‘भारत में आने वाला वक्त मुश्किल’, IIT प्रोफेसर ने कोरोना की चौथी लहर को लेकर जताया ये अंदेशा

नई दिल्ली,

दुनियाभर में कोरोना एक बार फिर से कहर बरपा रहा है. चीन में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामले से हालात बेकाबू हैं. इसके अलावा अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया में भी कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है.कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामले को देखते हुए लोग इस बात से चिंतित हैं कि क्या भविष्य में भारत में भी कोरोना की चौथी लहर आएगी? चीन में कहर बरपा रहे ओमिक्रॉन का BF.7 वैरिएंट के केस भारत में मिलने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का भी कहना है कि भारत में जनवरी महीने में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं और अगले 40-45 दिन काफी अहम होंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब-जब चीन में कोरोना की लहर आई है, उसके करीब 40 दिन बाद भारत में भी कोविड केसों में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

‘आईआईटी कोरोना मॉडल’ देने वाले प्रोफेसर मणिंद्र अग्रवाल ने भारत में कोरोना की नई लहर के सवाल पर बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिन कठिन हो सकते हैं. लेकिन भारत में पैनिक होने का कोई कारण मुझे नजर नहीं आ रहा है. ‘आईआईटी कोविड सूत्र’ बनाने में प्रोफेसर अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई थी.उन्होंने ये भी कहा है कि चीन में जब तक 90 फीसदी आबादी कोरोना पॉजिटिव नहीं हो जाएगी तब तक चीन में कोरोना के केस बढ़ते रहेंगे.

प्रोफेसर ने बताए चीन में कोरोना केस बढ़ने के कारण
आईआईटी कानपुर में सीनियर प्रोफेसर मणिंद्र अग्रवाल ने कहा कि अक्टूबर महीने के अंत तक चीन की कुल आबादी की 5 फीसदी लोगों में भी नेचुरल इम्यूनिटी नहीं बनी थी. जबकि नवंबर अंत तक भी ये आंकड़ा 20 फीसदी के नीचे रहा जिसके कारण कोरोना का यह वैरिएंट चीन में बहुत तेजी से फैल रहा है. उन्होंने कहा कि अभी भी चीन की 60 फीसदी लोगों में इम्यूनिटी नहीं बन पाई है.

उन्होंने यह भी कहा कि ज्यों ही चीन की ज्यादातर आबादी में कोविड के खिलाफ नेचुरल इम्यूनिटी आ जाएगी, वहां हालात सुधरने लगेंगे. उन्होंने कहा कि भारत और अन्य देशों में ओमिक्रॉन लहर का विस्तार से विश्लेषण करें तो इससे यही पता चलता है कि नेचुरल इम्यूनिटी कोविड-19 से बचाव का सबसे कारगर हथियार है.

चीन में सबसे बुरा दौर
प्रोफेसर अग्रवाल के अनुसार, सरकार की जीरो कोविड पॉलिसी के कारण चीन के लोगों में नेचुरल इम्यूनिटी नहीं बन पाई. उन्होंने कहा कि चीन के लिए यह सबसे बुरा समय है क्योंकि चीन की एक बड़ी आबादी के पास नेचुरल इम्यूनिटी नहीं है और सरकार कोविड प्रतिबंध में ढील दे रही है. अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आने वाला कुछ दिन कठिन लग रहा है क्योंकि कोरोन चीन में बचे हुए लोगों को भी अपनी चपेट में लेगा. उन्होंने कहा कि जब तक चीन की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी कोरोना के चपेट में नहीं आ जाएगी चीन में कोरोना के केस बढ़ते रहेंगे.

भारत में पैनिक होने की जरूरत नहीं
भारत में कोरोना की चौथी लहर पर पूछे गए सवाल पर प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि भारत की कुल आबादी की 98 फीसदी से भी ज्यादा लोगों के पास नेचुरल इम्यूनिटी बन चुकी है. इसलिए भारतीयों को ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व चीफ साइंटिस्ट ने क्या कहा
विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि कोरोना की भविष्यवाणाणी करना कठिन है. यह धीरे-धीरे स्थानिक संक्रमण की तरह हो जाएगा. लेकिन टीकाकरण इससे बचने का एक प्रमुख और कारगार उपाय है. जब तक मिक्सड वैक्सीन नहीं है तीसरे डोज को बचाव के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि वैक्सीन की तीसरा डोज लोगों के अंदर पर्याप्त मात्रा में इम्यूनिटी बूस्ट करता है.

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