मणिपुर हिंसा में फंसे दिल्ली-हरियाणा के स्टूडेंट्स घर लौटे, सुनाई खौफनाक आपबीती

नई दिल्ली,

मणिपुर में हिंसा के बीच फंसे दिल्ली और हरियाणा के कई छात्र मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पहुंचे. इंफाल से दिल्ली के लिए इंडिगो की फ्लाइट में इन बच्चों को राज्य सरकार की मदद से लाया गया है. दिल्ली एयरपोर्ट पर छात्र को रिसीव करने के लिए उनके पेरेंट्स के साथ साथ दिल्ली सरकार और हरियाणा सरकार के अधिकारी भी मौजूद रहे.

मणिपुर से लौटे छात्रों ने खौफ में गुजारे दिनों को याद किया. मणिपुर से लौटे दिल्ली के महरौली में रहने वाले अभिसार ने ‘आजतक’ से बातचीत में बताया कि एक दिन शाम को वहां हमने बम का धमाका सुना. एक दिन हमने अपने हॉस्टल के सामने सड़क पर आर्मी के काफिले को निकलते हुए भी देखा. तब हमें समझ आया कि बाहर कुछ तनाव की स्थिति है.

माता-पिता को फोन करने पर मिलती थी मणिपुर की जानकारी
अभिसार ने आगे बताया कि इंटरनेट बंद हो जाने की वजह से बाहर की कोई भी खबर नहीं मिल पा रही थी. माता-पिता को फोन करने पर मणिपुर की सारी जानकारी मिल पाती थी. कॉलेज की तरफ से घर जाने की जानकारी मिली. कॉलेज की तरफ से हमें पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हमें राज्य सरकार से बातचीत करने के लिए कहा. दिल्ली के मुख्यमंत्री से हमारी फोन पर बातचीत भी हुई और उन्होंने हमारा दिल्ली के लिए टिकट बुक करा दिया.

पुलिस ने हमें हॉस्टल के अंदर बंद कर दिया
अभिसार ने बताया कि उनके साथ रह रहे सभी स्टूडेंट्स को लगा कि हालात जल्दी ठीक हो जाएंगे. मगर, ऐसा नहीं हुआ. हम सभी तनाव में थे. हालांकि, जब घर जाने की खबर मिली, तो राहत मिली.वहीं, हरियाणा के रहने वाले एक अन्य स्टूडेंट दीपक ने बताया कि मणिपुर में हिंसा बढ़ी, तो पुलिस ने हमें हॉस्टल के अंदर बंद कर दिया था. स्टूडेंट्स ने लोकल चैनल पर न्यूज देखी और पता चला कि बाहर की स्थिति बहुत ज्यादा खराब है. सभी स्टूडेंट्स काफी ज्यादा तनाव में थे.

एयरपोर्ट पहुंचे माता-पिता बच्चे को देख हुए भावुक
इसी बीच हरियाणा का एक परिवार दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे अपने बच्चे को देखकर भावुक हो गए. मणिपुर से दिल्ली आए स्टूडेंट लक्ष्य ने अपने माता-पिता का पैर छूकर आशीर्वाद लिया. इस दौरान माता-पिता की आंखें भर आई. ‘आजतक’ से बातचीत में छात्र के पिता ने कहा कि काफी देर से इंतजार कर रहे थे. अब काफी खुशी मिली है और राहत मिली है.

दिन में रहती थी शांति, रात में होते थे दंगे
लक्ष्य की मां ने भावुक होते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं. मेरे बच्चे को 7 महीने में लौटना था, लेकिन वह 8 महीने बाद लौटा है. राहत की बात है कि वह सही सलामत लौट आया है. मणिपुर में जब बेटे से बात होती थी, तो वह बताता था कि दिन में तो शांति रहती थी, लेकिन रात में बहुत दंगे होते थे.

राज्य सरकार की मदद से बुक हुई टिकट
मणिपुर में बिताए पलों के बारे में जानकारी देते हुए लक्ष्य ने कहा कि मणिपुर में स्थिति बहुत खराब थी. आस-पास काफी दंगे होते रहते थे. मगर, हम लोग वहां सुरक्षित थे और खाने की कमी नहीं थी. हालांकि, सरकार ने काफी जल्दी एक्शन लिया है. हमारी आवाज सरकार तक पहुंच पाई. राज्य सरकार की मदद से सोमवार को हमारी टिकट बुक हुई थी और मंगलवार को हम दिल्ली पहुंच गए हैं.

हॉस्टल में नहीं पहुंच पा रहा था जरूरत का सामान
मणिपुर से दिल्ली लौटे एक अन्य स्टूडेंट अमन ने बताया कि वह हॉस्टल के अंदर बंद थे. हॉस्टल को सील कर दिया गया था और बाहर कड़ी सुरक्षा तैनात थीं. हॉस्टल में बंद होने की वजह से हम तक जरूरत का सामान नहीं पहुंच पा रहा था.

 

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