2024 में कांग्रेस सिर्फ 200 सीट पर लड़े, नामुमकिन… जयराम रमेश ने विपक्षी एकता की निकाल दी हवा

‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी इन दिनों सुर्खियों में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने 2024 के चुनाव में राहुल गांधी के विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद चेहरा होने की पैरवी की है। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव और कुछ अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाई है जिससे विपक्षी एकजुटता की संभावना पर प्रश्नचिह्न लगा है। इसी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश से पांच सवाल और उनके जवाब

‘भारत जोड़ो यात्रा’ के असर का आकलन आप कैसे करेंगे?
इस यात्रा से कुल मिलाकर कांग्रेस संगठन में नयी जान आई है। हम जिन राज्यों से गुजरे हैं, जहां से नहीं भी गुजरे हैं वहां भी एक नयी उमंग और नया जोश देखने को मिल रहा है और यह महसूस भी हो रहा है। कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां ‘भारत जोड़ो यात्रा’ अलग से निकाली गई है…मुख्य असर यह है कि कांग्रेस को संजीवनी मिली है।

यह यात्रा राहुल गांधी की छवि को बदलने में कितनी कारगर रही है?
राहुल जी की छवि में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। जिस तरह से उनकी छवि भाजपा के सोशल मीडिया के लोगों द्वारा बिगाड़ी गई थी, वो बात अब इतिहास हो गई है। आलोचना किसी की भी हो सकती है, लेकिन अब वे लोग व्यक्तिगत तौर पर राहुल जी के बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं। राहुल गांधी जी जिस तरह से रोज 23-24 किलोमीटर चल रहे हैं, हजारों-लाखों लोगों से मिल रहे हैं, उन्हें सुन रहे हैं, यह उनके (राहुल) लिए भी उपलब्धि है और पार्टी के लिए भी उपलब्धि है।

इस यात्रा से विपक्ष के बड़े नेता दूर रहे, इसे आप कैसे देखते हैं?
मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यात्रा का मकसद कभी भी विपक्षी एकता नहीं था। यह (विपक्षी एकता) यात्रा का नतीजा हो सकती है। हमने यह नहीं सोचा कि विपक्ष में एकजुटता लाने के लिए ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकालें। हमने कहा कि हमें संगठन को मजबूत करना है, कांग्रेस पार्टी में एक नयी जान फूंकनी है, इसके लिए यात्रा निकालनी है। कई राजनीतिक दलों को निमत्रंण दिया, कुछ आए, कुछ नहीं आए। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से जो परिवर्तन पार्टी में आया है, जो परिवर्तन राहुल जी की छवि में आया है, जो नयी जान संगठन में आई है, उसका एक नतीजा विपक्षी एकता हो सकता है। हम रचनात्मक विपक्षी एकता चाहते हैं।

क्या अब कांग्रेस उस स्थिति में पहुंच रही है कि वह विपक्ष की धुरी बन सके?
मैं इस बारे में नहीं सोचता। मैं तो फिलहाल सिर्फ ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बारे में सोचता हूं। मैं मानता हूं कि अगर कांग्रेस अपने आप को मजबूत नहीं कर सकती तो विपक्षी एकता एक ख्वाब रहेगी। विपक्षी एकता का यह मतलब नहीं है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ 200 सीट (लोकसभा की) पर लड़े। यह नामुमकिन है। यह कभी नहीं हो सकता कि विपक्ष की एकता के नाम पर कांग्रेस सिर्फ 200 सीट पर चुनाव लड़े।

फिर क्या विपक्षी एकता संभव नजर आती है?
विपक्षी दलों को भी समझना चाहिए कि भाजपा का एकमात्र राष्ट्रीय विकल्प कांग्रेस है। विचारधारा के आधार पर एक ही विकल्प है। विपक्षी दल हमेशा कांग्रेस से लेते रहे हैं। विपक्षी एकता का मतलब कुछ लेना और कुछ देना है। कांग्रेस अब तक सिर्फ देती रही है, वो जमाना गया।

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