अमेरिकी काउंटी जज ने हसबैंड के केरल वाले घर से ली शपथ, 10 साल की उम्र में छोड़ा था देश

कोट्टायम

अमेरिका के टेक्सास की काउंटी अदालत की जज ने पति के केरल वाले घर से शपथ ली है। जहां कासरगोड के भीमानदी गांव में नादुविलयैल के घर का बरामदा जूली ए मैथ्यू के लिए औपचारिक शपथ ग्रहण स्थल बन गया। जूली ए मैथ्यू को फोर्ट बेंड काउंटी के लिए दोबारा से जज चुना गया। उन्होंने वीडियो वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जज पद के लिए शपथ ली। जूली जूली ए मैथ्यू अमेरिका में एक बेंच के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला थीं। वह चार साल तक फोर्ट बेंड काउंटी कोर्ट नंबर- 3 के पीठासीन जज के रूप में काम करेंगी।

बाइबिल पर हाथ रखकर ली शपथ
जूली ए मैथ्यू अपने पति के घर पर केरल में मौजूद थीं। मैथ्यू ने परिवार के सामने कसारगोड स्थित घर से ही शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने जिला जज क्रिश्चियन बेसेरा के सामने अपना बायां हाथ बाइबिल पर रखकर शपथ ली। जिसे उनके पति ने अपनी हथेलियों पर ले रखा था। समारोह से पहले स्थानीय पल्ली के पुजारी ने पूजा-अर्चना की। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मैथ्यू ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि काउंटी में जज बनना एक अद्भुत अनुभव था। ‘यह मेरी अब तक की सबसे अच्छी नौकरी है और मैं इसका पूरी तरह से आनंद ले रही हूं। मैं इसे समुदाय की सेवा करने और एक बेहतर न्यायाधीश बनने के तरीके सीखने के अवसर के रूप में देखती हूं।’

मैथ्यू पठानमथिट्टा के वेन्निकुलम के थिरुवल्ला से साल 1986 में अपने माता-पिता के साथ अमेरिका चली गईं थीं। जूली ए मैथ्यू ने मलयालम मे कहा कि, ‘मेरी मां एक नर्स थी और वह अमेरिका चली गई थी। मैं तब केवल 10 साल की थी और वेनिकुलम के सेंट थॉमस इंग्लिश स्कूल में पांचवी कक्षा में पढ़ रही थी।’ वह फिलाडेल्फिया में पली-बढ़ी और अपने ज्यूरिस डॉक्टरेट के लिए डेलावेयर लॉ स्कूल में दाखिला लेने से पहले पेन स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की।मैथ्यू व्यस्त चुनावी दिनों के बाद अपने पैतृक स्थान पर जाना चाहती हैं।

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