एक साल तीन महीने और 40 में से केवल 2 गवाहों की पेशी, शाहरुख पठान ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांगी जमानत

नई दिल्ली

दिल्ली दंगों के दौरान एक पुलिस के जवान पर पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान को फिलहाल जमानत चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट में उसने बेल एप्लीकेशन दायर करके दरखास्त की है कि उसे जमानत पर रिहा किया जाए। उसका कहना है कि सुनवाई बेहद धीमी चाल से चल रही है। ऐसे ही रहा तो ट्रायल पूरा होने में सालों का समय लगेगा। लिहाजा उसे जमानत पर रिहा किया जाए।

शाहरुख पर आरोप है कि उत्तर पूर्व दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान एक हैड कांस्टेबल पर उसने पिस्तौल तानी थी। उसने दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत की गुहार लगाते हुए दावा किया कि सुनवाई में बहुत देरी हुई है। आरोपी शाहरुख पठान ने कहा कि पिछले एक साल तीन महीने में मामले में 40 में से केवल दो गवाहों से पूछताछ की गई है।

दो मई को फिर से सुनवाई करेगा दिल्ली HC
जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा के समक्ष दलीलें रखी गई थीं। उन्होंने मामले में अगली सुनवाई दो मई को करना तय किया और पुलिस व पठान के वकीलों को अपनी दलीलें लिखित में जमा करने को कहा। पठान के वकील ने सुनवाई के दौरान दलील दी कि दिसंबर 2021 में मामले में आरोप तय किए गए थे, लेकिन अभियोजन पक्ष के केवल दो गवाहों से अब तक पूछताछ की गई है। वकील ने कहा कि उन्होंने जनवरी 2022 में जमानत याचिका दायर की थी और यह एक साल से अधिक समय से लंबित है।

दिल्ली पुलिस ने मार्च 2022 में जमा कराई अपनी रिपोर्ट में जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी की पारिवारिक पृष्ठभूमि आपराधिक है। वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। पठान को तीन मार्च, 2020 को उत्तर प्रदेश के शामली से गिरफ्तार किया गया था। वह इस समय यहां जेल में बंद है। उसके वकीलों ने कुछ और मामलों का हवाला दिल्ली हाईकोर्ट के सामने दिया, जिनमें आरोपियों को ट्रायल के दौरान जमानत दी गई थी। उनकी दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि आरोपियों को बेवजह जेल में रखना सही नहीं है। लखीमपुर मामले का मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इसी आधार पर जमानत दी गई थी।

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