‘आपलोगों का पढ़ा-लिखा होना बेकार, पांच मिनट मुझे लगेगा’… तलाक केस में जज साहब ने सुनाया गजब फैसला

ग्वालियर

एमपी हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस रोहित आर्य हमेशा अपनी सुनवाई को लेकर चर्चा में रहते हैं। तलाक केस की सुनवाई के दौरान उन्होंने कमाल का फैसला सुनाया है। इस केस में पत्नी ने अपने पति पर 12 केस किए थे। दोनों अब एक-दूसरे से अलग होना चाहता था। 45 वर्षीय पति प्रशांत शर्मा बेटी को अपने साथ रखना चाहते हैं। तलाक केस की सुनवाई के दौरान पति-पत्नी और बेटी के साथ दोनों के पिता कोर्ट में मौजूद थे। जस्टिस रोहित आर्य ने दोनों पक्ष की बातों को सुना है। सुनवाई के दौरान लोगों को फटकार भी लगाई है। अंतिम नतीजे तक पहुंचने से पहले उन्होंने परिवार को बचाने की कोशिश की है।

जज साहब ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि क्यों बाबूजी परिवार को खराब कर रहे हैं? शादी के 14 साल हो गए हैं। बच्ची बोल रही है कि वह बाबा के साथ जाना चाहती है। इस केस में दोनों पक्ष के लोग काफी पढ़े लिखे थे। महिला के पिता वैज्ञानिक के पद से रिटायर हैं। वहीं, युवक के पिता भी ग्रामीण बैंक से रिटायर हैं। महिला और उसके पति भी पढ़े लिखे हैं। जस्टिस रोहित आर्य ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप सभी लोग पढ़े लिखे हैं। फिर इतने पढ़े लिखे होने का क्या फायदा है।

दोनों को समझाया
उन्होंने कहा कि आप दोनों में झगड़ा चल रहा है। आप दोनों इसे आपस में बैठकर सुलझा लो। आपकी एक बच्ची है। आप दोनों में झगड़े की शुरुआत हुई। इसके बाद एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए ईगो फाइट शुरू हो जाती है। मां-बाप बीच में आकर माचिस की तिली लगा जाते हैं तो बात और बढ़ जाती है। फिर इसमें कुछ रिश्तेदार आ जाते हैं और कहते हैं कि डरते क्यों हो। कोर्ट-कचहरी होगा। इसके बाद आप दोनों का दिमाग डायवर्ट हो जाता है। अब आप दोनों को जो पूरा डायरेक्शन मिल रहा है, वो लड़ने का मिल रहा है।

पत्नी ने पति पर किए 12 केस
जस्टिस रोहित आर्य ने दोनों को समझाते हुए कहा कि आप कहेंगे कि ये तैयार नहीं थे। ये कहेंगी ये तैयार नहीं थे। इसमें कोई सच्चाई नहीं है ये सब एक अवधारणा है। आपके हिसाब से आप जो कह रहे हैं वो सही है। इनके हिसाब से वो सही है, जो ये कह रही हैं। ऐसी स्थिति में सही क्या है, ये जानना बड़ी मुश्किल है। उन्होंने पति से कहा कि आप तैयार होकर आए हैं कि तलाक लेना है। उसके बात पति कुछ कहता है। इस पर जज साहब कहते हैं कि मैं समझ गया हूं आपकी बात को। इन्होंने आपको बहुत परेशान किया है। आपके ऊपर 12 केस किए हैं।

बच्ची के मन में क्या ख्याल आएगा
ग्वालियर बेंच के जस्टिस रोहित आर्य ने पति से पूछा कि आपसे इनसे अलग होकर क्या करोगे। आपकी उम्र 45 हो गई। इसी के आसपास मैडम भी होंगी। सोचो इस पड़ाव में अलग होकर तुमलोग क्या करोगे। ये बच्ची जब बड़ी होगी तो तुम दोनों के बारे में इसके मन क्या ख्याल आएगा। शादी के बारे में ये क्या सोचेगी। इसके मन में आज से ही शादी को लेकर ये बात बैठ गई है। आगे चलकर क्या होगा। यह सोचेगी कि शादी का ऐसा हश्र होता है। ये तो समय ही बताएगा। इसके लिए आप दोनों जिम्मेदार हैं। दोनों में कोई कम नहीं है। जब ऐसा ही था तो आप दोनों ने क्यों शादी की। क्यों बच्चा पैदा किया। क्या आप दोनों की जिम्मेदारी इस बच्ची के लिए नहीं थी। अब तुम दोनों किसके लिए जिंदगी जिओगे। आप दोनों को इसकी परवरिश करनी है।

उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की बददुआ बड़ी लगती हैं। आप दोनों साथ में मत रहिए लेकिन बच्ची के साथ गलत कर रहे हैं। जस्टिस रोहित आर्य ने कहा कि पति को कहा कि आप सेल्फफिश हैं। आप सोच रहे हैं कि आपको बच्ची मिल जाए और वो भाड़ में जाए। इस पर पति कुछ दलील देता है। जस्टिस रोहित आर्य कहते हैं कि इतना कुछ कहने के बाद भी आपको कुछ समझ में नहीं आ रहा है। आपको ईश्वर कुछ नहीं देगा। मुझे शक है कि आप के सामान्य इंसान हैं। हम आप दोनों से कहते हैं कि आप दोनों एक-दूसरे से लड़ो और देखो कि कहां तक यह मसला जाता है।

इसके बाद जस्टिस रोहित आर्य ने महिला से पूछा कि आपने अपने सास-ससुर से बात की। इस पर पति कुछ हस्तक्षेप करता है तो जज साहब डांट देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं इनसे बात कर रही हूं। इसके बाद महिला के ससुर को जज साहब बुलाता हैं। उनसे सवाल करते हैं कि क्यों बाबूजी आप परिवार को खराब कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान महिला के ससुर कहते हैं कि इन्होंने बातचीत के दौरान मुंह पर पानी फेंक दिया था। इसके बाद महिला के पिता को सुनवाई के दौरान जज साहब ने बुलाया।

दोनों के ससुर की बात सुनी
जस्टिस रोहित आर्य ने दोनों के ससुर को बुलाकर उनकी बातें सुनी। साथ ही बच्ची से पूछा कि आप बाबा के साथ जानी चाहती हो क्या। इस पर बच्ची ने कहा कि मैं जाना चाहती हूं। दोनों को सुनने के बाद जज साहब ने सलाह दी कि इन दोनों को एक महीने साथ रहने का मौका दीजिए। अगर परिवार बस जाता है तो कितनी अच्छी बात है। इस पर युवक के पिता ने कहा कि कुछ गड़बड़ हो जाएगी। जज साहब ने कहा कि इसके लिए हम सभी लोग बैठे हैं।

इस मामले के लिए जज साहब ने परिवार के सभी लोगों को समझाया है। साथ ही उन्होंने टिप्पणी की है कि आप सभी लोगों को पढ़ा लिखा होना बेकार है। पति और ससुर को अपमानित करना क्या अच्छी बात है। महिला के पिता से जस्टिस ने पूछा कि क्या आपकी पत्नी ने आपके साथ कभी ऐसा किया है। आपके साथ होता आपको कैसा लगता है। आप अपनी बेटी को समझा नहीं रहे हैं और उल्टे उससे मुकदमे करवा रहे हैं। आपके नहीं रहने पर आपकी बेटी की स्थिति क्या होगी। आपको समझाकर बेटी को अपने घर भेजना चाहिए।

आप दोनों समधी साथ में बैठिए। दोनों क्या चाहते हो एक-दूसरे को बता दो। बात-विवाद के दौरान जस्टिस रोहित आर्य भड़क गए और महिला के ससुर को कहा कि आप मेन दोषी है। मैं यहां मुकदमा डिसाइड नहीं कर रहा हूं। अगर करूंगा तो मुझे पांच मिनट लगेगा। मुकदमों को सुनने में मुझे बहुत समय नहीं लगता है। 10-10 मिनट दोनों को सुनकर फैसला सुना दूंगा। आप दोनों समधियों में बातचीत का दौर शुरू हो।

पिता ने बेटी को दिया आशीर्वाद
सभी को समझाने के बाद जस्टिस आर्य बच्ची से कहते हैं कि थोड़ा पापा से भी मिलो। उनसे जाकर हाथ मिलाओ। इसके बाद बच्ची अपने पिता के पास जाती है। वह जब मिलकर कोर्ट रूम में ही लौटने लगती है तो जज साहब उसके पिता को कहते हैं कि इसे आशीर्वाद दो। पिता फिर बच्ची के गले लगते हैं। गौरतलब है कि जस्टिस रोहित आर्य ने इस केस में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने परिवार को बचाने के लिए कुछ वक्त दिया है। दोनों परिवारों से कहा है कि आपलोग आपस में बात कीजिए। इसके बाद अगली तारीख पर सुनवाई होगी।

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