8.6 C
London
Monday, March 30, 2026
Homeराज्यआखिर चली गई आजम खान की विधायकी, स्पीकर सतीश महाना ने रद्द...

आखिर चली गई आजम खान की विधायकी, स्पीकर सतीश महाना ने रद्द की विधानसभा सदस्यता

Published on

लखनऊ

रामपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक रहे आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने शुक्रवार को आजम खान की विधानसभा की सदस्यता रद्द की है। आजम खान को साल 2019 के हेट स्पीच मामले में गुरुवार को रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया था। उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, आजम खान को तुरंत जमानत भी मिल गई थी। तभी से माना जा रहा था कि आजम खान की विधायकी जा सकती है।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के फैसले के बाद अब इस पर मुहर लग गई है। रामपुर विधानसभा सीट रिक्त कर दी गई है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में जेल में रहते हुए आजम खान ने रामपुर से जीत हासिल की थी। उन्होंने विधायकी को बरकरार रखा था और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसकी जगह पर हुए उपचुनाव में सपा के हाथ से यह सीट निकल गई थी और बीजेपी को जीत मिली थी।

कौन होगा आजम का उत्तराधिकारी?
आजम खान की विधायकी रद्द होने के बाद यूपी के राजनीतिक गलियारे में इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है कि रामपुर सदर सीट से आजम खान का उत्‍तराधिकारी कौन होगा? सिदरा अदीब आजम खान के बड़े बेटे अदीब खान की बीवी हैं, जिनका नाम भी रामपुर से चुनाव लड़ने को लेकर लिया जा रहा है। वह सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहती हैं। इसके अलावा आसिम रजा को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। वह हाल ही में लोकसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी रह चुके हैं। उन्हें आजम का करीबी माना जाता है।

बता दें कि जिस मामले में आजम खान दोषी करार दिए गए हैं, वह साल 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा केस है। रामपुर की मिलक विधानसभा में खान ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां की थीं। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। 27 अक्टूबर को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को दोषी करार दिया है। उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई है।

क्या है नियम?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई है तो ऐसे में उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर लागू होता है। यह फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) निरस्त कर दिया था। यह धारा आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बावजूद सांसदों, विधायकों को संरक्षण प्रदान करती थी।

Latest articles

प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का उत्कर्ष, राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

प्रशिक्षण अभियान सशक्त भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी है: प्रदेश अध्यक्ष श्री खंडेलवाल भोपाल:...

भोपाल में सूखे कचरे से बनेगा कोयला, आदमपुर छावनी में 220 करोड़ का चारकोल प्लांट शुरू

भोपाल राजधानी में अब सूखे कचरे से कोयला तैयार किया जाएगा। इसके लिए आदमपुर छावनी...

भंडारा खाकर लौट रहे युवक को बस ने कुचला, मौके पर मौत

भोपाल राजधानी के एमपी नगर इलाके में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। गायत्री...

एम्स भोपाल में जल्द शुरू होगी लंग ट्रांसप्लांट सुविधा, मरीजों को दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा

भोपाल एम्स भोपाल में जल्द ही फेफड़ा प्रत्यारोपण (लंग ट्रांसप्लांट) की सुविधा शुरू होने जा...

More like this

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 जारी, निवेश और रोजगार को मिलेगी नई दिशा

जयपुर। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘‘राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026’’ जारी कर तकनीकी...

बीएचईएल हरिद्वार नाम किया रोशन,‘शौर्य’ गुणता चक्र को राष्ट्रीय स्तर पर मिला प्रथम स्थान

हरिद्वारभारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) हरिद्वार की हीप इकाई के अंतर्गत न्यू ब्लेड शॉप...

हर घर जल’ की दिशा में राजस्थान का ऐतिहासिक कदम, JJM 2.0 में एमओयू करने वाला देश का पहला राज्य बना

जयपुर । प्रदेश ने ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को नई गति देते हुए एक...