4.6 C
London
Saturday, February 14, 2026
Homeराष्ट्रीयपार्टी में असंतोष सदन में बहुत साबित करने के लिए कहने का...

पार्टी में असंतोष सदन में बहुत साबित करने के लिए कहने का आधार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को टिप्पणी की कि सत्तारूढ़ दल में विधायकों के बीच केवल मतभेद के आधार पर बहुमत साबित करने को कहने से एक निर्वाचित सरकार पदच्युत हो सकती है। अदालत ने साथ ही कहा कि राज्य का राज्यपाल अपने कार्यालय का इस्तेमाल इस नतीजे के लिए नहीं होने दे सकता। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा, ‘ यह लोकतंत्र के लिए एक शर्मनाक तमाशा होगा।’ पीठ ने यह टिप्पणी पिछले साल महाराष्ट्र में अविभाजित शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत के बाद जून 2022 में महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की।

राज्यपाल ने ठाकरे से बहुमत साबित करने को कहा था
पीठ ने यह टिप्पणी महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के उपस्थित होने के बाद की। मेहता ने घटना का सिलसिलेवार उल्लेख किया और कहा कि उस समय राज्यपाल के पास कई सामग्री थी जिनमें शिवसेना के 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र , निर्दलीय विधायकों का तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र शामिल है। साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने सदन में बहुमत साबित करने की मांग की थी। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने तब ठाकरे को सदन में बहुमत साबित करने को कहा था। हालांकि, ठाकरे ने सदन में बहुमत प्रस्ताव पर मतदान होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इससे शिंदे के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने का रास्ता साफ हुआ।

खास नतीजे के लिए गवर्नर ऑफिस का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए
शीर्ष अदालत ने कहा कि पार्टी के विधायकों के बीच मत का आधार कुछ भी हो सकता है जैसे विकास कोष का भुगतान, पार्टी का आदर्शों से हटना लेकिन क्या यह आधार राज्यपाल द्वारा सदन में बहुमत साबित करने को कहने के लिए पर्याप्त हो सकता है? राज्यपाल को अपने कार्यालय का इस्तेमाल खास नतीजे के लिए नहीं करने देना चाहिए। बहुमत साबित करने को कहने से निर्वाचित सरकार पदच्युत हो सकती है।’ इस पीठ में जस्टिस एम आर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पी एस नरसिम्हा शामिल हैं।

नेता प्रतिपक्ष का पत्र मायने नहीं रखता
पीठ ने कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष का पत्र मायने नहीं रखता क्योंकि वह हमेशा कहेंगे कि सरकार ने बहुमत खो दिया या विधायक नाराज हैं। इस मामले में विधायकों द्वारा जान को खतरा बताए जाने वाले पत्र भी प्रासंगिक नहीं है। अदालत ने कहा, ‘केवल एक चीज 34 विधायकों का प्रस्ताव है जो बताता है कि पार्टी के काडर और विधायकों में अंसतोष है… क्या यह बहुत साबित करने को कहने के लिए पर्याप्त है? हालांकि, हम कह सकते हैं कि उद्धव ठाकरे संख्याबल में हार गए थे।”

Latest articles

भेल के ट्रेक्शन मोटर डिपार्टमेंट में मजदूर का हाथ मशीन से कटा

भोपाल lभेल भोपाल कारखाने के ट्रैक्शन मोटर डिपार्टमेंट में शनिवार की सुबह काम के...

भोपाल में प्रशासनिक फेरबदल, 11 आईएएस और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के तबादले

भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। सामान्य प्रशासन...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया ‘टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन’ का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मुख्य आतिथ्य में शुक्रवार को 'अलवर टाइगर इंटरनेशनल हाफ मैराथन'...

भजनलाल सरकार में राजस्थान के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल: पहली छमाही में ही 50,900 करोड़ के पार पहुँचा आंकड़ा

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के निर्यात सेक्टर का निरंतर विकास हो...

More like this

छह छंदों के साथ ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य, सरकार ने जारी किए आदेश

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से...

श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल में महाशिवरात्रि पर ‘हर-हर महादेव’ की गूंज, नन्हे बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियाँ

भोपाल कोलार रोड स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति...

महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर दादाजी धाम मंदिर में मेहंदी-हल्दी का आयोजन

भोपाल जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल  दादाजी धाम मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष...