12.8 C
London
Wednesday, April 15, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयपाकिस्तान में बाढ़ से महामारी का खतरा, 50 लाख लोग पड़ सकते...

पाकिस्तान में बाढ़ से महामारी का खतरा, 50 लाख लोग पड़ सकते हैं बीमार

Published on

इस्लामाबाद

पाकिस्तान में बाढ़ के बाद अब महामारी का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित इलाकों में आने वाले चार से 12 हफ्तों में बच्चों सहित करीब 50 लाख लोग जल और वेक्टर जनित बीमारियों जैसे टाइफाइड और दस्त से बीमार पड़ सकते हैं। इतना ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी के अनुसार पाकिस्तान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की कम से कम 6,50,000 गर्भवती महिलाओं को देखभाल की सख्त जरूरत है। देश में बाढ़ के चलते 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 3 करोड़ 30 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। वहीं, जो इस प्राकृतिक प्रकोप से बच गए हैं, वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

पाकिस्तान में लोगों को इन बीमारियों का सता रहा डर
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति गंभीर है, सिंध, बलूचिस्तान, दक्षिणी पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों के दस्त, हैजा, आंत या पेट में जलन, टाइफाइड और वेक्टर जनित बीमारियां जैसे डेंगू और मलेरिया की चपेट में आने का खतरा है। उन्होंने कहा कि आकलन है कि इस महामारी से निपटने के लिए शुरुआती तौर पर ही एक अरब रुपये की दवाओं और उपकरणों की जरूरत होगी।

50 लाख लोगों के बीमार पड़ने का खतरा
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और इस्लामाबाद स्थित हेल्थ सर्विसेज अकादमी के कुलपति डॉ.शहजाद अली के हवाले से एक अखबार ने लिखा कि देशभर में मानसूनी बारिश और बाढ़ से करीब 3.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं, अनुमान है कि इनमें से बच्चों सहित करीब 50 लाख लोग जल और वेक्टर जनित बीमारियों की वजह से अगले चार से 12 सप्ताह में बीमार पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में साफ पेयजल उपलब्ध नहीं है और दस्त, हैजा, टाइफइड, आंत व पेट में जलन, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमरियों के होने का खतरा है।

बच्चों पर बीमारियों का हो सकता है ज्यादा असर
डॉ.शहजाद अली ने कहा कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता होने की वजह से बच्चों के इन बीमारियों से ग्रस्त होने का ज्यादा खतरा हैं और एहतियाती उपाय नहीं किए गए तो गंभीर दस्त एवं अन्य जल जनित बीमारियों से सैकड़ों बच्चों की जान जा सकती है। उन्होंने कहा कि तत्काल बाढ़ प्रभावित इलाकों के सभी लोगों को टायफाइड-हैजे का टीका लगाने की जरूरत है। देश में ये टीके उपलब्ध हैं और इससे सिंध और बलूचिस्तान में इन बीमारियों से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।’

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित
पूर्व स्वास्थ्य निदेशक और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ.राणा मुहम्मद सफदर के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाके में रहने वाले बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित हैं और उनपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम की पहुंच उन बच्चों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए जिन्हें टीका नहीं लगा है। डॉ.सफदर ने कहा कि दस्त और अन्य जल जनित बीमारियों के अलावा बच्चों को खसरा होने का भी खतरा है और विस्थापित आबादी में यह जंगल की आग की तरह फैल सकता है। पोलियो एक अन्य खतरा है और दुर्भाग्य से खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के कई शहरों में पोलियो वायरस का संक्रमण देख रहे हैं। यह अन्य शहरों को भी चपेट में ले सकता है।

पाकिस्तान में 6.5 लाख महिलाओं को प्रसव संबंधी इलाज की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) ने यह चेतावनी भी दी कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लिंग आधारित हिंसा (जीबीवी) का खतरा बढ़ गया है। वहीं जून की शुरुआत से बाढ़ से जूझ रहे पाकिस्तान में लगभग दस लाख घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यूएनएफपीए के अनुसार 6,50,000 में से 73, 000 से अधिक महिलाओं का अगले महीने प्रसव होने की उम्मीद है। उन्हें मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल की सख्त जरूरत है। यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर काम करने वाली एजेंसी यूएनएफपीए ने अभूतपूर्व बाढ़ से प्रभावित महिलाओं की दयनीय तस्वीर पेश की है।

अगले महीने 73000 महिलाओं के प्रसव की उम्मीद
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के अनुसार, अगले महीने 73,000 महिलाओं के प्रसव की उम्मीद है, उन्हें कुशल जन्म परिचारक, नवजात देखभाल और मदद की आवश्यकता होगी। यूएनएफपीए ने कहा कि गर्भधारण और प्रसव आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदाओं के खत्म होने का इंतजार नहीं करते। एजेंसी ने कहा कि महिलाएं और बच्चे सबसे संवेदनशील हैं और संकट की इस घड़ी में उन्हें अत्यधिक देखभाल की जरूरत है।

सिंध में हॉस्पिटल तबाह, बलूचिस्तान का भी यही हाल
यूएनएफपीए-पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रतिनिधि बख्तियार कादिरोव ने कहा कि यूएनएफपीए यह सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है कि गर्भवती व प्रसव से गुजर चुकीं महिलाओं को सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी जीवन रक्षक सेवाएं मिलती रहें। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने दुनिया से राहत प्रयासों को जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा कि सिंध में 1,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों को या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से नुकसान हुआ। बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र बलूचिस्तान है, जहां 198 स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों को नुकसान हुआ है।

Latest articles

MP Board 10th12th Result 2026: दसवीं में पन्ना की प्रतिभा व 12वीं में भोपाल की खुशी ने किया टॉप

भोपाल। मध्य प्रदेश बोर्ड 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी हो गया है।...

बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी, JDU से विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ली डिप्टी CM पद की शपथ

पटना। सम्राट चौधरी बिहार 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने ईश्वर के नाम पर...

मान सरकार की सेहत योजना: आरजीएमसी पटियाला में दो दिवसीय स्वास्थ्य कैंप का आयोजन, 500 से अधिक ने बनवाए कार्ड

पटियाला। राजेंद्र जिमखाना एंड महिंद्रा क्लब (आरजीएमसी), पटियाला में 11 और 12 अप्रैल को...

छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 12 की मौत, 30-40 मजदूर झुलसे

परिजनों का हंगामा, 5-5 लाख मुआवजे की घोषणा सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता...

More like this

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता: लेबनान पर तकरार, तेहरान और अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़े!

नई दिल्ली। लगभग छह हफ़्तों तक चले विनाशकारी संघर्ष के बाद अब पूरी दुनिया...

ट्रम्प बोले- ईरान से डील नहीं हुई तो उपराष्ट्रपति दोषी, अमेरिका ने जंग के बीच 3 आर्मी अफसरों को हटाया

तेहरान। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जंग के बीच आर्मी चीफ जनरल...