14.1 C
London
Monday, June 8, 2026
Homeराष्ट्रीयपार्टी में असंतोष सदन में बहुत साबित करने के लिए कहने का...

पार्टी में असंतोष सदन में बहुत साबित करने के लिए कहने का आधार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को टिप्पणी की कि सत्तारूढ़ दल में विधायकों के बीच केवल मतभेद के आधार पर बहुमत साबित करने को कहने से एक निर्वाचित सरकार पदच्युत हो सकती है। अदालत ने साथ ही कहा कि राज्य का राज्यपाल अपने कार्यालय का इस्तेमाल इस नतीजे के लिए नहीं होने दे सकता। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा, ‘ यह लोकतंत्र के लिए एक शर्मनाक तमाशा होगा।’ पीठ ने यह टिप्पणी पिछले साल महाराष्ट्र में अविभाजित शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद जून 2022 में महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की।

राज्यपाल ने ठाकरे से बहुमत साबित करने को कहा था
पीठ ने यह टिप्पणी महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के उपस्थित होने के बाद की। मेहता ने घटना का सिलसिलेवार उल्लेख किया और कहा कि उस समय राज्यपाल के पास कई सामग्री थी जिनमें शिवसेना के 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र , निर्दलीय विधायकों का तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र शामिल है। साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने सदन में बहुमत साबित करने की मांग की थी। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तब ठाकरे को सदन में बहुमत साबित करने को कहा था। हालांकि, ठाकरे ने सदन में बहुमत प्रस्ताव पर मतदान होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इससे शिंदे के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने का रास्ता साफ हुआ।

खास नतीजे के लिए गवर्नर ऑफिस का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए
शीर्ष अदालत ने कहा कि पार्टी के विधायकों के बीच मत का आधार कुछ भी हो सकता है जैसे विकास कोष का भुगतान, पार्टी का आदर्शों से हटना लेकिन क्या यह आधार राज्यपाल द्वारा सदन में बहुमत साबित करने को कहने के लिए पर्याप्त हो सकता है? राज्यपाल को अपने कार्यालय का इस्तेमाल खास नतीजे के लिए नहीं करने देना चाहिए। बहुमत साबित करने को कहने से निर्वाचित सरकार पदच्युत हो सकती है।’ इस पीठ में जस्टिस एम आर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पी एस नरसिम्हा शामिल हैं।

नेता प्रतिपक्ष का पत्र मायने नहीं रखता
पीठ ने कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष का पत्र मायने नहीं रखता क्योंकि वह हमेशा कहेंगे कि सरकार ने बहुमत खो दिया या विधायक नाराज हैं। इस मामले में विधायकों द्वारा जान को खतरा बताए जाने वाले पत्र भी प्रासंगिक नहीं है। अदालत ने कहा, ‘केवल एक चीज 34 विधायकों का प्रस्ताव है जो बताता है कि पार्टी के काडर और विधायकों में अंसतोष है… क्या यह बहुत साबित करने को कहने के लिए पर्याप्त है? हालांकि, हम कह सकते हैं कि उद्धव ठाकरे संख्याबल में हार गए थे।”

Latest articles

मध्य प्रदेश में भाजपा उतारेगी तीसरा राज्यसभा कैंडिडेट, दिल्ली से मिली हरी झंडी

कल नामांकन दाखिल करेंगी कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी...

जनता पर फिर महंगाई की मार: घरेलू गैस सिलिंडर 29 रुपये महंगा, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष एक बार...

भोपाल के रेस्टोरेंट में आग, लोगों में हड़कंप, बुझाने के लिए दीवार तोड़कर घुसे दमकलकर्मी

भोपाल। राजधानी के लालघाटी क्षेत्र स्थित भोज इन रेस्टोरेंट में रविवार को अचानक आग...

सांसद आलोक शर्मा के प्रयास लाए रंग: सीहोर में फिर रुकेगी इंदौर-जबलपुर ओवरनाइट एक्सप्रेस

​भोपाल। लंबे समय से चली आ रही सीहोरवासियों की बड़ी मांग आखिरकार पूरी हो...

More like this

जनता पर फिर महंगाई की मार: घरेलू गैस सिलिंडर 29 रुपये महंगा, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमत में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष एक बार...

एनटीपीसी प्रमुख गुरदीप सिंह को मिल सकता है सेवा विस्तार, नए उत्तराधिकारी की खोज जारी

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी के अध्यक्ष और प्रबंध...

कॉकरोच पार्टी का दिल्ली में प्रदर्शन, अभिजीत बोले- हिंदू-मुसलमान की राजनीति करने से नौकरी नहीं मिलती

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में...