कर्नाटक में कांग्रेस या BJP? या फिर जेडीएस बनेगी किंगमेकर, आज है फैसले की घड़ी

बेंगलुरु,

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब वोटों की गिनती का वक्त आ गया है. शनिवार को सभी 224 सीटों के नतीजे घोषित किए जाएंगे. सुबह आठ बजे के बाद काउंटिंग शुरू होगी और थोड़ी ही देर बाद रुझान आने शुरू हो जाएंगे. सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिल सकती है. वहीं, जद (एस) समेत अन्य क्षेत्रीय दल परिणाम जानने के लिए सांस रोककर इंतजार कर रहे हैं. आजतक-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है. राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. दोपहर 12 बजे तक सरकार को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है.

बता दें कि कर्नाटक में 10 मई को मतदान हुआ था. राज्य में 73.19 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. सत्तारूढ़ भाजपा, कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की जद (एस) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. हालांकि, एक्जिट पोल में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलते नजर आ रहा है. जबकि बीजेपी के हाथ से सत्ता निकलते देखी जा रही है. कल के नतीजों में भाजपा के उम्मीदवार और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, पूर्व सीएम सिद्धारमैया, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और जद (एस) के नेता एचडी कुमारस्वामी समेत कई अन्य दिग्गज नेताओं की चुनावी किस्मत का भी फैसला होगा.

सुबह 8 बजे से शुरू हो जाएगी मतगणना
चुनाव आयोग के मुताबिक, राज्यभर के 36 केंद्रों में सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी और दोपहर तक परिणाम के बारे में एक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना है. चुनावी रुझान से लेकर अंतिम नतीजे जानने के लिए आप AajTak.in पर विजिट कर सकते हैं. यहां आपको सबसे पहले रिजल्ट के अपडेट जानने को मिलेंगे. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए राज्यभर में, विशेषकर मतगणना केंद्रों के अंदर और आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़े मुकाबले की भविष्यवाणी की गई है.

इन सीटों से चुनावी मैदान में दिग्गज
इस चुनाव में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (शिगांव), विपक्ष के नेता सिद्धारमैया (वरुणा), जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी (चन्नापटना), राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (कनकपुरा) से उम्मीदवार हैं. इसके अलावा, पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार (हुबली-धारवाड़ मध्य) भी प्रत्याशी हैं. शेट्टार हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. इन सभी दिग्गजों के चुनावी परिणाम आएंगे.

एग्जिट पोल में कांग्रेस की वापसी?
दोनों दलों के नेता नतीजों को लेकर खुलकर बोलने से बच रहे हैं. जबकि जेडी (एस) को त्रिशंकु जनादेश की उम्मीद है, ताकि सरकार गठन की भूमिका में सामने आ सके. ज्यादातर एग्जिट पोल ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी की संभावना जताई है और सत्तारूढ़ भाजपा के पिछड़ने के आसार बताए हैं. राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना का भी संकेत दिया है.

मोदी फैक्टर के सहारे चुनावी मैदान में उतरी बीजेपी
बताते चलें कि मोदी फैक्टर के दम पर चुनावी मैदान में उतरी बीजेपी राज्य का चुनावी ट्रेंड बदलना चाहती है. कर्नाटक में पिछले 38 साल से सत्ताधारी पार्टी की वापसी नहीं हुई है. यहां 1985 के बाद से सत्तारूढ़ पार्टी को रिपीट होने का मौका नहीं मिला है. फिलहाल, बीजेपी अपने दक्षिण के प्रवेश द्वार को बरकरार रखना चाहती है. बीजेपी का कैंपेन काफी हद तक मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, डबल इंजन सरकार, राष्ट्रीय मुद्दों और केंद्र सरकार की उपलब्धियों और कार्यक्रमों के इर्द-गिर्द रहा. इसके साथ ही मुस्लिम आरक्षण हटाने और बजरंग दल पर बैन से जुड़ा मुद्दा शामिल रहा.

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कर्नाटक की सत्ता में वापसी चाहती है कांग्रेस
इस चुनाव में कांग्रेस ने जीत को लेकर पूरा जोर लगाया है. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्य में चुनावी जनसभा की. यहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी चुनावी कमान संभाले देखे गए. 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है. इस चुनाव के बाद कांग्रेस की विपक्ष के तौर पर आगे की भूमिका तय होने की उम्मीद है. प्रचार में कांग्रेस ने आम तौर पर स्थानीय मुद्दों पर फोकस रखा. शुरुआत में राज्य के नेताओं ने प्रचार अभियान चलाया. हालांकि, बाद में केंद्रीय नेताओं AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोर्चा संभाला और राज्य के लोगों को वादों की गारंटियां देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की.

