 दिन की अटेंडेंस डाली गई है. मैंने हर चीज को लिखकर यहां अधीक्षक को दिया है. मैं अब यह चाहता हूं जो-जो अधिकारी इस मामले में दोषी हैं उस पर प्रशासनिक कार्रवाई हो. उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर जिलाधिकारी रामपुर और मुरादाबाद कमिश्नर से बात करेंगे. हालांकि, मामला उनके संज्ञान में डाल दिया था. क्योंकि, हमारा मिशन है कि अगर एक भी बच्चे को कोई भी दिक्कत है तो उसको दूर किया जाए.

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