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जीव को प्रभुता मिलने पर अहंकार हो ही जाता है- संत मुरलीधर महाराज

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– जंबूरी मैदान में श्री राम कथा महोत्सव का समापन

भोपाल

भगवान राम स्वयं के प्रति किये अपराध को तो क्षमा कर सकते हैं लेकिन अपने भक्तों के प्रति किये गये अपराध के लिए कभी क्षमा नहीं करते ऐसे व्यक्ति को भगवान राम के रोष का भाजन बनना ही पड़ता है । जंबूरी मैदान में आयोजित राम कथा महोत्सव के समापन अवसर पर संत मुरलीधर महाराज ने राम भरत मिलन की चर्चा करते हुए कहा कि जब राम राज्याभिषेक के समय देवताओं के अनुरोध पर ब्रह्मा जी ने मंथरा के द्वारा तो विघ्न करा दिया लेकिन देवताओं द्वारा भरत जी के राम से मिलने पर भी विघ्न डालने पर ब्रह्मा जी ने कहा कि राम कभी अपने भक्तों के प्रति किए गए अपराध के लिए क्षमा नहीं करते यद्यपि राम समदर्शी हैं फिर भी कभी अपने भक्तों के प्रति किए गए अपराध के लिए क्षमा नहीं करते वह हमेशा अपने राम भक्तों का पक्ष करते हैं ।

उन्होंन कहा कि लक्ष्मण जी को लगा कि हो सकता है भरत किसी विरोध की भावना से आ रहे हो क्योंकि विषयी जीव की यह करनी है कि अगर उसको प्रभुता मिले तो अहंकार हो ही जाता है लेकिन राम जी ने कहा कि भरत जी जैसा व्यवहार चरित्र जैसा इस अखिल ब्रह्मांड में ना तो कोई है और ना कोई होगा । उन्होंने बताया कि सभी समाज जनों के द्वारा भगवान राम को अयोध्या वापस चलने का आग्रह किया गया तब श्री राम ने कहा कि शासन की नीति का निर्धारण सिर्फ लोकमत से नहीं हो सकता यह तो लोकमत, साधुवाद ,राज मत और जो वेद मत कहे उन्हें उसी के अनुसार होना चाहिए समाज में सुख शांति व समृद्धि की पवित्र भावना से झीलों की नगरी भोपाल के जंबूरी मैदान में सकल समाज वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति की और से आयोजित 9 दिवसीय श्री राम कथा का मंगलवार को समापन हुआ।

पूज्य महाराज श्री ने रामचरितमानस के सुंदरकांड, लंका कांड व उत्तरकांड में वर्णित विभिन्न प्रसंगों को गागर में सागर भरते हुए सुनाएं। कथा व्यास ने श्री राम का राज्याभिषेक व रामराज्य का सुंदर वर्णन किया। मानस मर्मज्ञ ने कथा प्रसंग के माध्यम से कहा कि जो आयोजक निष्काम भाव से कथा का अयोजन करवाता है तथा वक्ता भी निष्काम भाव से कथा को गाता है तो वह कथा श्रोता व वक्ता के हर कष्ट से दूर करने वाली और जीवन में सुख समृद्धि तथा शान्ति को लाने वाली है।

साधु व संत की परिभाषा देते हुए महाराज जी ने कहा कि जिसकी साधना पूर्ण हो गई है वह संत है तथा जो निरंतर साधना कर रहा है वह साधु है। दुनिया में हनुमान जी से श्रेष्ठ कोई संत नहीं है तथा भगवान शंकर से बड़ा कोई साधू नहीं है। सांसारिक मोह माया से भगवान की ओर मुडऩा है तो व्यक्ति को किसी साधू या संन्यासी की शरण में जाना चाहिए। कथा वाचक द्वारा मिल जाओ राम तरस रही अखियां, रघुवर लौट चलो, हरी मेरे अवगुण चित ना धरो , रामा रामा रटते रटते जैसे भजनों को सुनकर भक्तजनों के नेत्र सजल हो गए।

पूर्ण आरती व समापन समारोह में हजारों श्रोता अत्यंत भावुक नजर आए। कथा स्थल पर आयोजित भंडारे में हजारों की संख्या में भक्तजनों ने प्रसादी ग्रहण की सकल समाज वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति एवं श्रीराम कथा आयोजन समिति के प्रवक्ता बलवंत सिंह रघुवंशी एवं उपाध्यक्ष हरीश बाथवी ने बताया कि महाराज जी ने समिति अध्यक्ष श्री रमेश रघुवंशी एवं सभी सदस्यों के अनुरोध पर बल्कि उनके प्रेम के बसीभूत अगले वर्ष की कथा के लिए स्वीकृति दी गई है जो 6 दिसंबर से 14 दिसंबर तक आयोजित होगी।

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