इमरान खान की चेतावनी, खजाना खाली… क्‍या नए साल में सच में डिफॉल्‍ट हो जाएगा कंगाल पाकिस्‍तान

इस्‍लामाबाद

पाकिस्‍तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि अगर जल्‍द ही देश को अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF) की तरफ से लोन नहीं मिला तो फिर वह डिफॉल्‍ट या कंगाल हो सकता है। देश के आर्थिक विशेषज्ञों को अभी से इस बात की चिंता सताने लगी है कि अगर ऐसा हुआ तो फिर क्‍या होगा। साल 2023 पाकिस्‍तान के लिए महत्‍वपूर्ण है। वह कंगाल भी हो सकता है और नहीं भी और पहली वाली स्थिति देश के काफी बुरी होगी। कोई भी नहीं चाहेगा कि ऐसा हो। लेकिन क्‍या वाकई पाकिस्‍तान इस साल कंगाल हो जाएगा? हर किसी के दिमाग में बस यही सवाल कौंध रहा है। कुछ एक्‍सपर्ट्स की मानें तो ऐसा होना मुश्किल है। कई वजहें ऐसी हैं जो पाकिस्‍तान को कंगाल नहीं होने देंगी।

सरकार कर रही प्रयास
देश की सरकार हर उस संभावित संसाधन और प्रयासों को आजमाएगी जो पाकिस्‍तान को कंगाल होने से बचा सकेंगे। देश में इस साल चुनाव होने हैं और ऐसे में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हर संभव कोशिश करेंगे कि वह देश को मुश्किल स्थिति में न जाने दें। पाकिस्‍तान की मीडिया की मानें तो अतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी कोई नहीं चाहेगा कि देश कंगाल हो। पाकिस्‍तान के साथी देश जानते हैं कि अगर ऐसा होता है तो फिर आतंरिक और बाह्य सुरक्षा पर नकारात्‍मक असर देखने को मिलेगा। बहुपक्षीय और द्विपक्षीय देनदाताओं को आज भी उम्‍मीद है कि देश की आर्थि‍क स्थिति बेहतर होगी। वो नहीं चाहेंगे कि पाकिस्‍तान डिफॉल्‍ट हो और उनकी रकम अदायगी पर रोक लग जाए।

क्‍यों हो सकती है मुश्किल
राजकीय कर्ज के मामले में कंगाल होना किसी भी देश के लिए मुश्किल स्थिति होती है। जिन देशों ने उसे कर्ज दिया है, वो भी काफी परेशानी में घिर जाते हैं। लेकिन यह भी सच है कि पिछले कुछ सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्‍था का हिस्‍सा रहे कुछ देश कंगाल हुए हैं। पाकिस्‍तान के विशेषज्ञों की मानें तो देश की आर्थिक स्थिति को ऐसा बताया जा रहा है कि जैसे अभी भुखमरी आने वाली है। जबकि ऐसा है ही नहीं। देश अभी अस्‍थायी राहत से भरोसा लगाए हुए है। उसे अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष और दूसरे मित्र देशों से काफी उम्‍मीदें हैं।

क्‍या होगा इस साल
कहा जा रहा है कि अप्रत्यक्ष करों के जरिए से 60% से ज्‍यादा राजस्‍व और 300 अरब डॉलर से ज्‍यादा की जीडीपी अनुपात चिंता का विषय होना चाहिए न कि आईएमएफ के साथ बातचीत का दौर। यह कहना बेमानी भी लग सकता है कि वर्तमान करदाताओं पर भार और दरों के बजाय कर और राजस्व आधार का विस्तार करने की आवश्यकता है। देश में कर और राजस्‍व के आधार को बढ़ाए जाने की जरूरत है। माना जा रहा है कि साल 2023 में राजकीय कर्ज के लिहाज से पाकिस्‍तान के कंगाल होने की उम्‍मीदें नहीं है। इस स्थिति को टाला जा सकता है। मगर यह स्थिति बहुत ज्‍यादा दिनों तक नहीं रहेगी और ऐसे में जल्‍द से जल्‍द इस समस्‍या का समाधान देश को निकालना होगा।

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