‘चाणक्य’ ने पलट दी रोटी, 15 दिन में दो राजनीतिक विस्फोट… पहला शरद पवार का रिटायरमेंट, दूसरा क्या?

मुंबई

शरद पवार ने मंगलवार को बड़ा सियासी विस्फोट कर दिया। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में कयासों और अटकलों का नया दौर शुरू हो गया है। अजित पवार की हाल ही में बीजेपी से नजदीकियों की अटकलें चर्चा में थीं। इन सबके बीच शरद पवार ने मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर से ऐलान किया कि अब रिटायरमेंट ले रहा हूं। इसके संकेत मिलने लगे थे। सबसे पहले जब उन्होंने रोटी पलटने वाला बयान दिया तो साफ इशारा था कि एनसीपी में कुछ बड़ा होने वाला है। वहीं उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने भी कहा था कि 15 दिन में दो राजनीतिक विस्फोट होंगे। एक महाराष्ट्र और दूसरा दिल्ली में। ऐसे में एक कयास यह भी लग रहा है कि क्या शरद पवार ने पहला धमाका कर दिया है। अब दूसरा सियासी विस्फोट क्या हो सकता है, यह भी दिलचस्प है।

अब दूसरा राजनीतिक विस्फोट दिल्ली से?
शरद पवार ने हाल ही में कहा था कि रोटी पलटने का वक्त आ गया है और सही समय पर नहीं पलटी तो जल जाएगी। यानी पवार ने इशारा कर दिया था कि नेतृत्व में बदलाव का अब सही समय आ चुका है। इसके कुछ ही दिन बाद वाईबी चव्हाण सेंटर से शरद पवार ने रोटी पलट दी या यूं कहें कि एनसीपी अध्यक्ष पद से रिटायरमेंट का ऐलान कर डाला। यानी पहला राजनीतिक विस्फोट तो महाराष्ट्र से हुआ है। अब सवाल उठता है कि दूसरा राजनीतिक विस्फोट क्या हो सकता है? सुले ने कहा था कि दूसरा राजनीतिक विस्फोट दिल्ली से होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि इनमें से एक शिवसेना के 16 बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो सकता है। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला विपरीत आया तो एकनाथ शिंदे के लिए झटका होगा और महाराष्ट्र में नई सियासी खिचड़ी पक सकती है। सुप्रिया सुले ने यह बयान उस वक्त दिया था, जब अजित पवार के बीजेपी के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई थीं।

पवार के इस्तीफे के क्या मायने
शरद पवार के इस्तीफे कुछ इस तरीके से समझना चाहिए कि एनसीपी चीफ ने पहले अपनी किताब का विमोचन करने के लिए महाराष्ट्र भर से अपने कट्टर समर्थकों और कार्यकर्ताओं को मुंबई बुलाया। वाईबी चव्हाण सेंटर पर सभी पार्टी के नेताओं को बुलाया गया था। कार्यक्रम खत्म होने के ठीक पहले शरद पवार ने अचानक अपने इस्तीफे का एक मास्टर स्ट्रोक खेला। इसके बाद शरद पवार के समर्थक और नेता मीडिया के सामने इस्तीफा वापस लेने के लिए दबाव बढ़ाने लगे। वहां पर मौजूद तमाम कार्यकर्ताओं की आंखों में आंसू नजर आए। यह सब कुछ मीडिया के कैमरे के सामने हो रहा था, क्योंकि बुक लॉन्चिंग के मौके पर पूरी मीडिया वहां मौजूद थी।

पवार के ऐलान के पीछे यह स्क्रिप्ट तो नहीं?
दरअसल इसके पीछे की कहानी यह है कि पिछले दो-तीन महीने से अजित पवार परिवार के भीतर बगावत का रुख अख्तियार कर चुके थे। आए दिन उनके बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। इसके बाद अब शरद पवार ने कहीं न कहीं अजित पवार को चित्त कर दिया है। इसके साथ ही बीजेपी के उस तथाकथित प्लान को भी खत्म कर दिया, जिसमें वह पवार परिवार में फूट डालकर एनसीपी को साथ लाने की तैयारी कर रही थी। यह कुछ उसी तरह हो जाता, जैसे उद्धव ठाकरे परिवार के खास रहे एकनाथ शिंदे के पार्टी के ज्यादातर विधायक और नेता चले गए थे। शरद पवार के घर में पार्टी के अधिकतर फैसले कौन देगा इस पर लगातार सियासी ड्रामा चल रहा था। अजित पवार चाहते थे कि पार्टी शरद पवार के बाद सबसे ज्यादा उन्होंने संभाली है तो ऐसे में पार्टी का अगला अध्यक्ष वह खुद बनें। इसके लिए उन्होंने विधायकों की लॉबिंग शुरू कर दी थी, जबकि एनसीपी का एक धड़ा सुप्रिया सुले को अध्यक्ष बनाने के पक्ष में था। हालांकि इन दोनों ही मामलों में शरद पवार लगातार शांत नजर आ रहे थे लेकिन अचानक उन्होंने अपने समर्थकों को बुलाकर जिस तरीके से इस्तीफा देने का ऐलान किया उससे अजित पवार पर दबाव बढ़ गया। अब वह अलग-थलग होते हुए नजर आएंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि पार्टी हमेशा संवेदनाओं के आधार पर चलती है। शरद पवार के इस्तीफे के बाद पार्टी में संवेदनाएं और समर्थकों का ज्वार शरद पवार के साथ होगा।

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