जद (एस): ‘किंगमेकर’ बनेंगे या ‘किंग’ बनेंगे कुमारस्वामी
इसके साथ ही जेडीएस भी खुद को गेमचेंकर साबित करने की कोशिश में है. फिलहाल, यह देखा जाना बाकी है कि त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जद (एस) सरकार बनाने को लेकर क्या दांव चलती है. चूंकि, अब तक दो दशक में दो बार ऐसा हुआ, जब त्रिशुंक जनादेश की स्थिति बनी और जेडीएस ने सशर्त समर्थन देते हुए खुद का मुख्यमंत्री बनाया.

शर्तों के साथ समर्थन देने को जेडीएस तैयार
मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक, हाल ही में एचडी कुमारस्वामी ने एक बयान में अपना रुख साफ किया है. उन्होंने कहा- राज्य में त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में उस पार्टी को समर्थन देंगे, जो उनकी शर्तों को पूरा करेगा. उनकी पार्टी राज्य में 50 सीटें जीत रही है. उनके पास किसी भी राष्ट्रीय पार्टी (भाजपा या कांग्रेस) के साथ गठबंधन करने की ‘शर्तें’ हैं और शर्त यह है कि कुमारस्वामी को सीएम बनाया जाए. सरकार में उनकी पार्टी के नेताओं को जल संसाधन, बिजली और सार्वजनिक कार्यों समेत प्रमुख पद दिए जाएं.

2018 में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी बीजेपी
बताते चलें कि दिल्ली और पंजाब की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी (आप) ने भी कर्नाटक चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इसके अलावा कुछ सीटों पर छोटे दल भी मैदान में हैं. चुनाव प्रचार के वक्त लगभग सभी दलों को जनता से ‘पूर्ण बहुमत वाली सरकार’ बनाने की अपील करते देखा गया. दरअसल, 2018 के चुनाव में बीजेपी 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, उसके बाद कांग्रेस 80, जेडी (एस) 37 और निर्दलीय, बसपा और कर्नाटक प्रज्ञावंता जनता पार्टी (केपीजेपी) को एक-एक सीट मिली थी. लेकिन, किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया था.

येदियुरप्पा को 3 दिन में देना पड़ा था इस्तीफा
इस बीच, कांग्रेस और जद (एस) ने गठबंधन सरकार बनाने की रणनीति तैयार करना शुरू की, तभी भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा किया और सरकार बना ली. हालांकि, ट्रस्ट वोट में संख्या नहीं जुटा पाने की वजह से तीन दिन के भीतर इस्तीफा देना पड़ा था.

‘पहले कांग्रेस गठबंधन, फिर बीजेपी सरकार’
उसके बाद कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन की सरकार बनी और मुख्यमंत्री के रूप में कुमारस्वामी ने जिम्मेदारी संभाली, लेकिन 14 महीने में गठबंधन सरकार भी गिर गई और निर्दलीय समेत 17 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया. सत्तारूढ़ विधायक गठबंधन से बाहर हो गए और भाजपा में शामिल हो गए. बाद में बीजेपी सत्ता में वापस आई और 2019 में हुए उपचुनावों में सत्तारूढ़ दल ने 15 में से 12 सीटों पर जीत हासिल की. बोम्मई ने करीब 4 साल तक सरकार चलाई.

2018 में कांग्रेस को मिले थे सबसे ज्यादा वोट
2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 38.04 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था, उसके बाद भाजपा को 36.22 प्रतिशत, जद (एस) को 18.36 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार भी कांग्रेस का वोट शेयर काफी बढ़ सकता है और कांग्रेस और बीजेपी के वोट शेयर में अंतर 2% से बढ़कर 8% तक पहुंच सकता है. वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 116 विधायक हैं, उसके बाद कांग्रेस के 69, जद (एस) के 29, बसपा का एक, निर्दलीय दो, स्पीकर एक और खाली छह (चुनाव से पहले अन्य दलों में शामिल होने से इस्तीफा और मृत्यु के बाद) सीटें हैं.

एग्जिट पोल में कांग्रेस को बढ़त
आजतक-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक, इस बार कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल सकता है. कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को सबसे ज्यादा 122 से 140 सीटें, बीजेपी को 62 से 80 सीटें, JDS को 20 से 25 सीटें और अन्य को शून्य से तीन सीटें मिलने का अनुमान है. वोट शेयर के मामले में भी कांग्रेस पार्टी, बीजेपी से काफी आगे निकल सकती है. एग्जिट पोल में कांग्रेस पार्टी को 42.5%, बीजेपी को 34.5% और JDS को 16.5% वोट मिलने का अनुमान है और सीटों और वोटों के लिहाज से ये स्थिति पिछली बार के मुकाबले काफी अलग है.

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